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विस्तृत उत्तर
मंदराचल पर्वत मंथन के समय इसलिए डूबने लगा क्योंकि क्षीरसागर की गहराई में उसका कोई स्थिर आधार नहीं था। पर्वत अत्यंत भारी था और जल में खड़ा करने पर वह अपने भार से नीचे की ओर धंसने लगा। देवता और असुर उसे रोकने में असमर्थ थे। यदि पर्वत डूब जाता, तो समुद्र मंथन असंभव हो जाता और अमृत की प्राप्ति नहीं होती। इसी संकट में भगवान विष्णु ने कूर्मावतार लिया। वे विशाल कछुए के रूप में समुद्र के तल में गए और अपनी कठोर पीठ पर मंदराचल को स्थिर कर दिया।
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