विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में अग्नि के विभिन्न रूपों का वर्णन है। हर नरक में अग्नि का स्वरूप उस पाप की प्रकृति के अनुसार भिन्न है।
कुंभीपाक नरक — इस नरक में धधकती अग्नि पर तेल से भरे बड़े-बड़े कड़ाहे (घड़े) रखे होते हैं। पापी को इस खौलते तेल में डालकर 'कुंभी' (घड़े) में पकाया जाता है — जैसे भोजन पकाते हैं। यह नरक भूमि हड़पने वाले और ब्रह्म-हत्यारों के लिए है।
तपन और संप्रतापन नरक — यहाँ चारों ओर अग्नि ही अग्नि है। पापी जीव इस अग्निमय वातावरण में सदा जलता रहता है।
रौरव नरक — इस नरक में विशाल अग्नि-कुंड है जहाँ पापी जीव को जलाया जाता है। नरक की भूमि सदा जलती रहती है।
विलेपक नरक — यह लाख की आग से जलने वाला नरक है।
कालसूत्र नरक — यहाँ लोहे की गर्म सलाखों से दंड दिया जाता है।
अंगारोपच्य नरक — यह नरक जलते अंगारों से भरा है।
इस प्रकार नरक में अग्नि के अनेक रूप हैं — खौलता तेल, दावाग्नि, लाख की आग, अंगारे और गर्म धातु — प्रत्येक पाप का अपना विशेष अग्नि-दंड है।





