विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार प्रेत योनि में जाने के कारण और बचाव:
कारण
- ▸अकाल मृत्यु, अधूरी इच्छाएँ, श्राद्ध/संस्कार न होना, अत्यधिक मोह/आसक्ति, महापाप।
बचाव
- 1धर्मपूर्ण जीवन — सत्य, दया, दान, अहिंसा।
- 2ईश्वर भक्ति — नित्य पूजा, मंत्र जप, गीता पाठ।
- 3मोह त्याग — गीता: *'मोह से प्रेत योनि'* — आसक्ति कम करें।
- 4दान — अन्नदान, गो-दान, वस्त्रदान।
- 5गंगा स्नान — जीवन में एक बार गंगा स्नान।
- 6अंतिम समय ईश्वर स्मरण — गीता (8.5): अंतिम स्मरण = अगला जन्म।
- 7परिजन: विधिवत अंतिम संस्कार + 13 दिन गरुड़ पुराण + श्राद्ध/तर्पण करें।
- 8तुलसी दल + गंगाजल मृत्यु के समय।
सबसे महत्वपूर्ण: *'ज्ञानी और सत्यव्रती व्यक्ति को बिना कर्मकांड किए भी सद्गति प्राप्त होती है'*। = सच्चा और नेक जीवन = सबसे बड़ा बचाव।





