विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म की ज्ञान-गंगा में यह बोध होता है कि इस सृष्टि में कोई भी पदार्थ जड़ अथवा चेतना-रहित नहीं है। प्रत्येक अणु-परमाणु में एक दिव्य स्पंदन है।
विशेष रूप से, स्वर्ण, रजत और ताम्र जैसी धातुएं केवल भौतिक पदार्थ नहीं, अपितु दिव्य शक्तियों एवं ग्रहों की ऊर्जाओं की स्थूल अभिव्यक्ति हैं।
इनका शास्त्रोक्त एवं अनुष्ठानिक प्रयोग ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करने का एक गूढ़ आध्यात्मिक विज्ञान है, जिसके माध्यम से साधक अपने मनोरथों को सिद्ध कर सकता है।





