विस्तृत उत्तर
खप्पर (भिक्षा पात्र — नारियल/कपाल) = तांत्रिक प्रतीक:
प्रतीक
- 1त्याग/वैराग्य: खप्पर = भिक्षा पात्र — 'मेरा कुछ नहीं, भिक्षा = ईश्वर दान।' संन्यासी/अघोरी।
- 2अहंकार शून्य: राजा भी भिक्षा मांगे = अहंकार नाश। शिव = 'भिक्षाटन' (भिक्षा लेने वाले)।
- 3ब्रह्मा कपाल: शिव ने ब्रह्मा का शिर काटा → खप्पर (कपाल) = शिव का भिक्षापात्र = ब्रह्म हत्या प्रायश्चित्त।
- 4शून्यता: खाली खप्पर = मन खाली (शून्य) = ध्यान सर्वोत्तम अवस्था।
- 5नारियल खप्पर: अघोरी/नाथ = नारियल कटोरा = सरल जीवन।
सार: खप्पर = त्याग + शून्यता + विनम्रता + शिव कृपा।





