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नरक प्रश्नोत्तरी — 151 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित नरक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 151 प्रश्न

लोक

यमलोक और नरक में क्या संबंध है?

यमलोक कर्मों का न्याय-स्थान है; नरक वे दंड-स्थल हैं जहाँ पापी आत्माएँ यमराज के निर्णय के बाद यातना भोगती हैं।

यमलोकनरकभागवत पुराण
लोक

हाटकेश्वर शिवलिंग के नीचे क्या बताया गया है?

हाटकेश्वर शिवलिंग और पाताल के नीचे अथाह जलराशि और उसके नीचे पचपन करोड़ घोर नरक बताए गए हैं।

हाटकेश्वर शिवलिंग नीचेनरकपाताल
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र में कब लौटती है?

कर्मों का भोग पूरा होने के बाद आत्मा पुनः जन्म-मृत्यु के चक्र में लौटती है।

जन्म मृत्यु चक्रकर्म भोगनरक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

नरक भोगने के बाद आत्मा का क्या होता है?

नरक भोगने के बाद आत्मा नया शरीर लेने के लिए जन्म-मृत्यु के चक्र में लौट आती है।

नरकआत्माजन्म मृत्यु चक्र
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी आत्मा को कहाँ भेजा जाता है?

पापी आत्मा को पापों के अनुसार कुम्भीपाक, रौरव आदि नरकों में भेजा जाता है।

पापी आत्मानरककुम्भीपाक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भूमि दान नरक से कैसे बचाता है?

भूमि दान नरक की यातनाओं से पूर्ण रक्षा करने वाला माना गया है।

भूमि दाननरकदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना देह कष्ट सहने के लिए बनी होती है; वह पीड़ा अनुभव करती है लेकिन नष्ट नहीं होती।

यातना देहनरकपीड़ा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह क्या होती है?

यातना देह पापी आत्मा को कष्ट सहने के लिए मिलने वाला ऐसा शरीर है जो पीड़ा पाता है पर नष्ट नहीं होता।

यातना देहपापी जीवयममार्ग
लोक

अतल लोक और नरक में मूलभूत अंतर क्या है?

अतल भोग का स्थान है — स्वर्ग से अधिक सुख, रोग-बुढ़ापा नहीं। नरक दंड का स्थान है — यातना और पीड़ा। नरक पातालों से भी नीचे है।

अतल लोकनरकअंतर
लोक

पाताल और नरक में क्या फर्क है?

पाताल भोग-विलास का स्थान है जहाँ स्वर्ग से भी अधिक सुख है। नरक दंड का स्थान है जहाँ पापियों को यातना मिलती है। नरक पातालों से भी नीचे है।

पातालनरकफर्क
लोक

अतल लोक नरक है क्या?

नहीं, अतल लोक नरक नहीं है। यह 'बिल-स्वर्ग' है जहाँ स्वर्ग से भी अधिक भौतिक सुख हैं। नरक इन पातालों से भी नीचे गर्भोदक सागर के ऊपर है।

अतल लोकनरकफर्क
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

बिना मंत्र और विधान के रुद्राक्ष धारण करने पर क्या चेतावनी दी गई है?

शिव पुराण के अनुसार बिना मंत्र के रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य घोर नरक में पड़ता है।

चेतावनीशिव पुराणनरक
जीवन एवं मृत्यु

पितरों का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पितर अपमान पर — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, उग्रगंध नरक। यमदूत का उलाहना — 'पितरों का तर्पण क्यों नहीं किया?' इस जन्म में पितृदोष। 'पितृ-कर्म बहुत महत्वपूर्ण।'

पितर अपमाननरकपितृदोष
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

प्रेत को कष्ट देने पर — पितृदोष (इस जन्म में), नरक (मृत्यु के बाद)। 'पितरों का तर्पण न करना = पाप।' स्वयं भी प्रेत बनकर भटकना। संतान-रोग-व्यापार में हानि।

प्रेत को कष्टनरकपितृदोष
जीवन एवं मृत्यु

पिंडदान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पिंडदान न करने वाले को — उग्रगंध नरक (गंदगी से भरा)। पितर को — कल्पान्त तक निर्जन वन में भटकन। 'पितरों का तर्पण न करना = यमदूत का उलाहना।' इस जन्म में पितृदोष।

पिंडदान न करनाउग्रगंधनरक
जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

श्राद्ध न करने वाले को — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, पितृघातक का दंड। 'श्राद्ध न होने पर पितर प्रेत बना रहता है।' इस जन्म में पितृदोष — रोग, संतानहीनता, कलह।

श्राद्ध न करनानरकपितर
जीवन एवं मृत्यु

पवित्र कर्मों को त्यागने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पवित्र कर्म त्यागने पर — शाल्मी-वृक्ष (व्रत-तीर्थ त्याग), कुड्म, प्रेत योनि (ईश्वर-विमुखता), घोर नरक (देव-पूजा न करना)। यमदूत का उलाहना — 'तीर्थ-पूजा क्यों नहीं की?'

पवित्र कर्म त्यागनरकव्रत-तीर्थ
जीवन एवं मृत्यु

अधार्मिक जीवन जीने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधार्मिक जीवन पर — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, प्रेत योनि। 'तीर्थ-देव-अतिथि-पितर — सबकी उपेक्षा = नरक।' व्यसनों में लिप्त → नरक। पुनर्जन्म में अधम योनि।

अधार्मिक जीवननरककुड्म
जीवन एवं मृत्यु

पाप छुपाने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पाप छुपाने पर — कोई बचाव नहीं। श्रवण देवता सब चित्रगुप्त को बताते हैं। 'गुप्त पाप करने वाले वैतरणी में जाते हैं।' चित्रगुप्त का लेखा — सब कुछ दर्ज।

पाप छुपानानरकश्रवण देवता
जीवन एवं मृत्यु

दूसरों को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दूसरों को कष्ट देने पर — प्रेत योनि, घोर नरक। 'निर्बल को सताने वाला प्रेत योनि में।' जरूरतमंद की मदद न करना — नरक। वैतरणी में ऋण-दंड। इस जन्म में भी कष्ट।

दूसरों को कष्टनरकप्रेत योनि
जीवन एवं मृत्यु

दान में दोष करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान में दोष पर — श्राद्ध में अपवित्र अन्न पर श्वेतकुष्ठ, गलत पंडित से श्राद्ध पर नरक। दान में अहंकार का फल अपूर्ण। 'निंदक-नशेड़ी पंडित से कर्म करवाने वाला नरकगामी।'

दान में दोषनरकश्राद्ध
जीवन एवं मृत्यु

दान में कपट करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दान में कपट पर — तमिश्रम नरक (पिटाई), ब्राह्मण-अतिक्रमण पर नरक+जन्मान्ध। 'प्रतिज्ञा करके दान न देने वाला सियार।' अशुद्ध पात्र से श्राद्ध — पितरों को नरक।

दान में कपटनरकछल
जीवन एवं मृत्यु

ब्राह्मण को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ब्राह्मण को कष्ट देने पर — वैतरणी, अंगारे-गर्म रेत (ब्राह्मण-पीड़न), कुंभीपाक (ब्रह्महत्या)। 'ब्राह्मण को पैर मारने वाला लूला-लंगड़ा।' ब्राह्मण-कलह बढ़ाने वाला भी नरकगामी।

ब्राह्मण कष्टवैतरणीनरक
जीवन एवं मृत्यु

अतिथि का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अतिथि-अपमान पर — घोर नरक, वैतरणी। यमदूत का उलाहना — 'अतिथि को नमस्कार नहीं किया।' 'भूखे अतिथि को लौटाने वाला नरकगामी।' बुजुर्ग-अपमान पर आग में खाल निकलने तक दंड।

अतिथि अपमाननरकयमदूत

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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