ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

यमदूत प्रश्नोत्तरी — 76 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यमदूत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 76 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी आत्माएँ यमपुरी में किस द्वार से प्रवेश करती हैं?

पापी आत्माएँ यमपुरी में भयंकर दक्षिण द्वार से प्रवेश करती हैं।

पापी आत्मायमपुरीदक्षिण द्वार
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी पार न कर पाने पर आत्मा को क्या होता है?

गोदान न होने पर आत्मा वैतरणी में धकेली जाती है और पीड़ा सहते हुए तैरकर पार करती है।

वैतरणी नदीगोदानआत्मा कष्ट
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को हर नगर से आगे क्यों धकेलते हैं?

विश्राम और श्राद्ध पिण्ड के बाद यमदूत आत्मा को अगले नगर की ओर आगे बढ़ाते हैं।

यमदूत16 पुरियाँयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को गले में पाश से बाँधकर क्यों ले जाया जाता है?

गले में पाश से बाँधना यमदूतों द्वारा आत्मा को यममार्ग पर ले जाने का वर्णन है।

पाशयमदूतगला
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को कैसे ले जाते हैं?

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को गले में पाश से बाँधकर यममार्ग की ओर खींचते हैं।

तेरहवाँ दिनयमदूतपाश
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन आत्मा के साथ क्या होता है?

तेरहवें दिन आत्मा घर से संबंध छोड़कर यमदूतों के अधीन यममार्ग की यात्रा पर निकलती है।

तेरहवाँ दिनयमदूतयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गोदान न होने पर आत्मा वैतरणी कैसे पार करती है?

गोदान न होने पर आत्मा रक्त और मवाद से भरी वैतरणी को कष्टपूर्वक तैरकर पार करती है।

गोदान न होनावैतरणीकष्ट
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को पिण्ड का भाग क्यों दिया जाता है?

यमदूतों को पिण्ड का भाग इसलिए दिया जाता है ताकि वे संतुष्ट रहें और प्रेत को अकारण कष्ट न दें।

यमदूतपिण्डदानतृतीय भाग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्ड का तीसरा भाग किसे मिलता है?

पिण्ड का तीसरा भाग यमराज के अनुचरों यानी यमदूतों को मिलता है।

पिण्ड का तीसरा भागयमदूतयमराज
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को किससे बाँधते हैं?

यमदूत आत्मा को पाश यानी रस्सी से बाँधते हैं।

यमदूतपाशआत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद पापी आत्मा किसे देखती है?

पापी आत्मा मृत्यु के बाद भयंकर यमदूतों को देखती है।

पापी आत्मायमदूतमृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को देखकर पापी जीव क्या करता है?

यमदूतों को देखकर पापी जीव भय से मल-मूत्र त्याग देता है।

यमदूतपापी जीवभय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में यमदूतों का वर्णन कैसे है?

भागवत पुराण में यमदूतों को भयंकर, उग्र दृष्टि वाले और पापी जीव को भयभीत करने वाला बताया गया है।

भागवत पुराणयमदूतमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?

यमदूत भयंकर, उग्र और क्रोध से भरी आँखों वाले बताए गए हैं।

यमदूतस्वरूपभयंकर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय यमदूत कब आते हैं?

जब प्राण कंठ में अवरुद्ध होते हैं, तब पापी जीव के सामने यमदूत आते हैं।

यमदूतमृत्युप्राण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्राण कंठ में रुकने पर क्या होता है?

प्राण कंठ में रुकने पर चेतना सिमटती है और पापी जीव को यमदूत दिखाई देते हैं।

प्राणोत्क्रमणकंठयमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी जीव को यातना देह क्यों मिलती है?

पापी जीव को अपने कर्मों के अनुसार यममार्ग और नरक की यातनाएँ सहने के लिए यातना देह मिलती है।

पापी जीवयातना देहयमदूत
तुलसी विवाह परिचय

तुलसी को भगवान विष्णु ने क्या वरदान दिया?

विष्णु का वरदान: (1) वृंदा 'तुलसी' रूप में उत्पन्न होगी — त्रिलोकी में सर्वाधिक पूजनीय, (2) बिना तुलसी-दल के विष्णु की कोई पूजा, नैवेद्य या यज्ञ स्वीकार्य नहीं, (3) जहाँ तुलसी का वास = यमदूत प्रवेश नहीं कर सकते।

तुलसी वरदानविष्णु प्रियापूजा में अनिवार्य
माला के प्रकार और देवता

तुलसी माला का माहात्म्य क्या है?

तुलसी माला से सात्विकता, भक्ति और वैराग्य बढ़ता है, मन-शरीर शुद्ध होते हैं। पद्म पुराण: जिसके कंठ में तुलसी माला हो उसे यमदूत भी स्पर्श नहीं कर सकते।

तुलसी माहात्म्यसात्विकता भक्तियमदूत
जीवन एवं मृत्यु

अतिथि का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अतिथि-अपमान पर — घोर नरक, वैतरणी। यमदूत का उलाहना — 'अतिथि को नमस्कार नहीं किया।' 'भूखे अतिथि को लौटाने वाला नरकगामी।' बुजुर्ग-अपमान पर आग में खाल निकलने तक दंड।

अतिथि अपमाननरकयमदूत
जीवन एवं मृत्यु

वस्त्रदान का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण में वस्त्रदान मृत्यु से पहले करने योग्य महत्वपूर्ण दानों में है। यमदूतों को प्रसन्न करता है, यममार्ग पर सहायक है और श्राद्ध में वस्त्र देने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

वस्त्रदानमहत्वयमदूत
जीवन एवं मृत्यु

अन्नदान का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण में यमदूत पापियों से 'जल और अन्न का दान न देने' का उलाहना देते हैं। अन्नदान से यममार्ग पर भोजन मिलता है और प्रेत-पितरों को तृप्ति मिलती है। 'अन्नदानं परं दानम्' — सनातन का यह वचन गरुड़ पुराण का सार है।

अन्नदानमहत्वयमदूत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कहाँ ले जाया जाता है?

नरक में जीव को — यमराज के दरबार में → नरक दर्शन → वापस मृत्युलोक → तेरहवें दिन पुनः → वैतरणी → दक्षिण द्वार → कर्मानुसार नरक में ले जाया जाता है। एक नरक से दूसरे नरक की यात्रा भी होती है।

नरकयात्रायमदूत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कौन दंडित करता है?

नरक में मुख्यतः यमदूत दंड देते हैं — लोहे की लाठी, मुद्गर, गदा, मूसल से। प्रत्येक नरक में विशेष यमदूत हैं। भयंकर कुत्ते, सर्प, राक्षस भी माध्यम हैं। सर्वोच्च अधिकार यमराज का है।

नरकदंडयमदूत

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।