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स्कंद पुराण प्रश्नोत्तरी — 38 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित स्कंद पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 38 प्रश्न

तुलनात्मक अध्ययन

काशी में स्थित सोमानंदीश्वर लिंग, चंद्रेश्वर लिंग और सोमेश्वर लिंग में क्या मुख्य अंतर है?

सोमेश्वर लिंग गुजरात के सोमनाथ का ज्योतिर्लिंग प्रतिरूप है; चंद्रेश्वर लिंग चंद्रदेव द्वारा स्थापित है जो समृद्धि देता है; जबकि सोमानंदीश्वर लिंग शिवगण सोमनंदी द्वारा स्थापित एक 'तपस्या-स्थल' है जो अवसाद और क्रोध दूर करता है।

सोमानंदीश्वर बनाम चंद्रेश्वरसोमेश्वर लिंगकाशी के शिवलिंग
काशी के शिवलिंग

काशी के नंदीवन में सोमानंदीश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?

इसकी स्थापना भगवान शिव के उग्र गण 'सोमनंदी' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में प्राप्त होता है, जब शिव ने गणों को राजा दिवोदास की परीक्षा लेने काशी भेजा था।

सोमानंदीश्वर शिवलिंगशिव गण सोमनंदीस्कंद पुराण
काशी के शिवलिंग

काशी में महोदरेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की और इसका प्रामाणिक उल्लेख किस पुराण में है?

इसकी स्थापना भगवान शिव के परम गण 'महोदर' ने की थी। इसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खण्ड (अध्याय ५३-५४) में प्राप्त होता है।

महोदरेश्वर शिवलिंगशिव गण महोदरस्कंद पुराण
काशी के शिवलिंग

काशी में महाकालेश्वर शिवलिंग कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना किसने की?

यह काशी के दारा नगर में महामृत्युंजय महादेव मंदिर प्रांगण में स्थित है। इसकी स्थापना शिव के परम गण 'महाकाल' ने की थी, जिसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड में है।

महाकालेश्वर शिवलिंगकाशीदारा नगर
काशी के शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में शंकुकर्णेश्वर का क्या स्थान है — 68 मोक्षदायी शिवलिंग

काशी खंड अध्याय 69 में 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में शंकुकर्णेश्वर 'महातेज लिंग' के रूप में वर्णित हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणु, नैमिषारण्य का देवदेव लिंग भी इनमें हैं। श्लोक 173 — इनके नाम सुनने मात्र से हजारों जन्मों के पाप नष्ट।

काशी खंडअध्याय 6968 शिवलिंग
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव कौन हैं और इनकी स्थापना किसने की?

शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी का गुप्त शिवलिंग है, जिसे शिवगण 'शंकुकर्ण' ने स्थापित किया। काशी खंड अध्याय 69 में इसे काशी के 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में गिना गया है।

शंकुकर्णेश्वर महादेवकाशीशिवगण
काशी के शिवलिंग

काशी में कुल कितने शिवलिंग हैं और कौन-कौन ने स्थापित किए?

काशी में ५११+ शिवलिंग — १२ स्वयंभू, ४६ देवताओं द्वारा, ४७ ऋषियों द्वारा, ४० शिवगणों द्वारा, २९४ शिवभक्तों द्वारा स्थापित। काशी तांत्रिक दृष्टि से एक 'महा-यंत्र' है। वर्तमान में ~३२४ शिवलिंग अस्तित्व में।

काशीशिवलिंग511
काशी के तीर्थ

घंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराण

तीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।

घंटाकर्ण हृदफलश्रुतिमोक्ष
पौराणिक कथाएँ

राजा दिवोदास के कारण शिव ने काशी क्यों छोड़ी थी?

दिवोदास के राजकाल में शिव मंदराचल गए। काशी की स्थिति जानने को योगिनियाँ, सूर्य, ब्रह्मा भेजे — सब काशी की माया में मुग्ध होकर लौटे नहीं। फिर घंटाकर्ण-महोदर को भेजा — वे भी मोहित होकर रुक गए और शिवलिंग स्थापित कर दिए।

दिवोदासकाशीशिव
काशी के तीर्थ

घंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब) क्या है और इसमें स्नान का क्या फल है?

घंटाकर्ण हृद शिवगण घंटाकर्ण द्वारा स्वयं खोदा गया पवित्र कुंड है (K 60/67)। स्कंद पुराण कहता है — इसमें स्नान कर एकाग्र होने पर विश्वनाथ की आरती के घंटों का दिव्य नाद सुनाई देता है।

घंटाकर्ण हृदकर्णघंटा तालाबकाशी तीर्थ
काशी के शिवलिंग

काशी में शिवगणों द्वारा स्थापित शिवलिंगों की सूची

काशी खंड के अनुसार — दंडपाणि ने दंडीश्वर, घंटाकर्ण ने घंटाकर्णेश्वर, वीरभद्र ने वीरभद्रेश्वर, कुण्डोदर ने कुण्डोदरेश्वर, महाकाल ने महाकालेश्वर, क्षेमक ने क्षेमेश्वर, पंचशीर्ष ने पंचशिखेश्वर की स्थापना की।

शिवगणकाशीशिवलिंग
पुराण ज्ञान

स्कंद पुराण सबसे बड़ा पुराण क्यों है?

स्कन्द पुराण में ८१,१०० श्लोक हैं — किसी अन्य पुराण से अधिक, इसीलिए यह सबसे बड़ा है। इसमें ६ खण्ड हैं। काशी, जगन्नाथ, महाकाल, रामेश्वर जैसे तीर्थों की महिमा, नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत और शिवरात्रि का वर्णन है।

स्कंद पुराणसबसे बड़ा पुराणकार्तिकेय
स्तोत्र परिचय

लक्ष्मी सहस्त्रनाम क्या है?

लक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्र में देवी के 1000 नाम हैं — स्कंद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में यह मिलता है। प्रमुख नाम हैं — श्री, रमा, पद्मा, इंदिरा, वसुंधरा, महालक्ष्मी, भुवनेश्वरी, मोक्षदायिनी। शुक्रवार को इसका पाठ लक्ष्मी को स्थायी करता है।

सहस्रनामलक्ष्मी सहस्रनाम1000 नाम
कार्तिकेय कथा

कार्तिकेय को स्कंद क्यों कहते हैं?

कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ में भी यह नाम सार्थक है।

स्कंदकार्तिकेयस्कंद अर्थ

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।