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पंचांग प्रश्नोत्तरी — 64 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पंचांग विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 64 प्रश्न

पंचांग एवं ज्योतिष

वृद्धि योग क्या होता है?

वृद्धि 27 नित्ययोगों में एकादश, शुभ योग। 'विकास-उन्नति' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 133°20'–146°40'। स्वामी सूर्य। व्यापार-निवेश-शिक्षा के लिए उत्तम। जन्म में महत्वाकांक्षी, प्रगतिशील, प्रभावशाली।

वृद्धि योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

गण्ड योग क्या होता है?

गण्ड 27 नित्ययोगों में दशम, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अवरोध-ग्रंथि' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 120°–133°20'। स्वामी अग्नि। महत्वपूर्ण कार्य और निवेश वर्जित। जन्म में मेधावी, संघर्षशील, प्रशासन-कुशल।

गण्ड योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

शूल योग क्या होता है?

शूल 27 नित्ययोगों में नवम, 9 अशुभ योगों में से एक। 'तीव्र पीड़ा-बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 106°40'–120°। स्वामी सर्प। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में कठोर, संघर्षशील, दृढ़ इच्छाशक्ति।

शूल योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

धृति योग क्या होता है?

धृति 27 नित्ययोगों में अष्टम, शुभ योग। 'धैर्य-दृढ़ता' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 93°20'–106°40'। स्वामी जलदेवता। दीर्घकालीन कार्यों के लिए उत्तम। जन्म में धैर्यशाली, दृढ़, स्थिर पारिवारिक जीवन।

धृति योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

सुकर्मा योग क्या होता है?

सुकर्मा 27 नित्ययोगों में सप्तम, शुभ योग। 'उत्तम कर्म' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 80°–93°20'। स्वामी इन्द्र। धार्मिक-सामाजिक कार्यों के लिए उत्तम। जन्म में धर्मपरायण, परिश्रमी, यशस्वी।

सुकर्मा योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

अतिगण्ड योग क्या होता है?

अतिगण्ड 27 नित्ययोगों में षष्ठ, 9 अशुभ योगों में से एक। 'अत्यधिक बाधा' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 66°40'–80°। स्वामी चंद्रमा। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में साहसी, धर्मप्रेमी, किंतु दुर्घटना-सावधान।

अतिगण्ड योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

शोभन योग क्या होता है?

शोभन 27 नित्ययोगों में पंचम, शुभ योग। 'सुंदर-शोभायमान' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 53°20'–66°40'। स्वामी बृहस्पति। यात्रा के लिए सर्वोत्तम। जन्म में आकर्षक, चतुर, कलाप्रेमी।

शोभन योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

सौभाग्य योग क्या होता है?

सौभाग्य 27 नित्ययोगों में चतुर्थ, शुभ योग। 'उत्तम भाग्य' का द्योतक। सूर्य-चंद्र योगफल 40°–53°20'। स्वामी ब्रह्मा। सभी मांगलिक कार्यों के लिए शुभ। जन्म में भाग्यशाली, परोपकारी, समाज में मान्य।

सौभाग्य योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

आयुष्मान योग क्या होता है?

आयुष्मान 27 नित्ययोगों में तृतीय, शुभ योग। 'दीर्घायु' का बोधक। सूर्य-चंद्र योगफल 26°40'–40°। स्वामी रुद्र/शिव। स्वास्थ्य कार्य और विवाह के लिए उत्तम। जन्म में दीर्घायु, स्वस्थ, ऊर्जावान।

आयुष्मान योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

प्रीति योग क्या होता है?

प्रीति 27 नित्ययोगों में द्वितीय, अत्यंत शुभ योग। 'प्रेम और मित्रता' का प्रतीक। सूर्य-चंद्र योगफल 13°20'–26°40'। स्वामी भगवान विष्णु। विवाह-व्यापार-यात्रा शुभ। जन्म में मिलनसार, वाणी-मधुर, समृद्ध।

प्रीति योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं ज्योतिष

विष्कुम्भ योग क्या होता है?

विष्कुम्भ 27 नित्ययोगों में प्रथम और 9 अशुभ योगों में एक है। 'विष + कुम्भ' = जहर का घड़ा। सूर्य-चंद्र योगफल 0°–13°20' पर होता है। स्वामी यक्ष। मांगलिक कार्य वर्जित। जन्म में प्रभावशाली किंतु शत्रु-पीड़ित।

विष्कुम्भ योग27 नित्ययोगपंचांग
पंचांग एवं कैलेंडर

पूर्णिमांत और अमांत पंचांग में अंतर

अमांत: माह = अमावस्या तक (गुजरात/दक्षिण/सरकारी)। पूर्णिमांत: माह = पूर्णिमा तक (उत्तर भारत)। शुक्ल पक्ष = दोनों समान; कृष्ण = माह नाम भिन्न।

पूर्णिमांतअमांतपंचांग
पंचांग एवं कैलेंडर

पंचांग कैसे पढ़ें सरल भाषा में

5 अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह), नक्षत्र (चंद्र स्थिति), योग (सूर्य+चंद्र), करण (तिथि आधा)। शुभ = शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। ऑनलाइन: = सरलतम।

पंचांगपढ़नासरल
मुहूर्त

शुभ मुहूर्त कैसे निकालें किसी भी काम के लिए

सरल: अभिजित मुहूर्त (दोपहर ~11:36-12:24, बुधवार छोड़कर)। पंचांग: शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। राहु काल टालें। महत्वपूर्ण कार्य: ज्योतिषी अनिवार्य। ऑनलाइन:।

शुभ मुहूर्तविधिपंचांग
पुरश्चरण

पुरश्चरण के पांच अंग क्या हैं?

पुरश्चरण के पाँच अंग (मंत्रमहार्णव): जप (मूल — अक्षर × लाख), हवन (जप का 10वाँ — अग्नि में आहुति), तर्पण (हवन का 10वाँ — देव-ऋषि-पितर को जल), मार्जन (तर्पण का 10वाँ — जल-छिड़काव), ब्राह्मण अर्चन (मार्जन का 10वाँ — भोजन-दक्षिणा)। अनुपात: 10 लाख → 1 लाख → 10000 → 1000 → 100।

पुरश्चरण के अंगपंचांगहवन
पुरश्चरण

पुरश्चरण कैसे किया जाता है?

पुरश्चरण के छह चरण: संकल्प → नित्य जप (ब्रह्ममुहूर्त, एक संख्या) → हवन (जप का 10वाँ) → तर्पण (हवन का 10वाँ) → मार्जन → ब्राह्मण भोजन। कठोर नियम: एकाहार, भूमि-शयन, ब्रह्मचर्य, मंत्र-गोपनीयता, एक दिन न छूटे। खंड-पुरश्चरण (40-90 दिन) गुरु-मार्गदर्शन में स्वीकार्य।

पुरश्चरण विधिअनुष्ठान विधिपंचांग

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।