ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

यममार्ग प्रश्नोत्तरी — 103 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यममार्ग विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 103 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में छाया या विश्राम क्यों नहीं मिलता?

यममार्ग तपते सूर्य से दग्ध और छाया-विहीन है; विश्राम केवल 16 पुरियों में थोड़े समय के लिए मिलता है।

यममार्गछायाविश्राम
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग का वातावरण कैसा है?

यममार्ग तपता, छाया-विहीन, भयावह और भूख-प्यास व यातना से भरा मार्ग है।

यममार्गवातावरणगरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा प्रतिदिन कितने योजन चलती है?

आत्मा प्रतिदिन 247 योजन या कुछ पाठभेदों के अनुसार 200.5 योजन चलती है।

आत्मा यात्राप्रतिदिन योजनयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में आत्मा का शरीर कैसे पीड़ित होता है?

यममार्ग में आत्मा का शरीर खाया, फाड़ा और भेदा जाता है, फिर भी वह दुख अनुभव करता रहता है।

यममार्गआत्मा का शरीरयातना
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा भूख, प्यास, थकान, दाह, प्रहार, कुत्तों-कौवों और भयानक मार्ग की यातनाएँ सहती है।

यममार्गआत्मा के कष्टयातना देह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह वायु-प्रधान क्यों कही गई है?

यातना देह वायु-प्रधान है और पापी जीव को यममार्ग के कष्ट सहने के लिए मिलती है।

यातना देहवायु प्रधानपापी जीव
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी जीव का पिण्डज शरीर यातना देह में कब बदलता है?

पापी जीव का पिण्डज शरीर यममार्ग और नरक की यातनाएँ सहने के लिए यातना देह में बदलता है।

पापी जीवपिण्डज शरीरयातना देह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यममार्ग क्या होता है?

यममार्ग पृथ्वी से यमलोक तक की 86,000 योजन लंबी कठोर यात्रा का मार्ग है।

यममार्गयमलोकमृत्युलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को गले में पाश से बाँधकर क्यों ले जाया जाता है?

गले में पाश से बाँधना यमदूतों द्वारा आत्मा को यममार्ग पर ले जाने का वर्णन है।

पाशयमदूतगला
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन के प्रस्थान का क्या वर्णन है?

गरुड़ पुराण में तेरहवें दिन आत्मा को पाश से बाँधकर यमदूतों द्वारा यममार्ग ले जाने का वर्णन है।

गरुड़ पुराणतेरहवाँ दिनयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन आत्मा के साथ क्या होता है?

तेरहवें दिन आत्मा घर से संबंध छोड़कर यमदूतों के अधीन यममार्ग की यात्रा पर निकलती है।

तेरहवाँ दिनयमदूतयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी के नाविक का प्रश्न क्या होता है?

वैतरणी का नाविक पूछता है कि क्या आत्मा ने पृथ्वी पर गोदान किया था।

वैतरणी नाविकगोदानयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गोदान आत्मा की यात्रा में कैसे मदद करता है?

गोदान आत्मा को वैतरणी नदी पार करने के लिए नौका दिलाता है।

गोदानआत्मा यात्रावैतरणी
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी पार करने के लिए गोदान क्यों जरूरी है?

गोदान होने पर आत्मा को वैतरणी पार करने के लिए नौका मिलती है।

वैतरणीगोदानयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी क्या है?

वैतरणी नदी यमलोक से पहले आने वाली रक्त, मवाद और अस्थियों से भरी भयंकर नदी है।

वैतरणी नदीयममार्गयमलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर से आत्मा क्या अनुभव करती है?

पिण्डज शरीर से आत्मा यममार्ग के शुभ-अशुभ फल और यातनाएँ अनुभव करती है।

पिण्डज शरीरयममार्गशुभ अशुभ फल
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह में आत्मा को पीड़ा कैसे होती है?

यातना देह में आत्मा जलने, कटने, फटने, भूख-प्यास, थकान और यममार्ग के कष्टों को अनुभव करती है।

यातना देहआत्मा की पीड़ायममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना देह कष्ट सहने के लिए बनी होती है; वह पीड़ा अनुभव करती है लेकिन नष्ट नहीं होती।

यातना देहनरकपीड़ा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यातना देह क्या होती है?

यातना देह पापी आत्मा को कष्ट सहने के लिए मिलने वाला ऐसा शरीर है जो पीड़ा पाता है पर नष्ट नहीं होता।

यातना देहपापी जीवयममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा क्या है?

मृत्यु के बाद 13 दिनों में आत्मा वायुजा देह से पिण्डज शरीर पाती है, सपिण्डीकरण से प्रेतत्व छोड़ती है और तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू करती है।

मृत्यु के बाद आत्मा13 दिन की यात्रागरुड़ पुराण
जीवन एवं मृत्यु

प्रेतकल्प में यममार्ग का वर्णन क्यों किया गया है?

प्रेतकल्प में यममार्ग का वर्णन — मृत्यु के बाद की सच्चाई बताने, दान की आवश्यकता सिद्ध करने, भक्ति की श्रेष्ठता दर्शाने, परिजनों को श्राद्ध का महत्व समझाने और वैराग्य की प्रेरणा जगाने के लिए।

प्रेतकल्पयममार्गकारण
जीवन एवं मृत्यु

दीपदान का क्या महत्व है?

दीपदान से यममार्ग के अंधकार में प्रकाश मिलता है। दशगात्र में प्रतिदिन दीप का प्रावधान है। सांयकाल घट पर दीप प्रेत का मार्गदर्शक है। श्राद्ध में जलाया दीप पितर-पथ को प्रकाशित करता है।

दीपदानमहत्वयममार्ग
जीवन एवं मृत्यु

जलदान का वैतरणी से क्या संबंध है?

जलदान वैतरणी की यातना से बचाता है। जिसने जलदान किया उसे यहाँ राहत मिलती है। न करने वाले को रक्त-मवाद के जल में तृप्त होना पड़ता है। 'जल का दान क्यों नहीं दिया' — यमदूत यही उलाहना देते हैं।

जलदानवैतरणीयममार्ग
जीवन एवं मृत्यु

गोदान का यममार्ग से क्या संबंध है?

गोदान और यममार्ग का सीधा संबंध — गोदानी की गाय वैतरणी पर प्रकट होती है, जीव उसकी पूंछ पकड़कर पार होता है, यमदूत उसे कष्ट नहीं देते। गरुड़ पुराण में 'वैतरणी पार कराने के लिए गाय की प्रतीक्षा' की प्रार्थना भी है।

गोदानयममार्गवैतरणी

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।