विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में यममार्ग का विस्तृत और भयावह वर्णन अनेक शास्त्रीय कारणों से है।
मृत्यु के बाद की सच्चाई बताना — गरुड़ पुराण का मूल प्रश्न है — 'मृत्यु के बाद क्या होता है?' यममार्ग का वर्णन इस प्रश्न का उत्तर है।
दान की आवश्यकता सिद्ध करना — यममार्ग पर भूख-प्यास, कोड़े, वैतरणी — ये सभी वर्णन इसलिए हैं कि 'दान रूपी पाथेय के बिना यममार्ग में क्लेश होता है।' यमदूत का उलाहना — 'अन्न-जल का दान क्यों नहीं दिया?' — यह प्रत्यक्ष प्रेरणा है।
भक्ति की श्रेष्ठता — गरुड़ पुराण में यममार्ग के कष्टों का वर्णन करने के बाद कहा गया है — 'भगवान का नाम सुगमतापूर्वक लिया जा सकता है, जिह्वा प्राणी के अपने वश में है, तो भी लोग नरक जाते हैं, ऐसे अधम मनुष्यों को बार-बार धिक्कार है।' यह भक्ति की सर्वोच्चता का संदेश है।
परिजनों का कर्तव्य — यममार्ग की कठिनाइयाँ जानकर परिजन पिंडदान और श्राद्ध के महत्व को समझते हैं।
वैराग्य की प्रेरणा — यममार्ग का भयावह वर्णन मनुष्य में संसार से वैराग्य और परमात्मा-भक्ति की प्रेरणा जगाता है।





