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गरुड़ पुराण प्रश्नोत्तरी — 591 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित गरुड़ पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 591 प्रश्न

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा की 13 दिन की यात्रा क्या है?

मृत्यु के बाद 13 दिनों में आत्मा वायुजा देह से पिण्डज शरीर पाती है, सपिण्डीकरण से प्रेतत्व छोड़ती है और तेरहवें दिन यममार्ग की यात्रा शुरू करती है।

मृत्यु के बाद आत्मा13 दिन की यात्रागरुड़ पुराण
लोक

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय श्रीहरि का ध्यान क्यों करना चाहिए?

मृत्यु के समय मोह-माया त्यागकर श्रीहरि का ध्यान करने की बात गरुड़ पुराण में कही गई है।

गरुड़ पुराणमृत्युश्रीहरि
लोक

गरुड़ पुराण के अनुसार शरीर में तपोलोक कहाँ है?

गरुड़ पुराण के अनुसार तपोलोक मनुष्य के ललाट पर स्थित है।

गरुड़ पुराणशरीरतपोलोक
लोक

गरुड़ पुराण में अतल लोक का क्या वर्णन है?

गरुड़ पुराण अतल लोक को कामुकता और विलासिता का केंद्र मानता है जहाँ बल असुर का राज है और आध्यात्मिक चेतना का अभाव है।

गरुड़ पुराणअतल लोककामुकता
तिल का महत्व और षट्तिला

षट्तिला क्या होता है — छह तरह के तिल प्रयोग कौन से हैं?

षट्तिला = तिल के 6 प्रयोग: (1) तिल उबटन (स्नान पूर्व), (2) तिल स्नान (काले तिल जल में), (3) तिल तर्पण (पितरों को), (4) तिल हवन (अग्नि में), (5) तिल दान (ब्राह्मण-दरिद्र को), (6) तिल भक्षण (लड्डू-खिचड़ी खाना)।

षट्तिला6 तिल प्रयोगगरुड़ पुराण
तिल का महत्व और षट्तिला

गरुड़ पुराण में तिल के बारे में क्या कहा है?

गरुड़ पुराण: भगवान विष्णु ने गरुड़ को बताया — 'तिल मेरे पसीने से उत्पन्न हुए हैं। ये अत्यंत पवित्र हैं। श्वेत, काले या भूरे — समस्त पापों और दुष्ट शक्तियों का नाश करते हैं।'

गरुड़ पुराणविष्णु पसीनातिल उत्पत्ति
तिल का महत्व और षट्तिला

मकर संक्रांति पर तिल का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण: तिल = भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न। श्वेत, काले या भूरे — समस्त पापों और दुष्ट शक्तियों का नाश। मकर संक्रांति पर षट्तिला (तिल के 6 प्रयोग) अनिवार्य।

तिल महत्वगरुड़ पुराणविष्णु पसीना
धातु दान

गरुड़ पुराण में स्वर्ण दान के बारे में क्या कहा गया है?

गरुड़ पुराण: स्वर्ण दान 'अष्ट महादान' में सर्वश्रेष्ठ है — इससे ब्रह्मा, ऋषि और धर्मराज संतुष्ट होते हैं, दाता यमलोक के कष्ट नहीं भोगता और सीधे स्वर्ग प्राप्त करता है।

गरुड़ पुराणअष्ट महादानसुवर्ण दान
धातु दान

स्वर्ण दान से क्या फल मिलता है?

गरुड़ पुराण: स्वर्ण दान से यमलोक के कष्ट नहीं भोगने पड़ते, सीधे स्वर्ग मिलता है। सत्यलोक निवास के बाद पुनर्जन्म में रूपवान, धार्मिक, श्रीमान और पराक्रमी राजा का जन्म मिलता है।

स्वर्ण दानयमलोक मुक्तिस्वर्ग प्राप्ति
रत्नों का दिव्य उद्गम

रत्नों का उद्गम कहाँ से हुआ?

गरुड़ पुराण और भागवत के अनुसार रत्नों का उद्गम दैत्यराज बलि के महायज्ञ से हुआ — वामन अवतार में भगवान के चरण स्पर्श से बलि का शरीर विभिन्न रत्नों में परिवर्तित होकर भू-मंडल पर बिखर गया।

रत्न उद्गमदैत्यराज बलिगरुड़ पुराण
श्राद्ध अधिकार

क्या महिलाएं (बेटियां या पत्नियां) श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार अगर बेटा न हो तो पत्नी श्राद्ध कर सकती है। यदि परिवार में कोई पुरुष न हो, तो बेटियां (विवाहित या अविवाहित) भी पूरी विधि से श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं।

स्त्री श्राद्ध अधिकारगरुड़ पुराणउत्तराधिकार
जीवन एवं मृत्यु

पितरों का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पितर अपमान पर — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, उग्रगंध नरक। यमदूत का उलाहना — 'पितरों का तर्पण क्यों नहीं किया?' इस जन्म में पितृदोष। 'पितृ-कर्म बहुत महत्वपूर्ण।'

पितर अपमाननरकपितृदोष
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

प्रेत को कष्ट देने पर — पितृदोष (इस जन्म में), नरक (मृत्यु के बाद)। 'पितरों का तर्पण न करना = पाप।' स्वयं भी प्रेत बनकर भटकना। संतान-रोग-व्यापार में हानि।

प्रेत को कष्टनरकपितृदोष
जीवन एवं मृत्यु

पिंडदान न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पिंडदान न करने वाले को — उग्रगंध नरक (गंदगी से भरा)। पितर को — कल्पान्त तक निर्जन वन में भटकन। 'पितरों का तर्पण न करना = यमदूत का उलाहना।' इस जन्म में पितृदोष।

पिंडदान न करनाउग्रगंधनरक
जीवन एवं मृत्यु

श्राद्ध न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

श्राद्ध न करने वाले को — कुड्म-पूतिमृत्तिक नरक, पितृघातक का दंड। 'श्राद्ध न होने पर पितर प्रेत बना रहता है।' इस जन्म में पितृदोष — रोग, संतानहीनता, कलह।

श्राद्ध न करनानरकपितर
जीवन एवं मृत्यु

पवित्र कर्मों को त्यागने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पवित्र कर्म त्यागने पर — शाल्मी-वृक्ष (व्रत-तीर्थ त्याग), कुड्म, प्रेत योनि (ईश्वर-विमुखता), घोर नरक (देव-पूजा न करना)। यमदूत का उलाहना — 'तीर्थ-पूजा क्यों नहीं की?'

पवित्र कर्म त्यागनरकव्रत-तीर्थ
जीवन एवं मृत्यु

अधार्मिक जीवन जीने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अधार्मिक जीवन पर — कुड्म-कालसूत्र-पूतिमृत्तिक नरक, प्रेत योनि। 'तीर्थ-देव-अतिथि-पितर — सबकी उपेक्षा = नरक।' व्यसनों में लिप्त → नरक। पुनर्जन्म में अधम योनि।

अधार्मिक जीवननरककुड्म
जीवन एवं मृत्यु

पाप पर पछतावा न करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पश्चाताप न करने पर — एक नरक से दूसरे नरक, कोई राहत नहीं, मृत्युकाल का अवसर भी गँवाना। 'हजारों-लाखों वर्षों तक यातना।' घोर नरक — रौरव-महारौरव-कुंभीपाक।

पछतावा न करनादीर्घ नरककर्मफल
जीवन एवं मृत्यु

पाप छुपाने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

पाप छुपाने पर — कोई बचाव नहीं। श्रवण देवता सब चित्रगुप्त को बताते हैं। 'गुप्त पाप करने वाले वैतरणी में जाते हैं।' चित्रगुप्त का लेखा — सब कुछ दर्ज।

पाप छुपानानरकश्रवण देवता
जीवन एवं मृत्यु

निर्दोष को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

निर्दोष को कष्ट देने पर — लोहशंकु नरक (कीलें), महारौरव, जलते डंडों से पिटाई। 'निर्दोष को कष्ट = आत्मा का पतन।' अहिंसा परम धर्म।

निर्दोष कष्टलोहशंकुमहारौरव
जीवन एवं मृत्यु

दूसरों को कष्ट देने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

दूसरों को कष्ट देने पर — प्रेत योनि, घोर नरक। 'निर्बल को सताने वाला प्रेत योनि में।' जरूरतमंद की मदद न करना — नरक। वैतरणी में ऋण-दंड। इस जन्म में भी कष्ट।

दूसरों को कष्टनरकप्रेत योनि
जीवन एवं मृत्यु

छल करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

छल करने वाले को — तमिश्रम (पिटाई), गर्म रेत-अंगारे-काँटे, शाल्मी-वृक्ष (छल से धन)। 'मित्रघाती → गिद्ध योनि, क्रय में धोखा → उल्लू।'

छलतमिश्रमअसिपत्रवन
जीवन एवं मृत्यु

हिंसा करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

हिंसा करने वाले को — कुंभीपाक (खौलता तेल), क्रीमिक (कीट), सूलप्रोत (लोहे के शूल), लोहशंकु (लोहे की कीलें)। 'जो करोगे वही भोगोगे' — पुनर्जन्म में शिकार बनना।

हिंसाकुंभिपाकक्रीमिक
जीवन एवं मृत्यु

ईर्ष्या करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

ईर्ष्यालु को — रौरव नरक (लालची-ईर्ष्यालु), संधांश नरक (निंदा पर नाखूनों से खरोंचना)। 'दूसरों के गुणों में दोष देखने वाले नरकगामी।' पुनर्जन्म में अभाव।

ईर्ष्यारौरवसंधांश

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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