विस्तृत उत्तर
यद्यपि रूढ़िवादी परंपराएं महिलाओं को पिंडदान से रोकती हैं, किंतु शास्त्रीय प्रमाण (गरुड़ पुराण और धर्म सिंधु) स्पष्ट कहते हैं कि "पुत्र के अभाव में पत्नी और पत्नी के अभाव में सहोदर भाई" श्राद्ध कर सकता है। माता सीता द्वारा फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ को पिंडदान करना इसका प्रबल पौराणिक साक्ष्य है। अतः यदि कुल में कोई पुरुष न हो या अस्वस्थ हो, तो विवाहित या अविवाहित पुत्री पूर्ण विधि से श्राद्ध कर सकती है।




