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विस्तृत उत्तर
अट्ठाईस व्यास ये बताए गए हैं: क्रतु, सत्य, भार्गव, अंगिरा, सविता, मृत्यु, शतक्रतु, वसिष्ठ, सारस्वत, त्रिधामा, त्रिवृत, शततेजा, नारायण, तरक्षु, अरणि, देव, कृतंजय, ऋतंजय, भरद्वाज, गौतम, वाचःश्रवा, शुष्मायणि, तृणबिन्दु, रक्ष, शक्ति, पराशर, जातूकर्ण्य और कृष्णद्वैपायन। पाठ में कृष्णद्वैपायन को साक्षात् विष्णुस्वरूप मुनि कहा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 38, श्लोक 14-20
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