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विस्तृत उत्तर
कृष्णद्वैपायन व्यास अट्ठाईस व्यासों की सूची में बताए गए हैं। पाठ में उनका उल्लेख जातूकर्ण्य के बाद आता है और उन्हें साक्षात् विष्णुस्वरूप मुनि कहा गया है। इस सूची में क्रतु से आरम्भ होकर कृष्णद्वैपायन तक व्यासों के नाम आते हैं। इसलिए कृष्णद्वैपायन यहाँ व्यास-परम्परा के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और विष्णुस्वरूप मुनि के रूप में वर्णित हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 38, श्लोक 14-20
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