विस्तृत उत्तर
पौराणिक कथाओं में दिव्यास्त्रों को सामान्यतः मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर चलाए जाने वाले बाणों के रूप में दर्शाया गया है और भौमास्त्र के संदर्भ में भी यही माना जाता है। हालाँकि एक वैकल्पिक और आकर्षक दृष्टिकोण भी मिलता है जो इसे एक 'यंत्र या पद्धति' के रूप में वर्णित करता है जिसका उपयोग प्राचीन काल में अविश्वसनीय रूप से जटिल नक्काशी करने के लिए किया जाता था। यह द्वैत इस अस्त्र की बहुमुखी प्रतिभा की ओर संकेत करता है। संभव है कि इसका 'अस्त्र' स्वरूप युद्ध के लिए था जबकि 'यंत्र' स्वरूप सृजन और निर्माण के लिए।
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