ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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पूजा विधि

पूजा विधि, पूजा के नियम, सामग्री, समय, पूजा घर की व्यवस्था — सभी प्रश्नों के शास्त्रीय उत्तर।

498प्रश्नोत्तर
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राधा कृष्ण युगल पूजा कैसे करें?

राधाजी को श्रीकृष्ण की बाईं ओर स्थापित करें। पंचामृत स्नान, मिलते-जुलते वस्त्र, गुलाब-तुलसी, माखन-मिश्री-पेड़े का भोग। 'ॐ राधा-कृष्णाभ्यां नमः' या 'राधे कृष्णा' जप करें। एकादशी और राधाष्टमी पर विशेष पूजा करें।

पूजा विधानराधा कृष्णयुगल पूजा
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पूजा का प्रसाद कुत्ते बिल्ली को दे सकते हैं या नहीं?

हाँ, दे सकते हैं — सभी प्राणी ईश्वर का अंश हैं। गाय को देना सर्वमान्य शुभ है, कुत्ता भैरव का वाहन है। विशेष नैवेद्य पहले मनुष्यों को दें, बचा प्रसाद जानवरों को दे सकते हैं। इस विषय पर मत भिन्नता है।

पूजा नियमप्रसादकुत्ता
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स्नान का मंत्र क्या है?

स्नान का मुख्य मंत्र है — 'गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥' जिससे सातों पवित्र नदियों का जल में आह्वान होता है और साधारण जल भी तीर्थ-तुल्य हो जाता है। यजुर्वेद का 'ॐ आपो हि ष्ठा मयो भुवः' मंत्र भी जल की शक्ति का वैदिक स्तवन है।

पूजा विधि एवं कर्मकांडस्नान मंत्रनित्य क्रिया मंत्र
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पूजा के बाद बचे फूल कहाँ विसर्जित करें?

पूजा के बचे फूल बहते जल, पवित्र पेड़ (पीपल/बरगद/तुलसी) की जड़ या बगीचे की मिट्टी में विसर्जित करें। कूड़ेदान या अपवित्र स्थान पर कभी न फेंकें। बासी फूल दोबारा पूजा में न चढ़ाएँ।

पूजा नियमपूजा फूलविसर्जन
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लड्डू गोपाल पूजा का विशेष विधान क्या है?

लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें। प्रातः पंचामृत स्नान, मौसमी वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बाँसुरी, माखन-मिश्री-तुलसी का भोग, दिन में दो बार भोग, रात्रि में शयन सेवा। तुलसी अनिवार्य है।

पूजा विधानलड्डू गोपालबाल कृष्ण
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सुबह और शाम की आरती में अंतर?

प्रातः=जागरण/ऊर्जा/शुभारंभ(सूर्योदय)। संध्या=अंधकार दूर/रक्षा/शांति(सूर्यास्त)। दोनों अनिवार्य। एक=संध्या अधिक महत्वपूर्ण।

पूजा विधिसुबह आरतीशाम आरती
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राम के 108 नाम जप कैसे करें?

तुलसी माला, 'ॐ श्रीरामाय नमः...' 108 नाम। सरल: 'ॐ श्रीरामाय' 108 बार=समान। रामनवमी/मंगल/गुरुवार। तुलसीदास: 'राम नाम=मणि दीपक।' सभी पाप नाश+मोक्ष।

पूजा विधिराम108 नाम
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नवग्रह हवन कैसे करें?

गणेश→गायत्री 21→9 ग्रह मंत्र प्रत्येक 108+'स्वाहा'→पूर्णाहुति→शांति। 9 बीज मंत्र(ह्रां/श्रां/क्रां...)। पंडित से करवाना उत्तम — जटिल हवन।

पूजा विधिनवग्रहहवन
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पूजा घर में चांदी का दीपक जलाने से क्या विशेष लाभ होता है?

चांदी का दीपक चंद्रमा और शुक्र से संबंधित है। सात्विक धन की वृद्धि, मानसिक शांति, चंद्र की शुभता और गृह-कलह में कमी लाता है। चावल का आसन, सफेद पुष्प और गाय के घी से जलाएँ।

पूजा विधानचांदी दीपकदीपक लाभ
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पंचदेव पूजा क्या है और कैसे करें?

पंचदेव = शिव+विष्णु+गणेश+सूर्य+देवी। शंकराचार्य (स्मार्त परंपरा) ने सम्प्रदाय एकता के लिए स्थापित। सभी को जल-पुष्प-धूप-दीप-नैवेद्य + मंत्र जप। = सम्पूर्ण हिंदू पूजा एक साथ।

पूजा विधिपंचदेवपूजा
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संध्या के समय दीपक कहाँ कहाँ रखना चाहिए?

संध्या काल में दीपक पूजा घर, तुलसी के पास, मुख्य द्वार, दक्षिण दिशा और रसोई में रखना चाहिए। घी का दीपक सर्वोत्तम है। दीपक बुझने न दें और 'शुभं करोति...' श्लोक का पाठ करें।

पूजा नियमसंध्या दीपकसायं दीपक
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पूजा घर में पैर फैलाकर बैठने से क्या दोष लगता है?

पूजा घर में पैर फैलाकर बैठना देवताओं का अनादर है — पूजा फल में कमी और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठें। पैर कभी मूर्ति की ओर न करें।

पूजा नियमपूजा शिष्टाचारपैर फैलाना
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पूजा घर में अगरबत्ती की राख कहाँ डालनी चाहिए?

अगरबत्ती/धूप की राख गमले, बगीचे की मिट्टी, पेड़ की जड़ या पवित्र जल में विसर्जित करें। कचरे में फेंकना अशुभ है। शिव पूजा की राख भभूति के रूप में तिलक के लिए प्रयोग कर सकते हैं।

पूजा नियमअगरबत्ती राखपूजा सामग्री विसर्जन
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आरती में कपूर जलाने का आध्यात्मिक अर्थ?

कपूर जलता=अवशेष नहीं=अहंकार नाश। सुगंध फैलाकर=अच्छे कर्म। प्रकाश=ज्ञान। वैज्ञानिक: एंटीबैक्टीरियल। शुद्ध भीमसेनी कपूर उत्तम।

पूजा विधिकपूरआरती
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सुंदरकांड के बाद क्या करना चाहिए?

सुंदरकांड के बाद श्रीराम और हनुमान जी की आरती करें, भोग अर्पण करें और उपस्थित सभी को प्रसाद वितरित करें। पुस्तक को लाल कपड़े में लपेट कर पवित्र स्थान पर रखें। अनुष्ठान पूर्ण होने पर हवन का भी विधान है।

पूजा विधिसुंदरकांडपाठ के बाद
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आरती करने का सही तरीका — कितनी बार घुमाएं?

3 बार(सामान्य)। गणेश=4, विष्णु=12, शिव=14, देवी=16। Clockwise, दाहिना हाथ। चरण→नाभि→मुख→पूर्ण। दिन 2 बार(प्रातः+संध्या)। ज्योति से हाथ→सिर।

पूजा विधिआरतीविधि
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सूर्य देव की पूजा विधि?

प्रातः तांबा लोटा जल+फूल+अक्षत→सूर्य ओर धारा→'ॐ सूर्याय' 7 बार। 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय' 108। आदित्य हृदय स्तोत्र। रविवार/छठ/संक्रांति। सरल: 1 लोटा जल=पर्याप्त।

पूजा विधिसूर्यपूजा
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पुष्पांजलि मंत्र के बोल क्या हैं?

मंत्र पुष्पांजलि वेदमंत्रों का वह संग्रह है जो आरती के बाद देवता को पुष्प अर्पित करते हुए पढ़ा जाता है। 'ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः...' से आरम्भ होकर चार श्लोकों में यह यज्ञ-महिमा, कुबेर-स्तुति और राज्य-कल्याण की प्रार्थना करता है। इसके बाद 'मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि' कहकर पूजा पूर्ण मानी जाती है।

पूजा विधि एवं कर्मकांडपुष्पांजलि मंत्रमंत्र पुष्पांजलि
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पूजा विधि — प्रश्नोत्तर

पूजा विधि से सम्बन्धित 498+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप पूजा विधि के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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