विस्तृत उत्तर
प्रातः (सुबह) आरती
- ▸समय: सूर्योदय (ब्राह्म मुहूर्त — ~4:30-6:00)।
- ▸उद्देश्य: देवता जागरण, दिन का शुभारंभ।
- ▸मंत्र: मंगल, प्रार्थना, सूर्य अर्घ्य।
- ▸दीपक: घी = सर्वोत्तम (सात्विक)।
- ▸भाव: ऊर्जा, उत्साह, कृतज्ञता।
संध्या (शाम) आरती
- ▸समय: सूर्यास्त (~6:00-7:00)।
- ▸उद्देश्य: दिन समापन, अंधकार(अज्ञान) दूर, रात्रि रक्षा।
- ▸मंत्र: शांति, रक्षा प्रार्थना।
- ▸दीपक: तेल/घी।
- ▸भाव: शांति, समर्पण, रक्षा।
समान: दोनों में दीपक+कपूर+घंटी+मंत्र। दोनों अनिवार्य — प्रातः+संध्या = पूर्ण दिन आवृत।
एक ही कर सकें: संध्या = अधिक महत्वपूर्ण (अंधकार निवारण)।





