विस्तृत उत्तर
सुंदरकांड का पाठ पूर्ण होने के बाद कुछ विशेष कार्य करने का विधान है जो पाठ को सम्पूर्ण बनाते हैं।
सबसे पहले पाठ समाप्त होने पर हनुमान जी और भगवान श्रीराम की आरती करनी चाहिए। आरती क्रम में पहले श्रीराम जी की आरती और फिर हनुमान जी की आरती का विधान बताया गया है। आरती के साथ-साथ भगवान को भोग अर्पण करना चाहिए — गुड़-चना, लड्डू या अन्य मिष्ठान।
आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाना चाहिए। जो लोग पाठ में सम्मिलित हों उन सभी को प्रसाद दिया जाए। पाठ में भाग लेने वालों के लिए प्रसाद ग्रहण करना पाठ का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद सुंदरकांड की पुस्तक को लाल कपड़े में श्रद्धापूर्वक लपेट कर पूजा स्थान पर रख देना चाहिए — इसे इधर-उधर नहीं रखना चाहिए।
यदि नियत दिनों का अनुष्ठान (जैसे 21 या 41 दिन) पूर्ण हो रहा हो, तो हवन और ब्राह्मण भोजन का भी विधान बताया गया है। हनुमान जी के मंदिर में जाकर चढ़ावा अर्पण करना भी शुभ माना जाता है। पाठ के बाद कुछ समय उन पाठ से मिली शिक्षाओं पर चिंतन-मनन करना भी पाठ के आध्यात्मिक लाभ को गहरा बनाता है। पाठ के दिन सात्विक आहार लेना और मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन से परहेज करना उचित है।





