विस्तृत उत्तर
पुष्पांजलि का शाब्दिक अर्थ है — फूलों से भरी हुई अंजलि, जो देवता को अर्पित की जाती है। मंत्र पुष्पांजलि आरती के बाद बोला जाने वाला वह मंत्र-संग्रह है जिसके पाठ के बाद ही पूजा अनुष्ठान पूर्ण माना जाता है। यह ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के मंत्रों का समवाय है।
मंत्र पुष्पांजलि के चार श्लोक इस प्रकार हैं:
प्रथम: ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्।
ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः॥
अर्थ: देवताओं ने यज्ञ द्वारा यज्ञस्वरूप प्रजापति की आराधना की। यही प्राचीनतम धर्म-विधि थी। यज्ञाचरण के फलस्वरूप वे उस स्वर्गलोक को प्राप्त करते हैं जहाँ साध्य देव वास करते हैं।
द्वितीय: ॐ राजाधिराजाय प्रसह्यसाहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे।
स मे कामान् कामकामाय मह्यं कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु। कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः॥
अर्थ: राजाधिराज, प्रतापशाली, सर्वजयी वैश्रवण (कुबेर) को हम वंदन करते हैं। वे हम सब की कामनाएँ पूर्ण करें।
तृतीय: ॐ स्वस्ति साम्राज्यं भौज्यं स्वाराज्यं वैराज्यं पारमेष्ठ्यं राज्यं महाराज्यमाधिपत्यम्...
अर्थ: हमारा राज्य सर्वकल्याणकारी, लोभरहित और दीर्घायु हो।
चतुर्थ: ॐ तदप्येषः श्लोकोभिगीतो मरुतः परिवेष्टारो मरुतस्यावसन् गृहे। आविक्षितस्य कामप्रेर्विश्वेदेवाः सभासद इति॥
अंत में: ॥ मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि ॥





