विस्तृत उत्तर
सनातन परम्परा में प्रातःकाल स्नान करते समय मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व है। स्नान केवल शरीर की बाहरी शुद्धि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम माना गया है। वैदिक विधि में स्नान करते समय पवित्र नदियों का स्मरण किया जाता है।
स्नान का प्रमुख मंत्र:
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
हिंदी अर्थ: हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु और कावेरि — आप सभी पवित्र नदियाँ इस जल में अपनी उपस्थिति करें और इसे पावन बना दें।
इस मंत्र से जल में सातों प्रमुख नदियों की शक्ति का आह्वान किया जाता है। ऐसा करने से साधारण जल भी गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है — यही इस मंत्र का भाव है।
स्नान करते समय यह भी कहा जाता है:
ॐ आपो हि ष्ठा मयो भुवः। ता न ऊर्जे दधातन।
महे रणाय चक्षसे।
(यजुर्वेद)
अर्थ: हे जल! तुम ही सुखस्वरूप हो। हमें शक्ति और महान ज्ञान प्रदान करो।
केवल गंगाजल या नदी में स्नान उपलब्ध न हो तो घर में उपलब्ध जल में उपरोक्त पहले मंत्र से पवित्र नदियों का आह्वान करके स्नान करना शास्त्रसम्मत माना गया है।





