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यमलोक प्रश्नोत्तरी — 89 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित यमलोक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 89 प्रश्न

लोक

यममार्ग क्या है?

यममार्ग मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक ८६,००० योजन लंबी कठिन यात्रा का मार्ग है।

यममार्गयमलोकगरुड़ पुराण
लोक

यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा में क्यों ले जाते हैं?

यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में है, इसलिए यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा के यममार्ग से ले जाते हैं।

यमदूतदक्षिण दिशायममार्ग
लोक

यातना-देह नष्ट क्यों नहीं होती?

यातना-देह इसलिए नष्ट नहीं होती क्योंकि वह नरक के कष्ट भोगने के लिए बनी है; आग और शस्त्र उसे समाप्त नहीं करते।

यातना देहनरक यातनासूक्ष्म शरीर
लोक

यातना-देह क्या है?

यातना-देह वह सूक्ष्म शरीर है जिससे आत्मा नरक की यातनाएँ भोगती है, पर वह आग या शस्त्र से नष्ट नहीं होती।

यातना देहसूक्ष्म शरीरनरक
लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

यमदूतयमराजमृत्यु
लोक

श्रवण और श्रवणी कर्म-साक्षी क्यों माने गए हैं?

श्रवण-श्रवणी हर गुप्त कर्म को देखते-सुनते और यमराज के सामने प्रमाण देते हैं, इसलिए वे कर्म-साक्षी हैं।

श्रवण श्रवणीकर्म साक्षीयमलोक
लोक

श्रवण देवों की पूजा करने से मृत्यु के समय क्या लाभ होता है?

सत्य, दान-पुण्य और श्रवण देवों की पूजा करने वाले पर वे प्रसन्न होते हैं और मृत्यु के समय कष्ट नहीं होने देते।

श्रवण देव पूजामृत्यु समयदान पुण्य
लोक

यमराज के सामने श्रवण देव गवाह कैसे बनते हैं?

यदि आत्मा पाप नकारती है, तो श्रवण-श्रवणी देव यमराज के सामने प्रत्यक्ष गवाह बनकर उसके कर्मों का प्रमाण देते हैं।

श्रवण देवयमराजगवाह
लोक

बंद कमरे में किए गए कर्म भी यमलोक तक कैसे पहुँचते हैं?

श्रवण और श्रवणी देव बंद कमरे, अंधकार और एकांत में किए गए कर्म भी देख-सुनकर चित्रगुप्त तक पहुँचाते हैं।

गुप्त कर्मश्रवण देवश्रवणी
लोक

श्रवण और श्रवणी चित्रगुप्त की सहायता कैसे करते हैं?

श्रवण-श्रवणी हर कर्म को देखकर-सुनकर चित्रगुप्त की पंजिका तक पहुँचाते हैं और यमराज के सामने गवाह बनते हैं।

श्रवण श्रवणीचित्रगुप्तकर्म लेखा
लोक

श्रवण देव गुप्त कर्मों को कैसे जानते हैं?

श्रवण देव ब्रह्मा के कानों और नेत्रों के प्रतीक हैं, इसलिए वे गुप्त से गुप्त कर्म भी देख-सुन लेते हैं।

श्रवण देवगुप्त कर्मकर्म साक्षी
लोक

श्रवणी देवियाँ किसके कर्मों को देखती हैं?

श्रवणी देवियाँ स्त्रियों के सभी शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म अवलोकन करती हैं।

श्रवणी देवियाँस्त्री कर्मयमलोक
लोक

श्रवण देवों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा जी ने लोक-व्यवहार का सूक्ष्म ज्ञान रखने के लिए अपनी तपस्या से तेजस्वी और विशाल नेत्रों वाले श्रवण देव उत्पन्न किए।

श्रवण देवउत्पत्तिब्रह्मा
लोक

श्रवण और श्रवणी देव कौन हैं?

श्रवण और श्रवणी यमलोक के दिव्य गुप्तचर हैं, जो पुरुषों और स्त्रियों के शुभ-अशुभ कर्मों को देखते-सुनते हैं।

श्रवण देवश्रवणीयमलोक
लोक

यमलोक में चित्रगुप्त का न्याय अंतिम क्यों माना जाता है?

चित्रगुप्त का कर्म-लेखा अकाट्य साक्ष्य है, इसलिए यमलोक में उनका न्याय अंतिम माना जाता है।

चित्रगुप्त न्याययमलोकअंतिम साक्ष्य
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चित्रगुप्त के लेखे से कोई जीव बच क्यों नहीं सकता?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका और श्रवण-श्रवणी की गवाही के कारण कोई जीव अपने कर्मों से बच नहीं सकता।

चित्रगुप्त लेखाकर्म साक्ष्यअग्रसंधानी
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चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका क्या है?

अग्रसंधानी चित्रगुप्त की दिव्य कर्म-पुस्तिका है, जिसमें हर जीव के जन्म से मृत्यु तक के कर्म दर्ज रहते हैं।

अग्रसंधानीचित्रगुप्तकर्म पुस्तिका
लोक

चित्रगुप्त का नाम चित्रगुप्त क्यों पड़ा?

वे गुप्त रूप से सभी जीवों के कर्म-चित्र संचित करते हैं, इसलिए उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा।

चित्रगुप्त नामकर्म चित्रगुप्त लेखा
लोक

चित्रगुप्त को कायस्थ क्यों कहा जाता है?

चित्रगुप्त ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुए, इसलिए उन्हें कायस्थ कहा जाता है।

चित्रगुप्तकायस्थब्रह्मा काया
लोक

चित्रगुप्त कौन हैं?

चित्रगुप्त यमलोक के कर्म-अभिलेखक हैं, जो हर जीव के शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म लेखा रखते हैं।

चित्रगुप्तयमलोककर्म लेखा
लोक

यमराज की सभा को पारलौकिक न्यायालय क्यों कहा गया है?

यमराज की सभा में हर कर्म का अकाट्य लेखा प्रस्तुत होता है, इसलिए इसे पारलौकिक न्यायालय कहा गया है।

पारलौकिक न्यायालययमराज सभाचित्रगुप्त
लोक

यमराज की सभा में कर्मों का मूल्यांकन कैसे होता है?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका में दर्ज कर्मों के आधार पर यमराज की सभा में जीवात्मा का मूल्यांकन होता है।

कर्म मूल्यांकनयमराज सभाचित्रगुप्त
लोक

यमराज की सभा में गंधर्व और अप्सराएँ क्या करते हैं?

यमराज के सिंहासन पर आसीन होने पर गंधर्व उनका यशोगान करते हैं और अप्सराएँ नृत्य करती हैं।

गंधर्वअप्सरायमराज सभा
लोक

यमराज की सभा में पुण्यात्माओं का स्वागत कैसे होता है?

पुण्यात्मा के आने पर धर्मराज स्वयं आसन से उठकर स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक सभा में स्थान देते हैं।

पुण्यात्मायमराज सभाधर्मराज

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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