ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पितर प्रश्नोत्तरी — 86 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पितर विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 86 प्रश्न

लोक

पितरों का वास कुश के किस भाग में माना जाता है?

पितरों का वास कुश के मूल यानी जड़ भाग में माना जाता है।

पितरकुश मूलतर्पण
लोक

महाभारत के अनुसार पितर वंशजों के कर्मों को कैसे देखते हैं?

महाभारत पितरों को सजीव चेतना मानता है जो वंशजों के धर्म-अधर्म पर दृष्टि रखते हैं।

महाभारतपितरवंशज कर्म
लोक

श्राद्ध से पितर कौन-कौन से आशीर्वाद देते हैं?

श्राद्ध से पितर आयु, संतान, धन, विद्या, स्वर्ग, मोक्ष, सुख, राज्य, स्वास्थ्य और रक्षा का आशीर्वाद देते हैं।

श्राद्ध आशीर्वादपितरआयु
लोक

सरीसृप योनि में पितर को तर्पण किस रूप में मिलता है?

सरीसृप योनि में पितर को श्राद्ध-तर्पण वायु के रूप में प्राप्त होता है।

सरीसृप योनितर्पणवायु
लोक

पशु योनि में पूर्वज को श्राद्ध कैसे प्राप्त होता है?

पशु योनि में पूर्वज को श्राद्ध का तत्त्व तृण या चारे के रूप में प्राप्त होता है।

पशु योनिश्राद्धतृण
लोक

वृद्धिश्राद्ध क्या है?

वृद्धिश्राद्ध मांगलिक कार्यों के समय किया जाने वाला नान्दीमुख श्राद्ध है।

वृद्धिश्राद्धआभ्युदयिक श्राद्धनान्दीमुख
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न मनुष्य योनि में क्या बनता है?

मनुष्य योनि में श्राद्ध अन्न अन्न के रूप में प्राप्त होता है।

श्राद्ध अन्नमनुष्य योनिअन्न
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न प्रेत योनि में क्या बनता है?

प्रेत योनि में श्राद्ध अन्न रक्त बन जाता है।

श्राद्ध अन्नप्रेत योनिरक्त
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न दानव योनि में क्या बनता है?

दानव योनि में श्राद्ध अन्न मांस बन जाता है।

श्राद्ध अन्नदानव योनिमांस
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न पक्षी योनि में क्या बनता है?

पक्षी योनि में श्राद्ध अन्न फल बन जाता है।

श्राद्ध अन्नपक्षी योनिफल
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न नाग योनि में क्या बनता है?

नाग योनि में श्राद्ध अन्न वायु बन जाता है।

श्राद्ध अन्ननाग योनिवायु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न पशु योनि में क्या बनता है?

पशु योनि में श्राद्ध अन्न घास बन जाता है।

श्राद्ध अन्नपशु योनिघास
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न गंधर्व योनि में क्या बनता है?

गंधर्व योनि में श्राद्ध अन्न भोग-विलास की वस्तु बन जाता है।

श्राद्ध अन्नगंधर्व योनिभोग विलास
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध अन्न देव योनि में क्या बनता है?

देव योनि में श्राद्ध अन्न अमृत बन जाता है।

श्राद्ध अन्नदेव योनिअमृत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

श्राद्ध में नाम और गोत्र का क्या महत्व है?

नाम और गोत्र श्राद्ध अन्न को सही आत्मा तक पहुँचाने वाले वाहक हैं।

श्राद्धनामगोत्र
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

ब्राह्मणों को खिलाया गया अन्न पितरों तक कैसे पहुँचता है?

ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित नाम-गोत्र और मंत्र श्राद्ध अन्न को पितरों तक पहुँचाते हैं।

ब्राह्मण भोजनश्राद्ध अन्नपितर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सपिण्डीकरण के बाद प्रेतत्व कैसे समाप्त होता है?

सपिण्डीकरण में प्रेत पितरों में मिल जाता है, इसलिए उसका प्रेतत्व समाप्त हो जाता है।

सपिण्डीकरणप्रेतत्व समाप्तपितर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सपिण्डीकरण में प्रेत के पिण्ड का क्या किया जाता है?

सपिण्डीकरण में प्रेत का पिण्ड पिता, पितामह और प्रपितामह के पिण्डों के साथ मिलाया जाता है।

सपिण्डीकरणप्रेत पिण्डपूर्वज
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सपिण्डीकरण क्या होता है?

सपिण्डीकरण वह अनुष्ठान है जिसमें प्रेत का पिण्ड पूर्वजों के पिण्डों में मिलाया जाता है और प्रेतत्व समाप्त होता है।

सपिण्डीकरणप्रेतत्वपितर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्रेतत्व कब तक रहता है?

प्रेतत्व सपिण्डीकरण तक रहता है।

प्रेतत्वसपिण्डीकरणपितर
तर्पण

दक्षिणायन और उत्तरायण का पितरों से क्या संबंध है?

वैदिक साहित्य: दक्षिणायन = 'पितृयान' (पितरों का मार्ग); उत्तरायण = 'देवयान' (देवताओं का मार्ग)। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन = दक्षिणायन की समाप्ति → पितरों की विदाई → तर्पण अनिवार्य।

दक्षिणायन पितृयानउत्तरायण देवयानपितर
कालसर्प और पितृदोष

कालसर्प दोष पितृदोष से कैसे जुड़ा है?

नाग पाताल के निवासी हैं और पितर भी पितृलोक (पाताल-क्षेत्र) में रहते हैं — इसीलिए शिव-नाग पूजा एक साथ नाग-शाप और पितृ-शाप दोनों का शमन करती है।

कालसर्प पितृदोषनाग पातालपितर
काशी के शिवलिंग

शंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में घट दान का क्या विधान है?

महर्षि व्यास के अनुसार वैशाख पूर्णिमा पर जल-भरा घड़ा ब्राह्मण को दान = गया में 100 बार श्राद्ध का पुण्य। जल-भरा घट प्राणों की पूर्णता का प्रतीक — पितृ-तृप्ति और प्राण-रक्षा दोनों।

घट दानशंकुकर्णेश्वरवैशाख पूर्णिमा
काशी के तीर्थ

घंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराण

तीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।

घंटाकर्ण हृदफलश्रुतिमोक्ष

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।