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विस्तृत उत्तर
यदि पूर्वज अपने कर्मों के कारण पशु योनि में जन्म ले चुका है, तो श्राद्ध से प्राप्त तृप्ति उसे तृण, अर्थात घास या चारे, के रूप में प्राप्त होती है। वसु, रुद्र और आदित्य श्राद्ध देवता यजमान द्वारा दिए गए पिण्ड और तर्पण के तत्त्व को उस पितर की वर्तमान योनि के अनुसार रूपांतरित करते हैं। इसलिए पशु योनि में वही अन्न-तत्त्व उसके लिए उपयुक्त आहार, अर्थात घास या चारे, के रूप में पहुँचता है।
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