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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप' — इसका अर्थ?

अर्थ — भक्तों के लिये भगवान ने राजा (मनुष्य) का शरीर धारण किया। भक्त-प्रेम ही अवतार का मूल कारण।

बालकाण्डभगत हेतुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद परधामा' — किसका वर्णन?

परब्रह्म/निर्गुण ब्रह्म — अद्वितीय, इच्छारहित, रूपरहित, नामरहित, अजन्मा, सच्चिदानन्द, परम धाम। वही ब्रह्म रामजी के रूप में अवतार लेते हैं।

बालकाण्डसच्चिदानंदब्रह्म
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा' — अर्थ?

जो राम ने रचा वही होगा, तर्क से क्या? शिवजी ने सतीजी को कहा। शिक्षा — ईश्वर की योजना सर्वोपरि।

बालकाण्डराम रचि राखाभाग्य
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी' — किसने कहा और अर्थ?

तुलसीदासजी — मंगलाचरण। सम्पूर्ण जगत सीताराममय जानकर प्रणाम। सबसे प्रसिद्ध दोहा।

बालकाण्डसीय राममयतुलसीदास
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विनम्रता की शिक्षा — श्रीरामजी के चरित्र से?

सर्वशक्तिमान पर सबसे विनम्र — गुरु को प्रणाम, परशुराम से मृदु वाणी, माता की आज्ञा मानी। शिक्षा — सच्ची शक्ति विनम्रता में।

बालकाण्डविनम्रताराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कपट का परिणाम — प्रतापभानु कथा से शिक्षा?

कपटमुनि के जाल में फँसे, ब्राह्मण अपमान, शाप — राक्षस बने। शिक्षा — बुरी संगति = विनाश, अज्ञानतावश पाप भी फलता।

बालकाण्डकपटप्रतापभानु
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तपस्या और दृढ़ संकल्प की शिक्षा — पार्वती प्रसंग से?

'जन्म कोटि लगि रगर हमारी' — करोड़ जन्म हठ, सप्तर्षियों की परीक्षा में अडिग। शिक्षा — दृढ़ संकल्प से असम्भव भी सम्भव।

बालकाण्डतपस्यादृढ़ संकल्प
रामचरितमानस — बालकाण्ड

अभिमान का परिणाम — नारद प्रसंग से शिक्षा?

नारद — अभिमान किया, वानर-मुख मिला, अपमान, शाप दिया, पश्चाताप। शिक्षा — अभिमान सबसे बड़ा शत्रु, सब उपलब्धि ईश्वर कृपा।

बालकाण्डअभिमाननारद
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड में सत्संग की क्या शिक्षा दी गई?

सबसे बड़ा साधन — विवेक देता, मोह नष्ट करता, तीर्थराज समान। 'बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।'

बालकाण्डसत्संगशिक्षा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कलियुग की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

कालनेमि (कपट की खान) — 'कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।' कलियुग में राम नाम ही एकमात्र आधार।

बालकाण्डकलियुगकालनेमि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

संतों और असंतों का भेद किन उपमाओं से बताया गया बालकाण्ड में?

संत = हंस, कमल, चन्दन। असंत = उल्लू, जोंक, कौआ। 'संत असंत सदा इसि करनी।'

बालकाण्डसंत असंतहंस उल्लू
रामचरितमानस — बालकाण्ड

गुरु के चरणों की रज की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

नेत्र का अंजन (काजल) और अमृत-मूल-चूर्ण — 'गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन लाइ देखिअ मन मंजन' — ज्ञान-दृष्टि देने वाला।

बालकाण्डगुरु चरण रजअंजन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

तुलसीदासजी ने सत्संग की तुलना पारस पत्थर से क्यों की?

पारस लोहे को सोना बनाता — वैसे सत्संग अज्ञानी को ज्ञानी। 'बिनु सतसंग बिबेक न होई' — सत्संग बिना विवेक नहीं।

बालकाण्डसत्संगपारस
रामचरितमानस — बालकाण्ड

नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप क्यों दिया?

अभिमान तोड़ने को भगवान ने वानर-मुख दिया, स्वयंवर में अपमान, शिवगणों ने हँसी उड़ाई — क्रोध में शाप दिया। कारण — उपहास का अपमान।

बालकाण्डनारद शाप कारणअपमान
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कामदेव को शिवजी ने भस्म क्यों किया?

कामदेव ने पंचबाण छोड़कर शिवजी की अखण्ड समाधि भंग की — तीसरा नेत्र खोलकर भस्म किया। कारण — दिव्य तपस्या में विघ्न अपराध।

बालकाण्डकामदहन कारणशिव
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा जनक ने सीता विवाह में धनुष-शर्त क्यों रखी?

सीताजी बचपन में शिवजी का धनुष खेल-खेल में उठातीं — जनक ने सोचा योग्य वर वही जो तोड़ सके। भूमिजा सीता के लिये दिव्य वर चाहिये।

बालकाण्डजनक शर्तधनुष
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सतीजी ने सीता रूप धारण करके राम की परीक्षा क्यों ली?

संदेह — सर्वव्यापक ब्रह्म मनुष्य कैसे? शिवजी ने मना किया पर नहीं मानीं — यही पतन का कारण।

बालकाण्डसती कारणसंदेह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भगवान राम ने मनुष्य रूप में अवतार क्यों लिया — सबसे सरल उत्तर?

'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार' — ब्राह्मण, गौ, देवता, संतों की रक्षा। कारण अनन्त हैं।

बालकाण्डअवतार कारणसरल उत्तर
नियम निषेध

प्रदोष व्रत का पारण कब करें?

प्रदोष व्रत उसी दिन रात में नहीं खोला जाता, बल्कि अगले दिन सुबह (चतुर्दशी तिथि को) सूरज निकलने के बाद व्रत खोला (पारण किया) जाता है।

व्रत पारणचतुर्दशीसूर्योदय
नियम निषेध

प्रदोष व्रत के नियम?

इस व्रत में अन्न नहीं खाना चाहिए। गुस्सा करना मना है, ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और सिर्फ अच्छे कामों (सात्त्विक) के लिए ही पूजा करनी चाहिए।

नियमब्रह्मचर्यसात्त्विक
विशेष फल

शनि प्रदोष का महत्व?

शनिदेव शिव जी के शिष्य हैं, इसलिए शनिवार के प्रदोष व्रत से कुंडली का 'शनि दोष' खत्म होता है। इस दिन शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने चाहिए।

शनि प्रदोषशनि दोषपुत्र प्राप्ति
विशेष उपाय

पितृदोष शांति के उपाय?

पितृदोष दूर करने के लिए पानी में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर महामृत्युंजय मंत्र पढ़ें।

पितृदोषकाले तिलमहामृत्युंजय
विशेष फल

सातों दिन के प्रदोष व्रत का फल?

रविवार को आयु बढ़ती है, सोमवार को इच्छाएं पूरी होती हैं, मंगलवार को कर्ज से मुक्ति, बुधवार को ज्ञान, गुरुवार को शत्रुओं का नाश, शुक्रवार को विवाह, और शनिवार को शनि दोष दूर होता है।

वारानुसार फललाभसप्ताह
पूजा विधि

शिव जी की क्षमा प्रार्थना मंत्र?

पूजा के अंत में 'करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा...' मंत्र बोलकर शिव जी से अपने शरीर, वाणी या मन से हुई सभी गलतियों की माफी मांगनी चाहिए।

क्षमा प्रार्थनापूर्णाहुतिमहादेव शम्भो

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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