ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

ॐ नमः शिवाय प्रश्नोत्तरी — 17 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित ॐ नमः शिवाय विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 17 प्रश्न

मंत्र ज्ञान

ॐ नमः शिवाय के पांच अक्षरों का रहस्य क्या है?

न=पृथ्वी, मः=जल, शि=अग्नि, वा=वायु, य=आकाश — पांच अक्षर पंचमहाभूतों और शिव के पंचकृत्यों (सृष्टि-स्थिति-संहार-तिरोभाव-अनुग्रह) का प्रतीक। शिव पुराण में महामंत्र। शंकराचार्य का पंचाक्षर स्तोत्र इसी पर आधारित।

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नाम महिमा एवं भक्ति

शिव नाम जपने से क्या होता है

'ॐ नमः शिवाय' यजुर्वेद का पंचाक्षरी मंत्र है जिसके पाँच अक्षर पाँच तत्वों के प्रतीक हैं। शिव जप से तीनों तापों से मुक्ति मिलती है। शिव 'आशुतोष' हैं — शीघ्र प्रसन्न होने वाले — इसलिए उनका नाम जपने से शीघ्र कृपा मिलती है।

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स्तोत्र लाभ

शिव पंचाक्षर स्तोत्र पढ़ने के लाभ?

शंकराचार्य रचित। न-मः-शि-वा-य=5 तत्व शुद्धि। पाप नाश, मोक्ष, शांति, शिव कृपा। सोमवार/प्रदोष। 6 श्लोक, 5 मिनट — सबसे सरल शिव स्तोत्र।

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भक्ति एवं आध्यात्म

हर हर महादेव और ॐ नमः शिवाय में क्या अंतर

ॐ नमः शिवाय एक यजुर्वेद का पंचाक्षरी मंत्र है जिसे जप और साधना के लिए प्रयुक्त किया जाता है। हर हर महादेव एक जयघोष है जो शिव के दुखहर्ता और महान देव रूप की भक्तिमय घोषणा है।

हर हर महादेवॐ नमः शिवायशिव अभिवादन
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय प्रमुख मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' (सर्वसुलभ, शिव पुराण)। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (महामृत्युंजय, यजुर्वेद)। 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे...' (रुद्र गायत्री)। तांबे के लोटे से, उत्तर दिशा में मुख करके, छोटी धारा में जल अर्पित करें।

जलाभिषेकशिवलिंगमंत्र
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर अभिषेक करते समय ॐ नमः शिवाय कितनी बार बोलना चाहिए?

108 बार सर्वश्रेष्ठ (एक माला)। विशेष: 1008 बार (शिवरात्रि)। न्यूनतम: 11 बार। दैनिक: 21 बार पर्याप्त। मूल सिद्धांत: अभिषेक की धारा जब तक बहे, जप निरंतर करें — संख्या से अधिक भक्ति भाव महत्वपूर्ण। रुद्राक्ष माला से जप सर्वोत्तम।

ॐ नमः शिवायजप संख्या108
श्रीरुद्रम

'ॐ नमः शिवाय' मंत्र कहाँ से आया — किस वेद में है?

'ॐ नमः शिवाय' = नमकम् के अष्टम अनुवाक से। यजुर्वेद (कृष्ण यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता)। इस अनुवाक में शिव-उमा को नमन, शत्रुनाश और मोक्ष के लिए विशेष रूप से जपा जाता है।

ॐ नमः शिवायनमकम् अष्टम अनुवाकयजुर्वेद
मंत्र और उपासना

'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का क्या रहस्य है?

'ॐ नमः शिवाय' = सनातन धर्म का सबसे पवित्र पंचाक्षरी मंत्र। उत्पत्ति: कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता (श्री रुद्रम्)। 'ॐ' में ब्रह्मा-विष्णु-रुद्र की एकता। भाव: जीव और परब्रह्म में कोई भेद नहीं। यह समस्त क्लेश दग्ध कर परम ज्ञान देता है।

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पार्वती की तपस्या और परीक्षाएं

देवर्षि नारद ने पार्वती को क्या उपदेश दिया?

देवर्षि नारद ने: (1) पार्वती के विवाह का शिव से निश्चित होना बताया, (2) पंचाक्षर मंत्र (ॐ नमः शिवाय) का उपदेश दिया, (3) शिव की तपस्या की प्रेरणा दी। पार्वती ने राजमहल के सुख त्यागकर घोर तपस्या आरंभ की।

नारद उपदेशपंचाक्षर मंत्रशिव तपस्या
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा

'ॐ नमः शिवाय' और 'नमः शिवाय' में क्या अंतर है?

'नमः शिवाय' (पंचाक्षर) कोई भी जप कर सकता है — लेकिन 'ॐ नमः शिवाय' (षडाक्षर) जपने का अधिकार केवल गुरु-दीक्षा के बाद मिलता है क्योंकि गुरु कृपा से ही प्रणव की पूर्ण शक्ति जाग्रत होती है।

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षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा

षडाक्षर मंत्र क्या होता है?

जब 'नमः शिवाय' के आदि में प्रणव 'ॐ' जोड़ा जाता है तब 'ॐ नमः शिवाय' बनता है जिसे 'षडाक्षर मंत्र' (छह अक्षरों वाला) कहते हैं।

षडाक्षर मंत्रॐ नमः शिवायप्रणव
रुद्राभिषेक के मंत्र

पंचाक्षरी मंत्र क्या है?

पंचाक्षरी मंत्र है: 'ॐ नमः शिवाय' — यह सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र है जिसका अभिषेक के दौरान निरंतर जप करते रहना चाहिए।

पंचाक्षरी मंत्रॐ नमः शिवायजप
मंत्र और स्तोत्र

पिंगलेश्वर शिवलिंग की पूजा में किन मंत्रों का जाप करना चाहिए?

सुषुम्ना नाड़ी जाग्रत करने के लिए 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना चाहिए। इसके अलावा 'काशी विश्वनाथ ध्यान मंत्र' और 'लिंगाष्टकम' का पाठ जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट करता है।

ॐ नमः शिवायकाशी विश्वनाथ ध्यान मंत्रलिंगाष्टकम
मंत्र एवं साधना

घनकर्णेश्वर पर कौन-से मंत्र जपने चाहिए?

तीन साधनाएँ — (१) 'ॐ नमः शिवाय' पंचाक्षरी जप, (२) महामृत्युंजय मंत्र, (३) नाद-अनुसंधान — घंटा बजाकर क्षीण होती गूँज पर ध्यान केंद्रित करना। जप उपांशु या मानसिक हो।

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शिव पूजा

जलाभिषेक के दौरान कौन सा मंत्र जपें?

जलाभिषेक मंत्र: पंचाक्षरी — 'ॐ नमः शिवाय' (5 तत्त्वों के प्रतीक)। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — रोग-मृत्यु-भय निवारण। रुद्री (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत साधकों के लिए। गृहस्थ — 'ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः।' भावना सर्वोपरि।

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मंत्र ज्ञान

शिव पंचाक्षरी मंत्र क्या है?

शिव पंचाक्षरी मंत्र है — 'ॐ नमः शिवाय'। 'नमः शिवाय' के पाँच अक्षर (न, मः, शि, वा, य) पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के प्रतीक हैं। यजुर्वेद के श्री रुद्रम् में यह मंत्र मिलता है।

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शिव स्तोत्र

शिव षड्अक्षर स्तोत्र का जप कब और कैसे करना चाहिए?

'ॐ नमः शिवाय' (6 अक्षर)। रुद्राक्ष माला, 108 बार, मध्यमा+अंगूठा (तर्जनी नहीं)। मेरु लांघें नहीं। प्रातः/संध्या/कभी भी। शंकराचार्य पंचाक्षर स्तोत्र: न-म-शि-वा-य = 5 श्लोक = पंचमहाभूत।

षड्अक्षरॐ नमः शिवायस्तोत्र

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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