ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
सम्मानजनक

भगवान शिव सम्बन्धित प्रश्न(36)

भगवान शिव पर शास्त्रीय व्याख्या और उत्तर — कुल 36 सम्बन्धित प्रश्न उपलब्ध हैं।  शिव को शंकर, महादेव, भोलेनाथ के रूप में भी जाना जाता है।

शिव कब (19)शिव क्यों (210)शिव कैसे (208)शिव कौन (129)भगवान शिव (36)देव शिव (6)
भगवान शिव पर पूछे गए प्रश्न
  1. इलावृत वर्ष में भगवान शिव किसकी उपासना करते हैं और क्यों?
  2. भगवान शिव को महादेव क्यों कहा जाता है
  3. भगवान शिव ने त्रिपुर विनाश में अंतर्धान अस्त्र का प्रयोग क्यों किया?
  4. भगवान शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र क्यों दिया?
  5. भगवान शिव ने पाशुपतास्त्र से क्या किया?
लोक

इलावृत वर्ष में भगवान शिव किसकी उपासना करते हैं और क्यों?

इलावृत वर्ष में भगवान शिव चतुर्व्यूह के चतुर्थ अंश 'संकर्षण' की उपासना करते हैं। यह दर्शाता है कि शिव जी भी भगवान विष्णु के संहार-स्वरूप के उपासक हैं।

#इलावृत वर्ष#भगवान शिव#संकर्षण
शिव नाम महिमा

भगवान शिव को महादेव क्यों कहा जाता है

महादेव = 'महान देव' — सभी देवताओं में श्रेष्ठ। शिव संहार के अधिपति हैं जो सृष्टि का सबसे शक्तिशाली कार्य है। सभी से समदृष्टि रखते हैं — देव, दानव, साधु, भक्त — सब पर समान कृपा। इसीलिए वे 'देवों के देव महादेव' हैं।

#महादेव#शिव नाम#देवाधिदेव
दिव्यास्त्र

भगवान शिव ने त्रिपुर विनाश में अंतर्धान अस्त्र का प्रयोग क्यों किया?

शिव ने अंतर्धान अस्त्र से असुरों को निद्रा-चेतनाहीन किया ताकि वे रक्षा न कर सकें और पाशुपतास्त्र को अचूक अवसर मिले।

#शिव#त्रिपुर#अंतर्धान अस्त्र
दिव्यास्त्र

भगवान शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र क्यों दिया?

असुरों के बढ़ते अत्याचार से देवताओं की रक्षा के लिए विष्णु ने कैलाश पर शिव की कठोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें सुदर्शन चक्र वरदान में दिया।

#शिव#विष्णु#सुदर्शन चक्र
दिव्यास्त्र

भगवान शिव ने पाशुपतास्त्र से क्या किया?

भगवान शिव ने पाशुपतास्त्र से त्रिपुरासुर का संहार किया और युगांत में सृष्टि का प्रलय करके नए सृजन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

#शिव#पाशुपतास्त्र#त्रिपुरासुर
दिव्यास्त्र

भगवान शिव ने अर्जुन की परीक्षा कैसे ली?

भगवान शिव ने किरात (शिकारी) का वेश धारण करके अर्जुन से युद्ध किया। इस कठिन परीक्षा में अर्जुन के पराक्रम और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें पाशुपतास्त्र दिया।

#शिव#अर्जुन#किरात
लोक

भगवान शिव ने विष क्यों पिया?

शिव जी ने सृष्टि को हलाहल विष से बचाने के लिए विष पिया।

#शिव ने विष क्यों पिया#हलाहल#सृष्टि रक्षा
लोक

भगवान शिव के भूतगण कौन हैं?

भगवान शिव के भूतगण दैवीय गण हैं, जैसे नंदी और भृंगी, जो देव आज्ञा और ब्रह्मांडीय संतुलन से जुड़े हैं।

#भगवान शिव#भूतगण#नंदी
लोक

वितल लोक में हाटकेश्वर शिव कौन हैं?

हाटकेश्वर शिव वितल लोक में भगवान शिव का वह रूप है जो माता भवानी और अपने गणों के साथ निवास करता है।

#हाटकेश्वर शिव#वितल लोक#भगवान शिव
लोक

वितल लोक में भगवान शिव की उपस्थिति क्या बताती है?

वितल में शिव की उपस्थिति बताती है कि भौतिक और तामसिक लोक भी ईश्वर की सत्ता से बाहर नहीं हैं।

#शिव उपस्थिति#वितल लोक#ईश्वर सत्ता
लोक

भगवान शिव वितल लोक में क्यों रहते हैं?

भगवान शिव वितल लोक में सृष्टि-वृद्धि की ब्रह्मांडीय ऊर्जा के केंद्र के रूप में माता भवानी के साथ हाटकेश्वर रूप में रहते हैं।

#शिव वितल लोक#हाटकेश्वर#भवानी
लोक

हाटकेश्वर शिव कौन हैं?

हाटकेश्वर शिव वितल लोक में स्थित भगवान शिव का स्वरूप है, जो माता भवानी के साथ वहाँ निवास करते हैं।

#हाटकेश्वर शिव#वितल लोक#भगवान शिव
लोक

तलातल में भगवान शिव की रक्षा का क्या महत्व है?

शिव रक्षा के कारण मय दानव तलातल में अभय और ऐश्वर्य के साथ रहता है।

#तलातल#शिव रक्षा#मय दानव
लोक

भगवान शिव ने मय दानव को क्या वरदान दिया?

शिव ने मय दानव को तलातल का राज्य, अभय दान और अपनी रक्षा का वरदान दिया।

#शिव वरदान#मय दानव#तलातल
लोक

मय दानव को भगवान शिव ने क्यों बचाया?

शिव ने मय दानव की भक्ति, बुद्धिमत्ता और वास्तुकला से प्रसन्न होकर उन्हें बचाया।

#मय दानव#भगवान शिव#शिव कृपा
लोक

भगवान शिव को त्रिपुरारी क्यों कहा गया?

शिव ने तीनों त्रिपुर नगरों को एक बाण से भस्म किया, इसलिए वे त्रिपुरारी कहलाए।

#त्रिपुरारी#भगवान शिव#त्रिपुर दहन
लोक

भगवान शिव ने त्रिपुर को कैसे जलाया?

जब तीनों नगर एक रेखा में आए, तब शिव ने एक ही बाण से उन्हें भस्म कर दिया।

#भगवान शिव#त्रिपुर दहन#एक बाण
लोक

भगवान शिव का त्रिपुर दहन रथ कैसा था?

शिव का रथ देवतेज से बना; ब्रह्मा सारथी, सूर्य-चंद्र पहिए, सुमेरु धनुष, वासुकि प्रत्यंचा और विष्णु बाण बने।

#त्रिपुर दहन रथ#भगवान शिव#विश्वकर्मा
लोक

देवता भगवान शिव की शरण में क्यों गए?

त्रिपुरासुरों के अत्याचार से त्रस्त होकर देवता शिव की शरण में गए।

#देवता#भगवान शिव#त्रिपुरासुर
सृष्टि में शिव की भूमिका

भगवान शिव को 'महाकाल' क्यों कहते हैं?

शिव = 'महाकाल' — समय के उस आयाम के स्वामी जो सब कुछ नियंत्रित करता है और स्वयं में लीन कर लेता है। तमस बढ़ने पर प्रलय → अगले सृजन चक्र की शुरुआत। शून्य प्रलयाकाल में जीव ब्रह्म से एकाकार होता है।

#महाकाल#समय नियंत्रण#प्रलय
शिव तत्त्व परिचय

भगवान शिव कौन हैं?

भगवान शिव परब्रह्म, शाश्वत सत्य और शुद्ध चेतना के सर्वोच्च प्रतीक हैं। वे सृष्टि के आदि कारण हैं — जिनसे जगत उत्पन्न होता है, पोषित होता है और प्रलयकाल में विलीन हो जाता है। वे सगुण और निर्गुण दोनों हैं।

#भगवान शिव#परब्रह्म#शुद्ध चेतना
पार्वती की तपस्या और परीक्षाएं

भगवान शिव ने पार्वती की अंतिम परीक्षा कैसे ली?

शिव ने 'जटिल ब्रह्मचारी' वेश में आकर स्वयं की निंदा की। पार्वती क्रोधित हुईं और कहा: 'शिव की निंदा करने वाला पाप का भागी।' जाने लगीं तब शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और पार्वती का हाथ थाम लिया।

#शिव परीक्षा#जटिल ब्रह्मचारी#निंदा
नैवेद्य और दान

महामृत्युंजय अनुष्ठान में भगवान शिव को क्या नैवेद्य अर्पित करते हैं?

महामृत्युंजय अनुष्ठान में शिव को: पंचामृत, ऋतुफल, मिष्ठान, बिल्वपत्र (बेलपत्र), धतूरा, भांग और श्वेत पुष्प (मदार, आक) अर्पित करते हैं। शिव को अर्पित जल-प्रसाद स्वयं औषधि बन जाता है।

#नैवेद्य#बिल्वपत्र#धतूरा भांग
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांत

भगवान शिव को महाकाल क्यों कहते हैं?

भगवान शिव को महाकाल इसलिए कहते हैं क्योंकि वे 'काल' (समय एवं मृत्यु) के स्वामी हैं — काल पर उनका पूर्ण अधिकार है।

#महाकाल#शिव#काल स्वामी
नीलकंठ स्वरूप और कालकूट विषपान

भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है?

समुद्र मंथन में कालकूट विष पीने के बाद पार्वती ने शिव का कंठ दबाया जिससे विष कंठ में रुक गया और कंठ का रंग नीला हो गया — इसीलिए शिव को नीलकंठ कहते हैं।

#नीलकंठ#नीला कंठ#कालकूट विष
शिव शाबर मंत्र

शाबर मंत्रों की उत्पत्ति और भगवान शिव का क्या संबंध है?

भगवान शिव ने असुरों के उत्पात से तपस्यारत ऋषियों की रक्षा के लिए शाबर मंत्रों को प्रकट किया था।

#उत्पत्ति#महादेव#ऋषि रक्षा
भूतनाथ मंत्र साधना

भगवान शिव को 'भूतनाथ' क्यों कहते हैं?

शिव पंच महाभूतों (तत्वों) के स्वामी और प्रेत-गणों के अधिपति होने के कारण भूतनाथ कहलाते हैं।

#भूतनाथ#शिव#पंचभूत
श्री रुद्र-कवच-संहिता

'अघोर' कवच भगवान शिव के किस मुख का प्रतीक है?

अघोर मुख शिव के दक्षिण मुख का प्रतीक है, जो नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए जाना जाता है।

#अघोर मुख#संहार#दक्षिण दिशा
व्रत कथा

बिहुला ने देवलोक में भगवान शिव और देवताओं को कैसे प्रसन्न किया?

बिहुला ने देवलोक की सभा में अपने मरे हुए पति की अस्थियों (हड्डियों) को सामने रखकर इतना भावुक और करुण नृत्य किया कि भगवान शिव और सारे देवता रो पड़े और प्रसन्न हो गए।

#बिहुला का नृत्य#देव सभा#भगवान शिव
पौराणिक कथा

माता मनसा को भगवान शिव की पुत्री और वासुकि नाग की बहन क्यों कहा जाता है?

चूंकि वे भगवान शिव के तेज से सजीव हुई थीं, इसलिए शिव ने उन्हें अपनी 'मानस पुत्री' माना। साथ ही, नागराज वासुकि के परिवार से जुड़े होने के कारण वे उनकी बहन कहलाईं।

#शिव की मानस पुत्री#नागराज वासुकि#कैलाश
पौराणिक कथा

भगवान शिव के 'तांडव नृत्य' और देवताओं के वादन का प्रदोष काल से क्या संबंध है?

#तांडव नृत्य#प्रसन्न मुद्रा#शिव नृत्य
पौराणिक कथा

समुद्र मंथन में भगवान शिव के 'नीलकंठ' स्वरूप का प्रदोष व्रत से क्या संबंध है?

#समुद्र मंथन#नीलकंठ#हलाहल विष
पौराणिक कथाएँ

भगवान शिव ने अपने गणों को काशी क्यों भेजा था?

राजा दिवोदास के निष्कंटक शासन में दोष निकालने और उन्हें काशी से विस्थापित करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को काशी भेजा था, ताकि शिव पुनः अपनी प्रिय नगरी लौट सकें।

#राजा दिवोदास#शिवगणों का काशी आगमन#स्कंद पुराण
तुलनात्मक अध्ययन

भगवान शिव के गण 'महोदर' और श्री गणेश के 'महोदर' अवतार (मोहासुर वध) में क्या तात्त्विक समानता है?

दोनों स्वरूपों में 'विशाल उदर' ब्रह्मांडीय भ्रम, अज्ञान और लोभ को निगलने का प्रतीक है। जैसे गणेश जी के महोदर अवतार ने 'मोहासुर' का वध किया, वैसे ही शिव गण महोदर की ऊर्जा साधक के भीतर के मोह और लोभ को भस्म करती है।

#महोदर अवतार#मोहासुर वध#भगवान गणेश
शिव

शीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिए

विवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।

#विवाह#शिव मंत्र#पार्वती
स्वप्न दर्शन

स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन होने का क्या अर्थ है?

शिव स्वप्न: (1) महादेव कृपा/आशीर्वाद (2) संकट निवारण (नीलकण्ठ) (3) आध्यात्मिक प्रगति (4) ज्ञान जागरण (5) पुराना समाप्त+नया शुभ। शिवलिंग=सुरक्षा, नटराज=परिवर्तन, ध्यान मुद्रा=साधना बुलावा, क्रोधित=गलती सुधारें। करें: शिव मंदिर+जलाभिषेक+'ॐ नमः शिवाय' 108।

#शिव स्वप्न#स्वप्न दर्शन#शिवलिंग
अन्य विषय
सभी प्रश्न देखें

हिंदू देवी-देवताओं के विषय में सभी कब, क्यों, कैसे, कौन प्रश्न।

शिव टैग
शिव पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी शिव सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।