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विष्णु कैसे सम्बन्धित प्रश्न(124)

विष्णु कैसे पर शास्त्रीय व्याख्या और उत्तर — कुल 124 सम्बन्धित प्रश्न उपलब्ध हैं।  विष्णु को नारायण, हरि, जनार्दन के रूप में भी जाना जाता है।

विष्णु कब (12)विष्णु क्यों (128)विष्णु कैसे (124)विष्णु कौन (38)भगवान विष्णु (73)
विष्णु कैसे पर पूछे गए प्रश्न
  1. चार कुमार भगवान विष्णु से कैसे जुड़े हैं?
  2. विष्णु पुराण के अनुसार सूर्य से ध्रुवलोक तक की दूरी कैसे समझाई गई है?
  3. देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को कैसे जगाते हैं?
  4. विष्णु पुराण में लक्ष्मी-विष्णु की अद्वैतता कैसे समझाई गई है?
  5. शैव दर्शन के अनुसार विष्णु की उत्पत्ति कैसे हुई?
लोक

चार कुमार भगवान विष्णु से कैसे जुड़े हैं?

चार कुमार भगवान विष्णु के परम भक्त और नित्य मुक्त आत्माएँ हैं।

#चार कुमार#भगवान विष्णु#भक्ति
लोक

विष्णु पुराण के अनुसार सूर्य से ध्रुवलोक तक की दूरी कैसे समझाई गई है?

विष्णु पुराण में ग्रहों और सप्तर्षिमण्डल के क्रम से ध्रुवलोक को सूर्य से अड़तीस लाख योजन ऊपर बताया गया है।

#विष्णु पुराण#सूर्य#ध्रुवलोक
शुभ मुहूर्त

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को कैसे जगाते हैं?

जाग्रत मंत्र: 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते...' शंख, घंटा, मृदंग, नगाड़े बजाते हैं। सूप या थाली बजाना लोक-परंपरा। इस मंत्र उच्चारण से चातुर्मास का समापन और विवाह आदि मांगलिक कार्यों का आरंभ शास्त्रसम्मत होता है।

#भगवान जागरण मंत्र#उत्तिष्ठ गोविंद#शंख घंटा
लक्ष्मी-नारायण तत्त्व

विष्णु पुराण में लक्ष्मी-विष्णु की अद्वैतता कैसे समझाई गई है?

विष्णु पुराण: विष्णु = अर्थ → लक्ष्मी = वाणी; विष्णु = धर्म → लक्ष्मी = सत्क्रिया; विष्णु = सृष्टा → लक्ष्मी = सृष्टि; विष्णु = संतोष → लक्ष्मी = नित्य तृप्ति; विष्णु = वायु → लक्ष्मी = गति; विष्णु = समुद्र → लक्ष्मी = तरंग।

#लक्ष्मी विष्णु अद्वैत#शब्द अर्थ#धर्म सत्क्रिया
त्रिमूर्ति में स्थान

शैव दर्शन के अनुसार विष्णु की उत्पत्ति कैसे हुई?

शैव दर्शन: सदाशिव (निराकार परब्रह्म) → प्रकृति (शिवा/दुर्गा) प्रकट → शिवलोक की रचना → सदाशिव के वाम अंग से विष्णु → विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा। इस मत में शिव सर्वोपरि, विष्णु उनके पालनहार स्वरूप।

#शैव दर्शन#सदाशिव#विष्णु उत्पत्ति
त्रिमूर्ति में स्थान

वैष्णव दर्शन के अनुसार सृष्टि का आरंभ कैसे हुआ?

वैष्णव दर्शन: प्रलयकाल में नारायण क्षीरसागर में योगनिद्रा में → सृष्टि की इच्छा → नाभि कमल से ब्रह्मा उत्पन्न → ब्रह्मा के क्रोध-संतप्त ललाट से रुद्र (शिव) उत्पन्न। विष्णु ही मूल आधार जिससे ब्रह्मा और शिव की उत्पत्ति हुई।

#वैष्णव दर्शन#नारायण#नाभि कमल
देवता पूजा

नरसिंह भगवान पूजा कैसे करें

विष्णु चौथा अवतार, प्रह्लाद रक्षक। नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल 14)। सायंकाल पूजा। नरसिंह मंत्र और कवच (भागवत) अत्यंत शक्तिशाली। भय, शत्रु, तंत्र से सर्वोत्तम रक्षा।

#नरसिंह#पूजा#विधि
त्योहार पूजा

ओणम में विष्णु पूजा कैसे करें?

ओणम: केरल, चिंगम मास (10 दिन)। वामन-बलि कथा। विधि: पूक्कलम (पुष्प रंगोली) → त्रिक्काक्करप्पन (वामन) स्थापना-पूजन → ओणसद्या (26+ व्यंजन शाकाहारी भोज) → 'ॐ नमो भगवते वामनाय।' बलि राजा = दानवीरता। सर्वधर्म पर्व।

#ओणम#केरल#वामन-बलि
व्रत विधि

वामन द्वादशी पर पूजा कैसे करें?

वामन द्वादशी: भाद्रपद शुक्ल 12। वामन अवतार = बलि से तीन पग दान। विधि: वामन प्रतिमा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वामनाय' → कथा पाठ → छत्र (छाता) दान विशेष → ब्राह्मण बालक पूजन-भोज। दान = बलि की महिमा।

#वामन द्वादशी#भाद्रपद शुक्ल द्वादशी#वामन अवतार
व्रत विधि

प्रबोधिनी एकादशी पर विष्णु जागरण कैसे करें?

प्रबोधिनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विधि: शंख-घण्टा से जगाएँ → 'उत्तिष्ठ गोविन्द...' मंत्र → षोडशोपचार → तुलसी विवाह → रात्रि जागरण → गन्ना-आँवला भोग। चातुर्मास समाप्ति, विवाह मुहूर्त आरम्भ।

#प्रबोधिनी एकादशी#देवउठनी#कार्तिक शुक्ल एकादशी
व्रत विधि

हरिशयनी एकादशी पर विष्णु पूजा कैसे करें?

हरिशयनी एकादशी: आषाढ़ शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा आरम्भ, चातुर्मास प्रारम्भ (4 माह शुभ कार्य वर्जित)। विधि: विष्णु शयन सज्जा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 1008 जप → चातुर्मास संकल्प → दान। प्रबोधिनी तक विष्णु सोते हैं।

#हरिशयनी एकादशी#देवशयनी#चातुर्मास
व्रत विधि

विजया एकादशी व्रत कैसे रखें?

विजया एकादशी: फाल्गुन कृष्ण एकादशी। श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व रखी थी। विजय प्रदायिनी। विधि: दशमी शाम भोजन → एकादशी निर्जला/फलाहार → विष्णु पूजा-जप → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। कोर्ट/परीक्षा/प्रतिस्पर्धा हेतु विशेष।

#विजया एकादशी#फाल्गुन कृष्ण एकादशी#विजय प्राप्ति
एकादशी

कामिका एकादशी व्रत कैसे रखें

कामिका एकादशी: श्रावण कृष्ण एकादशी। दशमी एक-समय भोजन → एकादशी निराहार/फलाहार → विष्णु पूजा (तुलसी विशेष) → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। तुलसी = सहस्र गोदान पुण्य। शिव+विष्णु कृपा।

#कामिका एकादशी#श्रावण#विष्णु
एकादशी

पुत्रदा एकादशी व्रत कैसे रखें

पुत्रदा एकादशी: श्रावण/पौष शुक्ल एकादशी = सन्तान प्राप्ति हेतु। निराहार/फलाहार → विष्णु/बालकृष्ण पूजा → सन्तान गोपाल मंत्र → कथा → जागरण → द्वादशी पारण। कथा: सन्तानहीन राजा महीजित को व्रत से पुत्र प्राप्ति। दम्पति साथ करें।

#पुत्रदा एकादशी#श्रावण#सन्तान
पर्व

अक्षय तृतीया पर पूजा और दान कैसे करें

अक्षय तृतीया: वैशाख शुक्ल तृतीया। पूजा: विष्णु-लक्ष्मी पूजा, गंगा स्नान, सत्यनारायण कथा। दान: जल (सर्वोत्तम), अन्न, वस्त्र, छाता, स्वर्ण खरीद शुभ। सम्पूर्ण दिन स्वयंसिद्ध शुभ — मुहूर्त अनावश्यक। परशुराम जन्म, सुदामा-कृष्ण कथा। अक्षय = कभी क्षीण न हो।

#अक्षय तृतीया#दान#स्वर्ण
व्रत विधि

एकादशी व्रत कैसे रखें विधि और नियम?

एकादशी व्रत: दशमी शाम एक भोजन (चावल वर्जित) → एकादशी: निर्जला/फलाहार + विष्णु पूजा + 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' + रात्रि जागरण → द्वादशी: सूर्योदय बाद पारण। अन्न-प्याज-लहसुन वर्जित। प्रति मास 2, वर्ष 24 एकादशी।

#एकादशी#व्रत#विष्णु
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा में कलश स्थापना कैसे करें

कलश स्थापना: चौकी पर अक्षत → ताँबे का कलश → शुद्ध जल + गंगाजल + तुलसी + दूर्वा + सुपारी + सिक्का → 'कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से पूजन → 5 आम पत्ते मुख पर → नारियल (रोली-चन्दन-मौली सहित) ऊपर → कलश के गले में मौली। कलश = ब्रह्माण्ड का प्रतीक।

#सत्यनारायण#कलश स्थापना#विष्णु
वृक्ष पूजा

पीपल की परिक्रमा कब और कैसे करें

पीपल परिक्रमा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल करें, विशेषकर शनिवार को। 7 परिक्रमा सामान्य विधान है, 108 सर्वोत्तम। दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें। स्टील/पीतल के लोटे से जल में काली तिल-चावल मिलाकर चढ़ाएँ। गीता (10.26): 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्'। शनि दोष, पितृ दोष निवारण होता है।

#पीपल#परिक्रमा#शनि दोष
पूजा विधि

तुलसी विवाह कब और कैसे करें?

तुलसी विवाह: कार्तिक शुक्ल द्वादशी (देवउठनी एकादशी भी)। विधि: तुलसी-शालिग्राम स्नान-श्रृंगार → मण्डप → कन्यादान → सात फेरे → 'ॐ तुलस्यै नमः' जाप → आरती-भोग → दान। विवाह मुहूर्तों की शुरुआत। कन्यादान तुल्य पुण्य।

#तुलसी विवाह#शालिग्राम#कार्तिक मास
पूजा विधि

तुलसी पूजा प्रतिदिन कैसे करें?

प्रतिदिन तुलसी पूजा: स्नान के बाद → जल अर्पण (सूर्योदय-सूर्यास्त बीच) → शाम को दीपक → परिक्रमा → 'ॐ तुलस्यै नमः' जप → प्रणाम। रविवार को जल-दीपक वर्जित। सूर्यास्त बाद स्पर्श न करें। तुलसी बिना विष्णु पूजा अधूरी।

#तुलसी पूजा#प्रतिदिन#तुलसी जल
ध्यान

ध्यान के दौरान भगवान का ध्यान कैसे करें?

भगवान ध्यान: भागवत (2.2.8-14): पाद → उरु → नाभि → हृदय → मुख → नेत्र — क्रमिक ध्यान। शिव पुराण: श्वेत रूप, जटाजूट, त्रिनेत्र का ध्यान। नारद भक्ति सूत्र: रूप, गुण, लीला, धाम, नाम — पाँचों पर ध्यान। मंत्र-सहित मानस ध्यान सर्वश्रेष्ठ।

#ईश्वर ध्यान#सगुण उपासना#मानस पूजा
विष्णु उपासना

शालिग्राम शिला की पूजा कैसे करें?

शालिग्राम की पूजा में प्रातः स्नान के बाद गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें, तुलसी दल अर्पित करें (यह अनिवार्य है), चंदन, पुष्प, धूप-दीप और खीर का भोग लगाएं। 'ॐ नमो नारायणाय' का जाप करें। शालिग्राम को ऊँचे स्थान पर रखें और नित्य पूजा का संकल्प रखें।

#शालिग्राम पूजा#शालिग्राम विधि#शालिग्राम अभिषेक
विद्या साधना

हयग्रीव स्तोत्र का पाठ विद्या प्राप्ति के लिए कैसे करें?

विष्णु अश्वमुखी अवतार = ज्ञान देवता। वेदांत देशिक स्तोत्र 33 श्लोक। प्रातः, पीला/सफेद। 'ॐ ह्रीं क्लीं सौः हयग्रीवाय नमः'। बसंत पंचमी/परीक्षा काल। बुद्धि, स्मरण, वाक् सिद्धि।

#हयग्रीव#स्तोत्र#विद्या
विष्णु उपासना

नारायण कवच क्या है और इसे कैसे पढ़ें?

नारायण कवच भागवत पुराण (स्कन्ध 6, अध्याय 8) में वर्णित विष्णु जी का रक्षा-मंत्र है, जो सर्वप्रथम इन्द्र को दिया गया था। स्नान करके, शुद्ध आसन पर बैठकर, 'ॐ नमो नारायणाय' से न्यास सहित पाठ करें। गुरुवार, एकादशी या संकट काल में इसका पाठ विशेष फलदायी है।

#नारायण कवच#भागवत पुराण#सुरक्षा कवच
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