लोकब्रह्मपुरी को कौन घेरे हुए है?ब्रह्मपुरी को आठ दिक्पालों की नगरियाँ घेरे हैं — इन्द्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण, वायु, कुबेर और ईश (शिव)।#ब्रह्मपुरी#अष्टदिक्पाल#इन्द्र
दिव्यास्त्रसंवर्त अस्त्र के अधिपति देवता कौन हैं?संवर्त अस्त्र के अधिपति देवता यमराज हैं जिन्हें 'काल' भी कहते हैं। यह संहार और अंतिम न्याय का अस्त्र है जिससे कोई बच नहीं सकता।#संवर्त अस्त्र#यमराज#अधिपति देवता
दिव्यास्त्रसावित्री ने यमराज से कौन से तीन वरदान माँगे?सावित्री ने तीन वरदान माँगे — ससुर की नेत्र-ज्योति, खोया हुआ राज्य, और सत्यवान से सौ पुत्र। तीसरे वरदान से यमराज अपने वचन में फँस गए।#सावित्री#तीन वरदान#यमराज
दिव्यास्त्रयमराज के पास कालदण्ड के अलावा और कौन से अस्त्र हैं?यमराज के पास कालदण्ड के अलावा एक गदा और एक पाश भी है। पाश से वे आत्मा को खींचते हैं लेकिन कालदण्ड उनकी सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है।#यमराज#कालदण्ड#गदा
दिव्यास्त्रयमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।#यमराज#धर्मराज#सूर्य देव
तिथि शास्त्रद्वितीया तिथि का अधिष्ठाता देवता कौन है?द्वितीया तिथि का मुख्य अधिष्ठाता देवता यमराज हैं, जिनका इस तिथि पर विशेष आधिपत्य रहता है। पद्म पुराण के अनुसार यमुना ने यमराज को इसी तिथि पर भोजन कराया था। श्राद्ध के मूल अधिष्ठाता देवता वसु, रुद्र और आदित्य हैं, जो क्रमशः पिता, पितामह और प्रपितामह पीढ़ियों के प्रतिनिधि हैं। साथ ही विश्वेदेव पुरूरवा-आर्द्रव या क्रतु-दक्ष भी आहूत होते हैं।#यमराज#द्वितीया अधिष्ठाता#वसु रुद्र आदित्य
लोकयमदूत कौन हैं?यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।#यमदूत#यमराज#मृत्यु
लोकयमराज की सभा में कौन-कौन उपस्थित रहते हैं?यमराज की सभा में मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व, देवता, अप्सराएँ और अग्निष्वात्त आदि पितृगण उपस्थित रहते हैं।#यमराज सभा#पितृगण#गंधर्व
लोकयमराज के 14 नाम कौन-कौन से हैं?यमराज के 14 नाम हैं: यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुम्बर, दध्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त।#यमराज 14 नाम#धर्मराज#वैवस्वत
लोकयमराज कौन हैं?यमराज मृत्यु के देवता, धर्मराज, पितरों के अधिपति और ब्रह्मांडीय न्याय के सर्वोच्च अधिकारी हैं।#यमराज#धर्मराज#मृत्यु देवता
मरणोपरांत आत्मा यात्राचित्रगुप्त कौन हैं?चित्रगुप्त यमराज के अभिलेखकर्ता हैं, जो जीवों के कर्मों का लेखा रखते हैं।#चित्रगुप्त#यमराज#कर्म लेखा
जीवन एवं मृत्युपापी को कौन दंड देता है?पापी को दंड देते हैं — यमराज (न्यायकर्ता), चित्रगुप्त (लेखाकार), श्रवण-श्रवणियाँ (गुप्तचर) और यमदूत (दंड-देने वाले)। दार्शनिक स्तर पर — कर्म स्वयं ही दंड लेकर आता है।#पापी#दंड#यमराज
जीवन एवं मृत्युधर्मराज के आदेश को कौन लागू करता है?धर्मराज के आदेश को यमदूत लागू करते हैं — यममार्ग पर ले जाना, नरक पहुँचाना, यातना देना। नरक में विशेष यमदूत होते हैं। द्वारपाल 'धर्मध्वज' प्रवेश की व्यवस्था करते हैं। सभी यमराज की आज्ञा के अधीन हैं।#धर्मराज#यमदूत#आदेश
जीवन एवं मृत्युनरक का निर्णय कौन करता है?नरक का निर्णय यमराज करते हैं — चित्रगुप्त के निष्पक्ष कर्म-लेखे के आधार पर। पाप की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार नरक और दंड का समय तय होता है। यह निर्णय अटल और अपरिवर्तनीय है।#नरक#निर्णय#यमराज
जीवन एवं मृत्युनरक में कौन भेजता है?नरक में भेजने का निर्णय यमराज (धर्मराज) लेते हैं — चित्रगुप्त का कर्म-लेखा देखकर। यमदूत उनकी आज्ञा से जीव को नरक तक पहुँचाते हैं। बिना यमराज की आज्ञा के कोई नरक नहीं जाता।#नरक#यमराज#यमदूत
जीवन एवं मृत्युधर्मराज कौन हैं?धर्मराज यमराज का दूसरा नाम है — धर्म और सत्य के राजा। वे भगवान सूर्य के पुत्र हैं, वाहन भैंसा और हाथ में दंड-पाश हैं। वे समस्त प्राणियों के कर्मों का न्याय करते हैं और स्वर्ग-नरक का निर्णय देते हैं।#धर्मराज#यमराज#न्याय देवता
यमलोक एवं न्यायचित्रगुप्त पापियों को कौन से वचन सुनाते हैं?गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय के अनुसार चित्रगुप्त पापियों को सुनाते हैं — 'तुम्हारे पाप ही तुम्हारे दुःख के कारण हैं, हम नहीं।' साथ ही यमदूत पूछते हैं कि दान, तीर्थ, देव-पूजन और हरिनाम जप क्यों नहीं किया।#चित्रगुप्त#यमलोक#पापी
महाभारतविदुर कौन थे महाभारत में?विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री, धृतराष्ट्र और पांडु के भाई तथा यमराज के अवतार माने जाते हैं। दासी-पुत्र होने के बावजूद वे अपने नैतिक बल, ज्ञान और सत्यनिष्ठा से महाभारत के सबसे आदरणीय पात्र बने। उन्होंने सदैव धर्म और पांडवों का साथ दिया।#विदुर#धर्मराज#हस्तिनापुर
कर्म सिद्धांतपाप और पुण्य का लेखा कौन रखता है?चित्रगुप्त प्रत्येक जीव के कर्मों का लेखा रखते हैं (पद्म/गरुड़ पुराण)। यमराज (धर्मराज) कर्मफल का न्याय करते हैं। वेदांत दृष्टिकोण: ईश्वर स्वयं कर्मफल का प्रबंधन करते हैं। कर्म सूक्ष्म शरीर में संस्कार रूप में संचित होते हैं।#चित्रगुप्त#यमराज#कर्म लेखा