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प्रश्न प्रकार

यमराज क्यों सम्बन्धित प्रश्न(34)

यमराज क्यों पर शास्त्रीय व्याख्या और उत्तर — कुल 34 सम्बन्धित प्रश्न उपलब्ध हैं।  यमराज को यम, धर्मराज के रूप में भी जाना जाता है।

यमराज क्यों (34)यमराज कैसे (22)यमराज कौन (20)
यमराज क्यों पर पूछे गए प्रश्न
  1. रावण और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ?
  2. यमराज सत्यवान के प्राण लौटाने को क्यों विवश हुए?
  3. यमराज मार्कण्डेय के प्राण लेने क्यों आए थे?
  4. यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?
  5. ब्रह्मा जी ने यमराज को कालदण्ड न चलाने के लिए क्यों कहा?
दिव्यास्त्र

रावण और यमराज के बीच युद्ध क्यों हुआ?

अपने बल के अहंकार में रावण ने यमलोक पर आक्रमण कर दिया। इसी कारण यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ।

#रावण#यमराज#युद्ध
दिव्यास्त्र

यमराज सत्यवान के प्राण लौटाने को क्यों विवश हुए?

यमराज ने बिना सोचे तीसरा वरदान दे दिया — सत्यवान से सौ पुत्र। पतिव्रता स्त्री बिना पति के पुत्र नहीं पा सकती, इसलिए अपने वचन से बंधकर सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े।

#यमराज#सत्यवान#प्राण
दिव्यास्त्र

यमराज मार्कण्डेय के प्राण लेने क्यों आए थे?

मार्कण्डेय की निश्चित आयु 16 वर्ष पूरी होने पर यमराज अपने दूतों के साथ उनके प्राण हरने आए। यह मृत्यु के विधान का पालन था।

#यमराज#मार्कण्डेय#प्राण
दिव्यास्त्र

यमराज कौन हैं और उन्हें धर्मराज क्यों कहते हैं?

यमराज सूर्य देव के पुत्र और दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। वे केवल प्राण नहीं हरते बल्कि जीवों के कर्मों का न्याय भी करते हैं, इसीलिए उन्हें धर्मराज कहते हैं।

#यमराज#धर्मराज#सूर्य देव
दिव्यास्त्र

ब्रह्मा जी ने यमराज को कालदण्ड न चलाने के लिए क्यों कहा?

ब्रह्मा जी ने दो कारणों से रोका — रावण को मनुष्य से मृत्यु का वरदान था, और कालदण्ड की शक्ति से समस्त सृष्टि का विनाश हो सकता था।

#ब्रह्मा#यमराज#कालदण्ड
दिव्यास्त्र

यमराज ने कालदण्ड का प्रयोग रावण पर क्यों नहीं किया?

ब्रह्मा जी ने हस्तक्षेप किया क्योंकि रावण को वरदान था कि वह मनुष्य के हाथों मरेगा, देवता के नहीं। साथ ही कालदण्ड से समस्त सृष्टि नष्ट हो सकती थी।

#कालदण्ड#यमराज#रावण
यम

चोरी न करना योग में क्यों जरूरी है?

विपत्ति में भी मन, वचन और कर्म से दूसरों का द्रव्य न लेना अस्तेय है।

#अस्तेय#चोरी न करना#मन वचन कर्म
श्रीमद्भागवत

यमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?

यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।

#यमराज#वैष्णव#भागवत कथा
लोक

दशमी श्राद्ध में श्वान बलि क्यों?

यमराज के श्वानों की तुष्टि के लिए।

#श्वान बलि#श्याम शबल#यमराज
लोक

दशमी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#यमराज#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में कौए को अन्न क्यों देते हैं?

कौआ पितरों का संदेशवाहक माना गया है।

#काक बलि#कौआ#यमराज
लोक

काकबलि क्यों देते हैं?

कौवे को यमराज का प्रतीक मानकर काकबलि दी जाती है।

#काकबलि#कौवा#यमराज
लोक

काकबलि क्यों देते हैं?

कौआ पितृलोक से जुड़ा प्रतीक है, इसलिए काकबलि दी जाती है।

#काकबलि#कौआ#यमराज
लोक

भरणी नक्षत्र श्राद्ध में खास क्यों है?

भरणी नक्षत्र यमराज से जुड़ा है, इसलिए पितृ श्राद्ध में विशेष है।

#भरणी नक्षत्र#श्राद्ध#यमराज
पुराण माहात्म्य

द्वितीया श्राद्ध से शिव क्यों प्रसन्न होते हैं?

द्वितीया श्राद्ध से शिव इसलिए प्रसन्न होते हैं क्योंकि शिव महाकाल हैं यानी मृत्यु और समय के परम देवता। यमराज शिव के अधीन हैं, और द्वितीया तिथि पर यमराज का विशेष आधिपत्य रहता है। जब कर्ता भक्ति से पितरों का श्राद्ध करता है, तो यमराज प्रसन्न होते हैं और शिव भी प्रसन्न होते हैं। भक्तिपूर्वक पितृ-सेवा शिव की सेवा के समान है।

#शिव प्रसन्नता#द्वितीया श्राद्ध#महाकाल
लोक

पितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके क्यों किया जाता है?

पितरों और यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से माना गया है, इसलिए पितृ तर्पण दक्षिणाभिमुख होता है।

#दक्षिण दिशा#पितृ तर्पण#यमराज
लोक

यक्ष ने पांडवों की परीक्षा क्यों ली?

यक्ष ने पांडवों की धर्म-बुद्धि की परीक्षा ली; युधिष्ठिर के सही उत्तरों से संतुष्ट होकर उसने भाइयों को जीवित किया।

#यक्ष परीक्षा#पांडव#युधिष्ठिर
लोक

यमराज की सभा में कोई कर्म छिप क्यों नहीं सकता?

चित्रगुप्त की अग्रसंधानी पुस्तिका और श्रवण-श्रवणी की गुप्तचर व्यवस्था के कारण यमराज की सभा में कोई कर्म छिप नहीं सकता।

#कर्म लेखा#चित्रगुप्त#श्रवण देव
लोक

यमराज की सभा को पारलौकिक न्यायालय क्यों कहा गया है?

यमराज की सभा में हर कर्म का अकाट्य लेखा प्रस्तुत होता है, इसलिए इसे पारलौकिक न्यायालय कहा गया है।

#पारलौकिक न्यायालय#यमराज सभा#चित्रगुप्त
लोक

यमराज की सभा में पितृगण क्यों उपस्थित रहते हैं?

पितृगण यमराज की सभा में अपने वंशजों के कर्मों का अवलोकन करने के लिए उपस्थित रहते हैं।

#पितृगण#अग्निष्वात्त#यमराज सभा
लोक

यमराज का निर्णय निष्पक्ष क्यों माना गया है?

यमराज का निर्णय चित्रगुप्त के अकाट्य कर्म-लेखे पर आधारित होता है, इसलिए वह पूर्णतः निष्पक्ष माना गया है।

#यमराज निर्णय#निष्पक्ष न्याय#चित्रगुप्त
लोक

यमराज वैष्णव भक्तों पर अधिकार क्यों नहीं रखते?

वैष्णव भक्त अपने कर्म भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं, इसलिए उन पर यमराज का अधिकार नहीं होता और विष्णुदूत उन्हें वैकुण्ठ ले जाते हैं।

#यमराज#वैष्णव भक्त#विष्णु भक्त
लोक

यमराज पापी और पुण्यात्मा के साथ अलग व्यवहार क्यों करते हैं?

यमराज का व्यवहार जीवात्मा के कर्मों के अनुसार होता है; पापी को भय और पुण्यात्मा को सम्मान प्राप्त होता है।

#यमराज#पापी आत्मा#पुण्यात्मा
लोक

पुण्यात्माओं को यमराज का सौम्य रूप क्यों दिखाई देता है?

सत्य, धर्म, दान और अहिंसा का पालन करने वाली पुण्यात्मा को यमराज शांत, सौम्य और देव रूप में दिखाई देते हैं।

#यमराज सौम्य रूप#पुण्यात्मा#धर्म
लोक

यमराज का भयानक स्वरूप पापियों को क्यों दिखाई देता है?

पापी आत्मा अपने ही पाप कर्मों की छाया यमराज के भयानक स्वरूप में देखती है, इसलिए उसे वे डरावने दिखाई देते हैं।

#यमराज स्वरूप#पापी आत्मा#गरुड़ पुराण
लोक

यमराज को धर्मराज क्यों कहा जाता है?

यमराज कर्मों का निष्पक्ष न्याय करते हैं और पाप-पुण्य का संतुलन स्थापित करते हैं, इसलिए उन्हें धर्मराज कहा जाता है।

#धर्मराज#यमराज#न्याय
लोक

चार कुमारों को महाजन क्यों माना गया है?

चार कुमार धर्म के वास्तविक ज्ञाता बारह महाजनों में गिने गए हैं।

#चार कुमार#महाजन#धर्म
यमलोक एवं न्याय

यमराज धनी और निर्धन से भेद नहीं करते — ऐसा क्यों?

गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में चित्रगुप्त कहते हैं — यमराज मूर्ख-पंडित, दरिद्र-धनवान, सबल-निर्बल — सभी से समान व्यवहार करते हैं क्योंकि यमलोक में केवल कर्म देखे जाते हैं, धन या पद नहीं।

#यमराज#निष्पक्षता#धनी निर्धन
यमलोक एवं न्याय

सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि और आकाश मनुष्य के कर्म क्यों जानते हैं?

गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय के अनुसार सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि, आकाश, भूमि, जल, हृदय और दोनों संध्याएँ — ये सभी मनुष्य के कर्मों के नित्य साक्षी हैं। साथ ही यमराज के गुप्तचर श्रवण भी सभी कर्म जानते हैं।

#सूर्य#चंद्र#कर्म साक्षी
यमलोक एवं न्याय

यमराज का भैंसे पर बैठना क्यों बताया गया है?

गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में यमराज भैंसे पर बैठे वर्णित हैं। भैंसा मृत्यु की अटल, निरपेक्ष और स्थूल शक्ति का प्रतीक है। काले रंग का भैंसा दक्षिण दिशा, यमलोक और अंधकार का प्रतीक है।

#यमराज#भैंसा#वाहन
गृह आचार एवं पूजा विधि

दक्षिण दिशा में मुँह करके भोजन क्यों नहीं करना चाहिए?

दक्षिण यमराज की दिशा है — यहाँ मुँह करके भोजन करने से आयु, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। पूर्व और उत्तर दिशा में भोजन करना सबसे शुभ है।

#भोजन दिशा#वास्तु#दक्षिण दिशा
व्रत एवं त्योहार

भाई दूज क्यों मनाते हैं?

भाई दूज इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन के लिए गए थे। यमुना के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के हाथों तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं होगा।

#भाई दूज#यम द्वितीया#यमराज
त्योहार पूजा

भैया दूज पर यमराज की पूजा क्यों करते हैं?

भैया दूज यमराज: यम-यमुना कथा (बहन ने भोजन कराया→यम ने वर='अकाल मृत्यु नहीं'), यम=मृत्यु देवता (भाई रक्षा), यमुना स्नान=यम भय मुक्ति। बहन→तिलक→भोजन→दक्षिणा। रक्षाबंधन पूरक।

#भैया दूज#यमराज#यमुना
त्योहार पूजा

धनतेरस पर यम के लिए दीपक क्यों जलाते हैं?

धनतेरस यम दीपक: कथा — रानी ने दीपक-आभूषण से यमराज को रोका, पति प्राण बचे। विधि: दक्षिण दिशा, जमीन पर, तिल तेल, चार बत्ती, 'मृत्युना पाशहस्तेन...' मंत्र। उद्देश्य: अकाल मृत्यु रक्षा, दीर्घायु। रात भर जलता रहे।

#धनतेरस#यम दीपक#यमराज
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