विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक के निर्णय की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन है। यह निर्णय दो स्तरों पर होता है।
पहला स्तर — चित्रगुप्त का कर्म-लेखा। चित्रगुप्त जीव के जीवनभर के समस्त कर्मों का विस्तृत विवरण यमराज के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते — देवता हो या साधारण जन, सबके कर्म समान रूप से तौले जाते हैं।
दूसरा स्तर — यमराज का निर्णय। चित्रगुप्त के लेखे के आधार पर यमराज निर्णय लेते हैं कि जीव को किस नरक में, कितने समय के लिए भेजना है। यह निर्णय पाप की प्रकृति, उसकी गंभीरता और उसकी बार-बार पुनरावृत्ति — इन सबको देखकर लिया जाता है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'यमराज उस जीव के पाप-पुण्य की तुलना करते हैं और उसके अनुसार निर्णय सुनाते हैं।' यह निर्णय किसी भी प्रकार की सिफारिश, धन या रिश्ते से प्रभावित नहीं होता।
यदि जीव अपने पापों से इनकार करे, तो चित्रगुप्त उसके कर्मों का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं और यमराज उसे देखकर अंतिम निर्णय सुनाते हैं।





