ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

श्रीलिङ्गमहापुराण क्या है?(153)

श्रीलिङ्गमहापुराण का अर्थश्रीलिङ्गमहापुराण क्या है?श्रीलिङ्गमहापुराण का महत्व
सरल उत्तर

मैनाक और क्रौञ्च मेना से उत्पन्न बताए गए हैं।

स्रोत प्रश्न: मैनाक और क्रौञ्च कौन थे? →
पितृ वंश

मैनाक और क्रौञ्च कौन थे?

मैनाक और क्रौञ्च मेना से उत्पन्न बताए गए हैं।

#मैनाक#क्रौञ्च#मेना
अग्नि वंश

49 अग्नियाँ क्या हैं?

पुत्रों और पौत्रों को मिलाकर, आदिम सप्तक को छोड़कर कुल उनचास अग्नियाँ कही गई हैं।

#49 अग्नियाँ#अग्नि#यज्ञ
अग्नि वंश

स्वाहा के पुत्र कौन-कौन हैं?

स्वाहा के पुत्र पवमान, पावक और शुचि बताए गए हैं।

#स्वाहा#अग्नि#पवमान
अग्नि वंश

अग्नि के तीन पुत्र कौन हैं?

अग्नि के तीन पुत्र पवमान, पावक और शुचि बताए गए हैं। ये तीनों स्वाहा के पुत्र हैं।

#अग्नि#स्वाहा#पवमान
ऋषि संतति

ऊर्जा और वसिष्ठ की संतान कौन थीं?

ऊर्जा और वसिष्ठ से रज, सुहोत्र, बाहु, सवन, अनघ, सुतपा और शुक्र नामक सात पुत्र उत्पन्न हुए।

#ऊर्जा#वसिष्ठ#रज
ऋषि संतति

अनसूया और अत्रि की संतान कौन थीं?

अनसूया और अत्रि से श्रुति तथा सत्यनेत्र, मुनिर्भव्य, मूर्तिराप, शनैश्चर और सोम उत्पन्न हुए।

#अनसूया#अत्रि#श्रुति
ऋषि संतति

स्मृति और अंगिरा की संतान कौन थीं?

स्मृति और अंगिरा से सिनीवाली, कुहू, राका, अनुमति और अग्नि उत्पन्न हुए।

#स्मृति#अंगिरा#सिनीवाली
ऋषि संतति

सन्नति और क्रतु के बालखिल्य पुत्र कौन थे?

सन्नति और क्रतु के साठ हजार पुत्र हुए, जो बालखिल्य नाम से प्रसिद्ध बताए गए हैं।

#सन्नति#क्रतु#बालखिल्य
ऋषि संतति

प्रीति और पुलस्त्य की संतान कौन थीं?

प्रीति और पुलस्त्य से दत्तोर्ण, वेदबाहु और दृषद्वती उत्पन्न हुए।

#प्रीति#पुलस्त्य#दत्तोर्ण
ऋषि संतति

क्षमा और पुलह की संतान कौन थीं?

क्षमा और पुलह से कर्दम, वरीयांस, सहिष्णु और पीवरी उत्पन्न हुए।

#क्षमा#पुलह#कर्दम
ऋषि संतति

सम्भूति और मरीचि की संतान कौन थीं?

सम्भूति और मरीचि से पूर्णमास, मारीच, तुष्टि, दृष्टि, कृषि और अपचिति उत्पन्न हुए।

#सम्भूति#मरीचि#पूर्णमास
ऋषि संतति

ख्याति और भृगु की संतान कौन थीं?

ख्याति और भृगु से श्री यानी लक्ष्मी, धाता और विधाता उत्पन्न हुए।

#ख्याति#भृगु#श्री
दक्ष वंश

धर्म की पत्नियाँ कौन थीं?

श्रद्धा से लेकर कीर्ति तक तेरह कन्याएँ प्रजापति धर्म की पत्नियाँ बनीं।

#धर्म#धर्म की पत्नियाँ#श्रद्धा
मनु और शतरूपा

आकूति और प्रसूति कौन थीं?

आकूति और प्रसूति मनु-शतरूपा की कन्याएँ थीं; आकूति ज्येष्ठ और प्रसूति छोटी कही गई हैं।

#आकूति#प्रसूति#मनु पुत्री
मनु और शतरूपा

प्रियव्रत और उत्तानपाद कौन थे?

प्रियव्रत और उत्तानपाद स्वायम्भुव मनु और शतरूपा के पुत्र थे; प्रियव्रत ज्येष्ठ और उत्तानपाद कनिष्ठ बताए गए हैं।

#प्रियव्रत#उत्तानपाद#स्वायम्भुव मनु
मनु और शतरूपा

स्वायम्भुव मनु और शतरूपा कौन थे?

स्वायम्भुव मनु और रानी शतरूपा का सृजन ब्रह्मा ने किया; शतरूपा अयोनिजा और पुण्यशालिनी कही गई हैं।

#स्वायम्भुव मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
ऋषि और मानस पुत्र

ऋभु और सनत्कुमार कौन थे?

ऋभु और सनत्कुमार ब्रह्मा के अग्रजन्मा दिव्य पुत्र थे, जिन्हें नैष्ठिक ब्रह्मचारी और ब्रह्मवादी कहा गया है।

#ऋभु#सनत्कुमार#नैष्ठिक ब्रह्मचारी
ऋषि और मानस पुत्र

मरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ कौन थे?

ये ब्रह्मा की योगविद्या से उत्पन्न नौ ब्रह्मवादी ऋषि और मानस पुत्र थे।

#मरीचि#भृगु#अंगिरा
ऋषि और मानस पुत्र

ब्रह्मा के नौ मानस पुत्र कौन थे?

ब्रह्मा के नौ मानस पुत्र मरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ थे।

#ब्रह्मा के मानस पुत्र#मरीचि#भृगु
ऋषि और मानस पुत्र

सनक, सनन्दन और सनातन कौन थे?

सनक, सनन्दन और सनातन ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न श्रेष्ठ मुनि थे; सनत्कुमार का भी उल्लेख साथ आता है।

#सनक#सनन्दन#सनातन
सर्ग

कौमार सर्ग क्या है?

कौमार सर्ग नौवाँ सर्ग है, जिसे प्राकृत और वैकृत दोनों कहा गया है।

#कौमार सर्ग#सनक#सनन्दन
सर्ग

अनुग्रह सर्ग क्या है?

अनुग्रह सर्ग सत्त्व और तमप्रधान सर्ग बताया गया है और नौ सर्गों में आठवाँ है।

#अनुग्रह सर्ग#सत्त्व#तम
सर्ग

अर्वाक्स्रोत सृष्टि क्या है?

अर्वाक्स्रोत सृष्टि मनुष्य आदि की सृष्टि है और नौ सर्गों में सातवाँ सर्ग कही गई है।

#अर्वाक्स्रोत#मनुष्य#मानव सृष्टि
सर्ग

ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि क्या है?

ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि सात्त्विक रूप कही गई है और देवताओं की सृष्टि से जुड़ी है।

#ऊर्ध्वस्रोत#देवसर्ग#देवता
सर्ग

तिर्यक्स्रोत सृष्टि क्या है?

तिर्यक्स्रोत सृष्टि पशु आदि तिर्यक् योनिवाले जीवों की सृष्टि है।

#तिर्यक्स्रोत#पशु#पक्षी
सर्ग

मुख्य सर्ग क्या है?

मुख्य सर्ग वृक्षादि सृष्टि है, जिसमें वृक्ष, गुल्म, लता, वीरुध् और तृणरूप सर्ग बताए गए हैं।

#मुख्य सर्ग#वृक्ष#गुल्म
अविद्या

तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र का अर्थ क्या है?

तम का अर्थ अज्ञान, महामोह का अर्थ भोगेच्छा, तामिस्र का अर्थ क्रोध और अन्धतामिस्र का अर्थ अभिनिवेश बताया गया है।

#तम#मोह#महामोह
अविद्या

पंचपर्वा अविद्या क्या है?

पंचपर्वा अविद्या वे पांच अविद्याएँ हैं जो ब्रह्मा से पहले उत्पन्न हुईं: तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र।

#पंचपर्वा अविद्या#अविद्या#तम
प्रलय

महाप्रलय में क्या होता है?

महाप्रलय में सम्पूर्ण सृष्टि का लय हो जाता है और शिव की आज्ञा से प्रलय का भी प्रलय होता है।

#महाप्रलय#सृष्टि लय#शिव आज्ञा
विशेष काल गणना

ध्रुव वर्ष क्या होता है?

मनुष्यों के नौ हजार नब्बे वर्ष मिलाकर एक ध्रुव वर्ष बताया गया है।

#ध्रुव वर्ष#ध्रौव्य वर्ष#मनुष्य वर्ष
सूक्ष्म काल गणना

मुहूर्त क्या होता है?

तीस कलाओं को मिलाकर एक मुहूर्त कहा गया है।

#मुहूर्त#कला#काष्ठा
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का दिन क्या होता है?

ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।

#ब्रह्मा#ब्रह्मा का दिन#कल्प
सृष्टि तत्त्व

प्राकृत सर्ग क्या है?

प्राकृत सर्ग पुरुषाधिष्ठित, ईश्वरकृत, अबुद्धिपूर्वक उत्पन्न और कल्याणकारी प्राथमिक सर्ग बताया गया है।

#प्राकृत सर्ग#प्राथमिक सर्ग#पुरुषाधिष्ठित
सृष्टि तत्त्व

तामस अहंकार क्या है?

तामस अहंकार तमोगुण की अधिकता वाला अहंकार है, जिससे भूतसर्ग का वर्णन किया गया है।

#तामस अहंकार#तमोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्व

राजस अहंकार क्या है?

राजस अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न रजोगुण की अधिकता वाला अहंकार है।

#राजस अहंकार#रजोगुण#महत्तत्त्व
सृष्टि तत्त्व

सात्त्विक अहंकार क्या है?

सात्त्विक अहंकार महत्तत्त्व से उत्पन्न संकल्प-अध्यवसायवृत्तिरूप अहंकार है।

#सात्त्विक अहंकार#महत्तत्त्व#संकल्प
प्रकृति तत्त्व

अजा प्रकृति क्या है?

अजा प्रकृति विश्व को धारण करनेवाली शैवी शक्ति है, जो बहुविध प्रजाओं की उत्पत्ति करती है।

#अजा#प्रकृति#शैवी शक्ति
शिव तत्त्व

ब्रह्मा विष्णु शिव की विश्व प्राज्ञ तैजस अवस्थाएँ क्या हैं?

बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाएँ कही गई हैं।

#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्व

व्यक्त और अव्यक्त रूप क्या हैं?

लिंग को व्यक्त और अलिंग को अव्यक्त रूप कहा गया है; दोनों रूप शिवात्मक बताए गए हैं।

#व्यक्त#अव्यक्त#लिंग
प्रकृति तत्त्व

शिव और प्रकृति का संबंध क्या है?

निर्गुण शिव प्रकृति के मूल कारण हैं और शिव की दृष्टि से प्रकृति शैवी कही गई है।

#शिव#प्रकृति#शैवी शक्ति
शिव तत्त्व

निर्गुण शिव क्या है?

निर्गुण शिव वह अलिंग तत्त्व है जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध और गुणों से रहित है।

#निर्गुण शिव#अलिंग#परमात्मा
शिव तत्त्व

लिंग तत्त्व क्या है?

लिंग तत्त्व प्रधान प्रकृति है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से संयुक्त बताई गई है।

#लिंग तत्त्व#प्रकृति#प्रधान
शिव तत्त्व

अलिंग क्या है?

अलिंग निर्गुण ब्रह्म शिव है, जो शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध आदि से रहित बताया गया है।

#अलिंग#निर्गुण शिव#निर्गुण ब्रह्म
पाठ फल

अनुक्रमणिका पाठ का फल क्या है?

अनुक्रमणिका का कीर्तन करने वाला मनुष्य सभी पापों से छूटकर ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है।

#अनुक्रमणिका#पाठ फल#पाप मुक्ति
गुण और देव रूप

महेश्वर का निर्गुण स्वरूप क्या है?

गुणों से रहित अवस्था को महेश्वरस्वरूप बताया गया है।

#महेश्वर#निर्गुण#शिव
गुण और देव रूप

हिरण्यगर्भ क्या है?

हिरण्यगर्भ वह स्वरूप है जो रजोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।

#हिरण्यगर्भ#रजोगुण#ब्रह्मा
गुण और देव रूप

कालरुद्र कौन हैं?

कालरुद्र वह रूप है जो तमोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।

#कालरुद्र#तमोगुण#रुद्र
ॐकार और शब्दब्रह्म

ॐकार क्या है?

ॐकार को शब्दब्रह्म, अकार-उकार-मकारात्मक और चारों वेदों से सम्बद्ध बताया गया है।

#ॐकार#ओंकार#शब्दब्रह्म
शिव तत्त्व

लिंग माहात्म्य का सरल अर्थ क्या है?

लिङ्गमाहात्म्य का भाव लिङ्ग से जुड़ी पवित्र महिमा और कथा-विषय से है।

#लिंग माहात्म्य#लिङ्गमाहात्म्य#लिंग
पुराण कथा

सूतजी कौन थे?

सूतजी पुराणों के ज्ञाता, परम बुद्धिमान और व्यासजी से पुराणसंहिता प्राप्त करने वाले पौराणिक थे।

#सूतजी#व्यासजी#पुराण
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

श्रीलिङ्गमहापुराण टैग
श्रीलिङ्गमहापुराण पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी श्रीलिङ्गमहापुराण सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।