ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

श्रीलिङ्गमहापुराण क्या है?(153)

श्रीलिङ्गमहापुराण का अर्थश्रीलिङ्गमहापुराण क्या है?श्रीलिङ्गमहापुराण का महत्व
सरल उत्तर

पुरुष में वितृष्णा नाम से प्रसिद्ध भाव को गुणवैतृष्ण्य कहा गया है।

स्रोत प्रश्न: गुणवैतृष्ण्य क्या है? →
शैव पद और वैराग्य

गुणवैतृष्ण्य क्या है?

पुरुष में वितृष्णा नाम से प्रसिद्ध भाव को गुणवैतृष्ण्य कहा गया है।

#गुणवैतृष्ण्य#वितृष्णा#वैराग्य
औपसर्गिक ऐश्वर्य

ब्राह्म ऐश्वर्य क्या है?

बिना कारण जगत् की सृष्टि, अनुग्रह, प्रलय, अधिकार, लोकवृत्त प्रवर्तन और संसार का कर्तृत्व ब्राह्म ऐश्वर्य है।

#ब्राह्म ऐश्वर्य#सृष्टि#अनुग्रह
औपसर्गिक ऐश्वर्य

प्रजापति संबंधी ऐश्वर्य क्या हैं?

छेदन, ताडन, बन्ध, संसार परिवर्तन, सर्वभूतप्रसाद, मृत्यु और काल पर जय प्रजापति संबंधी आहंकारिक ऐश्वर्य हैं।

#प्रजापति ऐश्वर्य#आहंकारिक ऐश्वर्य#छेदन
औपसर्गिक ऐश्वर्य

मानस गुण क्या हैं?

इच्छित वस्तु की प्राप्ति, जहाँ चाहें जाना, गुप्त पदार्थ देखना, इच्छानुसार रूप धारण करना और जगत देखना मानस गुण हैं।

#मानस गुण#इच्छित वस्तु#रूप धारण
औपसर्गिक ऐश्वर्य

आकाश संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

छाया न होना, आकाशगमन, दूरश्रवण, सभी शब्दों का ज्ञान, तन्मात्रा ज्ञान और सभी प्राणियों को देखना आकाश संबंधी ऐश्वर्य है।

#आकाश ऐश्वर्य#ऐन्द्र ऐश्वर्य#आकाश गमन
औपसर्गिक ऐश्वर्य

वायु संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

मन की गति पाना, दूसरों के अन्तर्मन में निवास, हल्का-भारी होना, वायु पकड़ना और आकाश तत्त्व से देह धारण करना वायु ऐश्वर्य है।

#वायु ऐश्वर्य#मन की गति#हल्का भारी
औपसर्गिक ऐश्वर्य

तैजस ऐश्वर्य क्या है?

देह से अग्नि बनाना, अग्नि से निर्भय रहना, जल में अग्नि रखना, हाथ से आग पकड़ना और भस्म वस्तु को पूर्ववत करना तैजस ऐश्वर्य में आता है।

#तैजस ऐश्वर्य#अग्नि#आग पकड़ना
औपसर्गिक ऐश्वर्य

जल संबंधी ऐश्वर्य क्या है?

जल में निवास, जल से बाहर आने की शक्ति, समुद्र पान, जल दर्शन, रसयुक्त भक्षण और जलपिण्ड धारण जैसे गुण जल संबंधी ऐश्वर्य हैं।

#जल ऐश्वर्य#आप्य ऐश्वर्य#समुद्र पान
औपसर्गिक ऐश्वर्य

पार्थिव ऐश्वर्य क्या है?

शरीर की स्थूलता, ह्रस्वता, बालकपन, वृद्धता, यौवन, अनेक रूप, विशेष देहधारण और सुगन्ध ये पार्थिव गुण बताए गए हैं।

#पार्थिव ऐश्वर्य#शरीर परिवर्तन#स्थूलता
औपसर्गिक ऐश्वर्य

योग में आने वाले चौंसठ गुण क्या हैं?

आठ गुण वृद्धि क्रम से बढ़कर चौंसठ गुण कहे गए हैं; ये पार्थिव, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, अहंकार और ब्राह्म ऐश्वर्य से जुड़े हैं।

#चौंसठ गुण#औपसर्गिक गुण#पार्थिव
उपसर्ग और सिद्धियाँ

वार्ता सिद्धि क्या है?

बुद्धि से दिव्य गन्धों का गन्धतन्मात्रा रूप में यथार्थ अनुभव करना वार्ता सिद्धि है।

#वार्ता सिद्धि#दिव्य गन्ध#गन्धतन्मात्रा
उपसर्ग और सिद्धियाँ

आस्वाद सिद्धि क्या है?

दिव्य रसों का सहज और यथार्थ ज्ञान होना आस्वाद सिद्धि है।

#आस्वाद सिद्धि#दिव्य रस#रस ज्ञान
उपसर्ग और सिद्धियाँ

दर्शना सिद्धि क्या है?

बिना प्रयास दिव्य रूपों का नेत्रेन्द्रिय से दिखाई पड़ना दर्शना सिद्धि है।

#दर्शना सिद्धि#दिव्य रूप#नेत्रेन्द्रिय
उपसर्ग और सिद्धियाँ

वेदना सिद्धि क्या है?

स्पर्श की अनुभूति को वेदना सिद्धि कहा गया है।

#वेदना सिद्धि#स्पर्श#अनुभूति
उपसर्ग और सिद्धियाँ

श्रवणा सिद्धि क्या है?

बिना प्रयास सभी शब्द, स्वर और गुह्य ध्वनि सुनकर उनका यथार्थ ज्ञान होना श्रवणा सिद्धि है।

#श्रवणा सिद्धि#शब्द ज्ञान#स्वर
उपसर्ग और सिद्धियाँ

प्रतिभा सिद्धि क्या है?

भूत, भविष्य, सूक्ष्म, अदृष्ट, दूरस्थ और समीप पदार्थों का ज्ञान देने वाली वृत्ति प्रतिभा सिद्धि कही गई है।

#प्रतिभा सिद्धि#भूत भविष्य ज्ञान#सूक्ष्म ज्ञान
योग बाधाएँ

दौर्मनस्य क्या है?

तमोगुण और रजोगुण से मिले मन में उत्पन्न दूषित भाव दौर्मनस्य है; इसे परम वैराग्य से नियंत्रित करना चाहिए।

#दौर्मनस्य#दुर्मन#तमोगुण
योग बाधाएँ

भ्रान्तिदर्शन क्या होता है?

समाधि के समीप पहुँचकर अज्ञान के कारण अनात्म पदार्थों में आत्मज्ञान रूप विपरीत ज्ञान रखना भ्रान्तिदर्शन है।

#भ्रान्तिदर्शन#विपरीत ज्ञान#अनात्म
प्राणायाम

12, 24 और 36 मात्रा वाले प्राणायाम क्या हैं?

12 मात्रा मन्द, 24 मात्रा मध्यम और 36 मात्रा उत्तम प्राणायाम कहा गया है।

#मन्द प्राणायाम#मध्यम प्राणायाम#उत्तम प्राणायाम
प्राणायाम

प्राणायाम का सही अर्थ क्या है?

प्राण और अपान वायु का निरोध प्राणायाम कहलाता है।

#प्राणायाम#प्राण#अपान
शौच और नियम

संतोषी व्यक्ति किसे कहा गया है?

जो व्रती न्यायपूर्वक अर्जित धन से संतुष्ट रहता है और गए धन की चिंता नहीं करता, वह संतोषी है।

#संतोष#न्यायपूर्वक धन#व्रती पुरुष
शौच और नियम

योग में शुद्धि का सही अर्थ क्या है?

योग में शुद्धि बाह्य और आंतरिक दोनों है, पर आंतरिक शुचिता श्रेष्ठ बताई गई है।

#शुद्धि#शौच#आंतरिक शुचिता
यम

ब्रह्मचर्य का अर्थ क्या है?

यतियों, ब्रह्मचारियों और पत्नीरहित संन्यासियों के लिये मन, वचन और कर्म से मैथुन में प्रवृत्ति न रखना ब्रह्मचर्य है।

#ब्रह्मचर्य#यति#ब्रह्मचारी
यम

योग में यम का मतलब क्या है?

तप में प्रवृत्ति और विषय-भोगों से निवृत्ति को यम कहा गया है। अहिंसा इसका पहला हेतु है।

#यम#तप#विषय निवृत्ति
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

#अष्टांग योग#यम#नियम
पाशुपत योग

पाशुपत योग क्या है?

पाशुपत योग वह योग है जिसे पशुपति रुद्र ने सबको परम ऐश्वर्य दिलाने के लिए प्रवर्तित किया।

#पाशुपत योग#पशुपति रुद्र#परम ऐश्वर्य
पाशुपत योग

पशु किसे कहा गया है?

देवता से लेकर पिशाच तक सभी प्राणी पशु कहे गए हैं।

#पशु#देवता#पिशाच
शिष्य परम्परा

भस्म-विभूषित योगी कौन थे?

योगाचार्यों के महात्मा शिष्य भस्म-विभूषित शरीर वाले बताए गए हैं।

#भस्म-विभूषित#योगी#योगाचार्य शिष्य
शिष्य परम्परा

पराशर, गर्ग, भार्गव और अंगिरा कौन थे?

पराशर, गर्ग, भार्गव और अंगिरा योगाचार्यों के शिष्यों की विस्तृत नामावली में बताए गए हैं।

#पराशर#गर्ग#भार्गव
शिष्य परम्परा

कपिल, आसुरि, पंचशिख और वाल्कल कौन थे?

कपिल, आसुरि, पंचशिख और महायोगी वाल्कल योगाचार्यों के शिष्यों की सूची में बताए गए हैं।

#कपिल#आसुरि#पंचशिख
शिष्य परम्परा

श्वेत, श्वेतशिखण्डी, श्वेताश्व और श्वेतलोहित कौन थे?

ये योगाचार्यों के शिष्यों की नामावली के प्रारम्भ में बताए गए धर्मात्मा और महान् ओजस्वी शिष्य थे।

#श्वेत#श्वेतशिखण्डी#श्वेताश्व
योगावतार

शूली, मुण्डीश्वर और सोमशर्मा कौन हैं?

शूली, दण्डधारी मुण्डीश्वर और सोमशर्मा अट्ठाईस योगाचार्यावतारों के अंतिम भाग में बताए गए नाम हैं।

#शूली#मुण्डीश्वर#सोमशर्मा
योगावतार

शिखण्डभृत, जटामाली और अट्टहास कौन हैं?

शिखण्डभृत्, जटामाली और अट्टहास योगाचार्यावतारों की सूची में बताए गए नाम हैं।

#शिखण्डभृत्#जटामाली#अट्टहास
योगावतार

गोकर्ण और गुहावासी कौन हैं?

गोकर्ण और गुहावासी अट्ठाईस योगाचार्यावतारों की सूची में बताए गए नाम हैं।

#गोकर्ण#गुहावासी#योगाचार्य
योगावतार

दधिवाहन कौन हैं?

दधिवाहन अट्ठाईस योगाचार्यावतारों में महातेजस्वी भगवान् रूप में बताए गए हैं।

#दधिवाहन#योगाचार्य#महातेजस्वी
योगावतार

नकुलीश कौन हैं?

नकुलीश अट्ठाईस योगाचार्यावतारों में अंतिम रूप से बताए गए जगद्गुरु हैं।

#नकुलीश#जगद्गुरु#योगाचार्य
योगावतार

अट्ठाईस योगाचार्य अवतार कौन-कौन हैं?

अट्ठाईस योगाचार्य अवतार श्वेत से नकुलीश तक बताए गए हैं।

#अट्ठाईस योगाचार्य#योगावतार#श्वेत
योगावतार

वैवस्वत मन्वन्तर में महेश्वर के योगावतार कौन हैं?

वैवस्वत मन्वन्तर में महेश्वर के योगावतार श्वेत से लेकर नकुलीश तक अट्ठाईस योगाचार्यावतार बताए गए हैं।

#वैवस्वत मन्वन्तर#महेश्वर#योगावतार
कल्प और मन्वन्तर

श्वेतवाराह कल्प क्या है?

श्वेतवाराह कल्प वर्तमान कल्प बताया गया है, जिसमें सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के योगावतारों का वर्णन आता है।

#श्वेतवाराह कल्प#वर्तमान कल्प#वैवस्वत मन्वन्तर
मनु

वैवस्वत मनु कौन हैं?

वैवस्वत मनु वर्तमान सुरेश्वर, ऋकाररूप, कृष्णवर्ण और क्रम में सातवें बताए गए हैं।

#वैवस्वत मनु#सातवें मनु#ऋकाररूप
मनु

स्वायम्भुव मनु कौन हैं?

स्वायम्भुव मनु आदिमनु बताए गए हैं और चौदह मनुओं की सूची में पहले आते हैं।

#स्वायम्भुव मनु#आदिमनु#मनु
मनु

चौदह मनु कौन-कौन हैं?

चौदह मनु स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष, वैवस्वत, सावर्णि, धर्म, सावर्णिक, पिशंग, अपिशंगाभ, शबल और वर्णक बताए गए हैं।

#चौदह मनु#स्वायम्भुव#वैवस्वत
व्यास

कृष्णद्वैपायन व्यास कौन हैं?

कृष्णद्वैपायन अट्ठाईस व्यासों में अंतिम रूप से बताए गए हैं और साक्षात् विष्णुस्वरूप मुनि कहे गए हैं।

#कृष्णद्वैपायन#व्यास#विष्णुस्वरूप
व्यास

अट्ठाईस व्यास कौन-कौन हैं?

अट्ठाईस व्यासों में क्रतु से लेकर कृष्णद्वैपायन तक नाम बताए गए हैं।

#अट्ठाईस व्यास#व्यास#कृष्णद्वैपायन
माहेश्वर योग

माहेश्वर योग क्या है?

माहेश्वर योग शिवकृपा से प्राप्त होने वाला ज्ञानस्वरूप दिव्य योग है, जिसमें ज्ञान से योग और योग से मुक्ति बताई गई है।

#माहेश्वर योग#शिव कृपा#ज्ञान
शंकर नाम

नीललोहित नाम का अर्थ क्या है?

नीला कण्ठ और लाल देह होने के कारण शिवजी नीललोहित कहलाते हैं।

#नीललोहित#नीला कण्ठ#लाल देह
शंकर नाम

पिनाकी नाम का अर्थ क्या है?

पिनाक नामक धनुष धारण करने के कारण शिवजी पिनाकी कहलाते हैं।

#पिनाकी#पिनाक#धनुष
शंकर नाम

शंकर नाम का अर्थ क्या है?

शंकर नाम का अर्थ कल्याण करने वाला बताया गया है।

#शंकर#नाम अर्थ#कल्याण
सृष्टि

स्थावर-जंगम जगत क्या है?

स्थावर-जंगम जगत वही सम्पूर्ण जगत है जिसे ब्रह्मा ने जरा-मरण से युक्त बनाया।

#स्थावर जंगम#जगत#ब्रह्मा
पितृ वंश

हैमवती गंगा कौन हैं?

हैमवती गंगा मेना से उत्पन्न बताई गई हैं और शिवजी के मस्तक पर विराजमान रहने से जगत् को पवित्र करने वाली कही गई हैं।

#हैमवती गंगा#मेना#गंगा
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

श्रीलिङ्गमहापुराण टैग
श्रीलिङ्गमहापुराण पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी श्रीलिङ्गमहापुराण सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।

श्रीलिङ्गमहापुराण क्या है? — 153 प्रश्नोत्तर