ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
क्या है

श्रीलिङ्गमहापुराण क्या है?(153)

श्रीलिङ्गमहापुराण का अर्थश्रीलिङ्गमहापुराण क्या है?श्रीलिङ्गमहापुराण का महत्व
सरल उत्तर

कल्प में अवशिष्ट सूक्ष्म जीवों और पार्थिव पदार्थों को जाग्रत करने वाली शक्ति ऐश्वरी माया कही गई है।

स्रोत प्रश्न: ऐश्वरी माया क्या है? →
शिव माया

ऐश्वरी माया क्या है?

कल्प में अवशिष्ट सूक्ष्म जीवों और पार्थिव पदार्थों को जाग्रत करने वाली शक्ति ऐश्वरी माया कही गई है।

#ऐश्वरी माया#सूक्ष्म जीव#पार्थिव पदार्थ
सनकादि कुमार

सनकादि कुमार कौन थे?

सनत्कुमार, ऋभु, सनक, सनातन और सनन्दन ब्रह्मा के पुत्र रूप में उत्पन्न कुमार थे, जिनमें सनत्कुमार और ऋभु ऊर्ध्वरेता थे।

#सनकादि कुमार#सनत्कुमार#ऋभु
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का असली अर्थ क्या है?

समग्र जगत को अपने में लय करने के कारण इसे लिंग कहा गया है।

#शिवलिंग#लिंग अर्थ#लय
शिव नाम

वेदगर्भ और विश्वगर्भ क्या हैं?

वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ शिव के नामों के रूप में आए हैं; उन्हें वेदशास्त्ररूप और भुवनेशदेव भी कहा गया है।

#वेदगर्भ#विश्वगर्भ#गर्भरूप
शिव नाम

पार्वतीपति और उमापति कौन हैं?

पार्वतीपति और उमापति शिव को कहा गया है; उसी स्थान पर उन्हें हिरण्यबाहु और सुवर्णवीर्य भी नमस्कार किया गया है।

#पार्वतीपति#उमापति#हिरण्यबाहु
शिव रूप

अर्धनारीश्वर रूप क्या है?

अर्धनारीश्वर रूप में शिव को अर्धनारी का शरीर धारण करने वाला, अव्यक्त और ग्यारह रूपों में परिवर्तित स्थाणु कहा गया है।

#अर्धनारीश्वर#अव्यक्त#स्थाणु
लिंग रूप

लिंग और लिंगी क्या हैं?

विष्णु स्तुति में शिव को ऊर्ध्व लिंग, लिंगी, हेमलिंग, जललिंग और शिवलिंग रूप में नमस्कार किया गया है।

#लिंग#लिंगी#ऊर्ध्व लिंग
प्रणव रूप

अकार, उकार, मकार क्या हैं?

अकार को परमात्मा, उकार को आदिदेव विद्यादेह और मकार को परमात्मा शिव कहा गया है।

#अकार#उकार#मकार
प्रणव रूप

प्रणवरूप रुद्र कौन हैं?

प्रणवरूप रुद्र अद्वितीय और नाशरहित हैं; स्तुति में अकार, उकार और मकार रूप परमात्मा को भी नमस्कार किया गया है।

#प्रणवरूप रुद्र#रुद्र#ओंकार
विष्णु स्तुति

विष्णु स्तुति क्या है?

विष्णु स्तुति वह स्तोत्र है जिसमें विष्णु ने रुद्र, शिव, महेश्वर, ओंकार, मोक्षदाता और विश्वगर्भ रूपों को नमस्कार किया।

#विष्णु स्तुति#महेश्वर#शिव
पाँच शिव मंत्र

वामदेव मंत्र क्या है?

वामदेव मंत्र सामवेद से उत्पन्न, रक्तवर्ण, तेरह कलाओं से युक्त और छाछठ अक्षरों वाला बताया गया है।

#वामदेव मंत्र#सामवेद#रक्तवर्ण
पाँच शिव मंत्र

सद्योजात मंत्र क्या है?

सद्योजात मंत्र यजुर्वेद से उत्पन्न, आठ कलाओं वाला, श्वेतवर्ण, शान्तिकारक और पैंतीस अक्षरों से युक्त बताया गया है।

#सद्योजात मंत्र#यजुर्वेद#श्वेतवर्ण
पाँच शिव मंत्र

अघोर मंत्र क्या है?

अघोर मंत्र अथर्ववेद से उत्पन्न, आठ कलाओं से युक्त, तैंतीस अक्षरों वाला और कृष्णवर्ण बताया गया है।

#अघोर मंत्र#अथर्ववेद#आठ कला
पाँच शिव मंत्र

तत्पुरुष मंत्र क्या है?

तत्पुरुष मंत्र गायत्री से उत्पन्न, चार कलाओं वाला, चौबीस अक्षरों से युक्त और हरित वर्ण का बताया गया है।

#तत्पुरुष मंत्र#गायत्री#चार कला
पाँच शिव मंत्र

ईशान मंत्र क्या है?

ईशान मंत्र ओंकार से उत्पन्न, पाँच कलाओं वाला, बुद्धिविवर्धक, धर्म-अर्थ सिद्ध करने वाला और शुद्ध स्फटिक जैसा शुभ्र बताया गया है।

#ईशान मंत्र#ओंकार#पाँच कला
शब्दमय शिव

शब्दमय शिव रूप क्या है?

वेदमंत्रों से स्तुति के बाद महेश्वर लिंग में दिव्य शब्दमय रूप धारण कर प्रकट हुए, जिनका शरीर अक्षरों से बताया गया।

#शब्दमय शिव#महेश्वर#लिंग
लिंग तत्त्व

लिंगी किसे कहा गया है?

परमेश्वर को लिंगी कहा गया है, जबकि प्रधान को लिंग कहा गया है।

#लिंगी#परमेश्वर#लिंग
लिंग तत्त्व

शिवलिंग क्या है?

लिंग को प्रधान कहा गया है और आगे वही लिंगरूप प्रणव सभी लोकों की सृष्टि करने वाला बताया गया है।

#शिवलिंग#लिंग#प्रधान
शिव स्नान

शिव स्नान की विधि क्या है?

अघोर मंत्र जपते हुए आठ द्रोण घी से देवेश शिव को स्नान कराकर बाद में शुद्ध जल से स्नान कराने का विधान है।

#शिव स्नान#घी स्नान#अघोर मंत्र
पंचगव्य विधि

पंचगव्य विधि क्या है?

पंचगव्य विधि में कपिला गाय का मूत्र, गोबर, घी, दूध, दही और कुशजल लेकर अघोर मंत्र से अभिमंत्रित करने का विधान है।

#पंचगव्य#कपिला गाय#अघोर मंत्र
दैनिक आचार

बिना स्नान-पूजा भोजन करने का उपाय क्या है?

बिना स्नान, गायत्री-जप, अग्निहोत्र या देव-अतिथि भोजन कराए बिना भोजन करने वाले द्विज के लिए एक हजार जप बताया गया है।

#बिना स्नान भोजन#गायत्री जप#अग्निहोत्र
महापातक प्रायश्चित

सुरापान का प्रायश्चित क्या है?

सुरापान करने वाले के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप और वारुणी पीने वाले के लिए पचास हजार जप बताया गया है।

#सुरापान#मद्यपान#अघोर मंत्र
पाप प्रायश्चित

गोहत्या और स्त्रीहत्या का उपाय क्या है?

गोहत्या, कृतघ्नता और स्त्रीहत्या जैसे पापों के लिए दस हजार अघोर मंत्र जप से पापमुक्ति बताई गई है।

#गोहत्या#स्त्रीहत्या#कृतघ्न
महापातक प्रायश्चित

ब्रह्महत्या का प्रायश्चित क्या है?

ब्रह्महत्या के लिए एक लाख अघोर मंत्र जप से मुक्ति कही गई है; दूसरे स्थान पर ऐसे नराधम के लिए दस लाख मानस जप भी बताया गया है।

#ब्रह्महत्या#प्रायश्चित#अघोर मंत्र
अघोर कुमार

अघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?

अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।

#चार कुमार#कृष्ण#कृष्णशिख
असित कल्प

असित कल्प क्या है?

असित कल्प पीतकल्प के बीत जाने के बाद प्रवृत्त ब्रह्मा का दूसरा कल्प बताया गया है।

#असित कल्प#कल्प#ब्रह्मा
अघोर महिमा

अघोर शिव कौन हैं?

अघोर शिव असित कल्प में कृष्णवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए महादेव हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने देवदेवेश और ब्रह्मस्वरूप माना।

#अघोर#शिव#महादेव
रौद्री गायत्री

रौद्री गायत्री क्या है?

रौद्री गायत्री वेदप्रतिपादित, ज्ञानदायिनी, विद्यास्वरूपिणी और लोकवन्द्या महादेवी धेनु के रूप में बताई गई है।

#रौद्री गायत्री#धेनु#ज्ञानदायिनी
महेश्वरी धेनु

रुद्राणी किसे कहा गया है?

महादेव ने महेश्वरी धेनु से कहा कि तुम रुद्राणी होगी और ब्राह्मणों के कल्याण के लिये परमार्थसाधिका बनोगी।

#रुद्राणी#महेश्वरी धेनु#महादेव
पीतवासा कल्प

पीतवासा कल्प क्या है?

पीतवासा कल्प इकतीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें ब्रह्मा ने पीला वस्त्र धारण किया था।

#पीतवासा कल्प#कल्प#ब्रह्मा
तत्पुरुष महिमा

तत्पुरुष शिव कौन हैं?

तत्पुरुष शिव पीतवासा कल्प में पीतवस्त्रधारी परमेश्वर रूप से प्रकट हुए महादेव हैं।

#तत्पुरुष#शिव#महादेव
वामदेव कुमार

विरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन कौन थे?

विरजा, विबाहु, विशोक और विश्वभावन ब्रह्मा के चार कुमार थे, जो विशुद्ध आत्मा और ब्रह्मतेज से सम्पन्न बताए गए हैं।

#विरजा#विबाहु#विशोक
वामदेव रूप

रक्तकल्प क्या है और इसमें शिव का कौन सा रूप प्रकट हुआ?

रक्तकल्प तीसवाँ कल्प बताया गया है, जिसमें शिव वामदेव रूप से रक्तवर्ण कुमार के रूप में प्रकट हुए।

#रक्तकल्प#वामदेव#शिव रूप
वामदेव महिमा

वामदेव शिव कौन हैं?

वामदेव शिव रक्तकल्प में लाल कुमार के रूप में प्रकट हुए परमेश्वर हैं, जिन्हें ब्रह्मा ने साक्षात् देवेश्वर और ब्रह्मस्वरूप जाना।

#वामदेव#शिव#महादेव
सद्योजात शिष्य

श्वेत मुनि कौन थे?

श्वेत मुनि श्वेत आभा वाले महातेजस्वी मुनि थे, जो सद्योजात से उत्पन्न हुए।

#श्वेत मुनि#हर#सद्योजात
सद्योजात शिष्य

सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्दन कौन हैं?

ये सद्योजात ब्रह्म के समीप प्रकट हुए चार श्वेतवर्ण, महायशस्वी और सेवापरायण शिष्य थे।

#सुनन्द#नन्दन#विश्वनन्द
सद्योजात शिष्य

सद्योजात शिव के चार शिष्य कौन थे?

सद्योजात शिव के समीप सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्दन नामक चार श्वेतवर्ण शिष्य प्रकट हुए।

#सद्योजात#चार शिष्य#सुनन्द
सद्योजात महिमा

शिव का श्वेतलोहित रूप क्या है?

शिव का श्वेतलोहित रूप शिखाधारी श्वेतलोहित कुमार के रूप में प्रकट हुआ, जिसे ब्रह्मा ने परमेश्वर जाना।

#श्वेतलोहित#सद्योजात#कुमार
सद्योजात महिमा

सद्योजात शिव कौन हैं?

सद्योजात शिव को ब्रह्मा ने श्वेतलोहित कुमार रूप में देखा और साक्षात् परमेश्वर तथा परात्पर ब्रह्म जाना।

#सद्योजात#शिव#महेश्वर
ज्ञान और भक्ति

वास्तविक ज्ञान क्या है?

प्रकृति से परमाणु तक जड़ जगत के सभी पदार्थों से ईश्वर को पृथक जानना वास्तविक ज्ञान है।

#वास्तविक ज्ञान#ईश्वर#प्रकृति
योग और वैराग्य

संन्यास का सही अर्थ क्या है?

विहित और निषिद्ध कर्मों में दोष-गुण बुद्धि का त्याग संन्यास है; इष्ट-अनिष्ट कर्मों को छोड़ना न्यास है।

#संन्यास#न्यास#विहित कर्म
योग और वैराग्य

शम का लक्षण क्या है?

जिसकी इन्द्रियाँ अपने या दूसरे के लिये मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, उसमें शम का लक्षण है।

#शम#इन्द्रिय संयम#मिथ्या प्रवृत्ति
दान और साधुधर्म

साधुधर्म क्या है?

श्रुति-स्मृति से विहित, वर्णाश्रम से सम्बद्ध और शिष्टाचार के अनुकूल धर्म साधुधर्म है।

#साधुधर्म#श्रुति#स्मृति
दान और साधुधर्म

दान का सही लक्षण क्या है?

न्यायपूर्वक अर्जित प्रिय द्रव्य को गुणी पात्र को देना दान का लक्षण है।

#दान#न्यायपूर्वक धन#गुणी पात्र
धर्म और आचार

दया किसे कहा गया है?

अपने हित-अहित की तरह सभी प्राणियों के हित-अहित का ध्यान रखने वाली निरंतर वृत्ति दया है।

#दया#सभी प्राणी#हिताहित
धर्म और आचार

सत्य बोलने का सही अर्थ क्या है?

पूछे जाने पर देखे गए कथनयोग्य और अकथनीय विषय को बिना छिपाए व्यक्त करना सत्य कहा गया है।

#सत्य#वाणी#देखा हुआ
धर्म और आचार

धर्म और अधर्म का सही अर्थ क्या है?

कुशल कर्म धर्म और अकुशल कर्म अधर्म है; जिससे अभीष्ट मिले वह धर्म और जिससे अनिष्ट मिले वह अधर्म है।

#धर्म#अधर्म#कुशल कर्म
साधु और संत

साधु किसे कहा जाता है?

जो अपने आश्रम के धर्म का साधन करता है, वह साधु कहा गया है।

#साधु#ब्रह्मचारी#गृहस्थ
धर्म और आचार

द्विजाति किसे कहा गया है?

ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य सामान्य और विशेष पदार्थों से सम्बन्धविशेष के कारण द्विजाति कहे गए हैं।

#द्विजाति#ब्राह्मण#क्षत्रिय
साधु और संत

संत किसे कहा गया है?

सत् शब्द का अर्थ ब्रह्म है; जो अंत में ब्रह्म को प्राप्त करते हैं, वे संत कहलाते हैं।

#संत#सत्#ब्रह्म
और क्या है
अन्य शब्दों के क्या है

सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के क्या है।

श्रीलिङ्गमहापुराण टैग
श्रीलिङ्गमहापुराण पर सम्पूर्ण संग्रह

सभी श्रीलिङ्गमहापुराण सम्बन्धित प्रश्नोत्तर एक स्थान पर।