विस्तृत उत्तर
मंदिर जल कुंड (पुष्करणी/कल्याणी/तीर्थ):
- 1शुद्धि: दर्शन पूर्व स्नान = शारीरिक+मानसिक शुद्धि।
- 2पवित्र जल: मंदिर जल = अभिमंत्रित/पवित्र — पाप नाश।
- 3अभिषेक: मूर्ति अभिषेक = कुंड जल। पंचामृत/चरणामृत।
- 4वास्तु: जल = शांति+समृद्धि। ईशान कोण = जल स्थान।
- 5दक्षिण विशेष: द्राविड़ मंदिर = विशाल पुष्करणी (रामेश्वरम, चिदंबरम, कांची)।
- 6उत्सव: तेप्पम (नौका उत्सव) = कुंड में — देवता नौका विहार।
प्रसिद्ध: रामेश्वरम 22 कुंड (प्रत्येक = विशिष्ट पाप नाश)। पद्मतीर्थ (तिरुपति)।





