विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि नरक उन जीवात्माओं को मिलता है जिन्होंने जीवन में पापकर्म किए हों और धर्म से विमुख रहे हों। यह कोई मनमाना दंड नहीं है — यह कर्म के अटल नियम का स्वाभाविक परिणाम है।
गरुड़ पुराण में जिन कर्मों के लिए नरक बताया गया है, उनमें प्रमुख हैं — झूठ बोलना और झूठी गवाही देना, हिंसा और हत्या करना, दूसरों की संपत्ति चुराना या हड़पना, व्यभिचार और अनैतिक आचरण, माता-पिता और गुरु का अपमान करना, दान-पुण्य और ईश्वर-भक्ति से विमुख रहना, केवल परिवार के लिए अधर्म के मार्ग से धन कमाना तथा निर्दोष जीवों को सताना।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जो प्राणी सदा पापकर्मों में लगे हुए हैं, दया और धर्म का उन्हें कोई मतलब नहीं, दुष्टों की संगति में रहते हैं — ऐसे प्राणी नरक में गिरते हैं।'
यह ध्यान देने योग्य है कि नरक का उद्देश्य केवल दंड नहीं है — यह आत्मा की शुद्धि का एक चरण भी है। नरक की यातना भोगने के बाद जीव अगले जन्म में शुद्ध होकर आता है।





