विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में नरक में धातु पात्रों के विभिन्न वर्णन मिलते हैं।
खौलते लोहे का बर्तन (तप्तकुंभ नरक) — 'तप्त' अर्थात तपे हुए, 'कुंभ' अर्थात घड़ा। इस नरक में पापियों को खौलते लोहे के बर्तन में डाला जाता है। Punjab Kesari के अनुसार — 'तप्तकुंभ नर्क: पापियों को खौलते लोहे के बर्तन में डाला जाता है।'
कुंभीपाक नरक — इसमें तेल से भरे बड़े-बड़े घड़े (कुंभी) हैं जो आग पर रखे हैं। पापी जीव को इनमें डालकर पकाया जाता है।
तप्तलोहमय नरक — 'तप्त लोह' अर्थात लाल तपे हुए लोहे का नरक। पाखंडी लोग यहाँ तपते लोहे में जलाए जाते हैं।
लोहे का तपता बिस्तर — गरुड़ पुराण के अनुसार कुछ पापियों को लोहे के तप्त (गर्म) बिस्तर पर सुलाया जाता है और लाखों वर्षों तक वहाँ रखा जाता है।
लोहे के नुकीले तीर — महाप्रभ नरक में एक बहुत बड़ा लोहे का नुकीला तीर है जिसमें पापियों को पिरोया जाता है।
धातु पात्रों का उपयोग इस बात का प्रतीक है कि पाप कितना भी तपाने वाला हो — उसका परिणाम उससे भी अधिक तपाने वाला होता है।





