विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में काटे जाने की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है, विशेषकर असिपत्रवन नरक के संदर्भ में।
असिपत्रवन नरक — 'असि' अर्थात तलवार और 'पत्र' अर्थात पत्ते। इस नरक में एक विशाल वन है जिसके वृक्षों पर पत्तों के स्थान पर तीखी तलवारें और खडग हैं। मित्रों से दगा करने वाले यहाँ भेजे जाते हैं। वे इस वन में गिराए जाते हैं और तलवार-पत्तों से बार-बार काटे जाते हैं।
स्रपदन्त नरक — यहाँ नाखूनों से शरीर को खरोंचा-काटा जाता है।
पशुओं द्वारा काटना — अनेक नरकों में भयंकर कुत्ते, सर्प, बिच्छू और विशाल पक्षी बार-बार काटते हैं।
काटने की संख्या — गरुड़ पुराण में इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं बताई गई। परंतु संजीवन नरक के सिद्धांत के अनुसार — जब जीव काटे जाने से मर जाता है, तो उसे पुनः जीवित करके फिर काटा जाता है। यह चक्र पापों का दंड पूरा होने तक चलता रहता है।
प्रत्येक कटना उसी पाप का प्रतिफल है जो जीव ने किसी को दिया था।
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