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स्कंद पुराण प्रश्नोत्तरी — 38 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित स्कंद पुराण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 38 प्रश्न

दिव्यास्त्र

स्कंद पुराण में कार्तिकेय के अस्त्रों का क्या वर्णन है

स्कंद पुराण में कार्तिकेय का मुख्य अस्त्र वेल (माता-प्रदत्त भाला) है। जन्म से ही उनके हाथ में दिव्य शस्त्र थे। वेल से तारकासुर-वध और सुरपदम का पहाड़-रूप तोड़ा। वे देव-सेनापति हैं।

स्कंद पुराणकार्तिकेय अस्त्रवेल
लोक

जालंधर की कहानी किस पुराण में आती है?

जालंधर की कथा प्रमुख रूप से शिव पुराण में आती है।

जालंधर पुराणशिव पुराणस्कंद पुराण
लोक

शस्त्र मृत्यु का श्राद्ध कब करें?

शस्त्र मृत्यु का श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी को करें।

शस्त्र मृत्युचतुर्दशी श्राद्धस्कंद पुराण
श्राद्ध दर्शन

पृथ्वी पर अर्पित अन्न पितरों को कैसे मिलता है?

मत्स्य/स्कंद पुराण: पितर की योनि के अनुसार अन्न रूपांतरित होता है — देव योनि = अमृत, असुर योनि = भोग, पशु योनि = तृण (घास), सर्प योनि = वायु। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से यह सूक्ष्म रूपांतरण होता है।

पारलौकिक विज्ञानमत्स्य पुराणस्कंद पुराण
लोक

स्कंद पुराण में वैराज देवगणों की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?

स्कंद पुराण में वैराज देवगण तृष्णा-मुक्त, निवृत्ति मार्गी, वासुदेव-समर्पित और ब्रह्म-ध्यान में लीन बताए गए हैं।

स्कंद पुराणवैराजतृष्णा
दान विधान

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार क्या दान करें?

राशि अनुसार दान: मेष = ऊनी वस्त्र; वृषभ = गाय-चावल; मिथुन = हरे मूंग; कर्क = घी-चांदी; सिंह = स्वर्ण-गेहूं; कन्या = अन्न-बीज; तुला/वृश्चिक = वस्त्र; धनु = चने की दाल; मकर = तिल-कंबल-ईंधन; कुम्भ = जल-घड़े; मीन = पुष्प-मिष्ठान।

राशि अनुसार दानभविष्य पुराणस्कंद पुराण
तुलसी विवाह परिचय

तुलसी और शालिग्राम का विवाह क्यों होता है — क्या कथा है?

पद्म पुराण और स्कंद पुराण: जलंधर असुर की पत्नी वृंदा के पातिव्रत्य के कारण वह अजेय था। विष्णु ने छल से जलंधर का रूप लिया → वृंदा का पातिव्रत्य भंग → जलंधर का वध संभव। वृंदा ने विष्णु को 'शालिग्राम' बनने का श्राप दिया → विष्णु ने वृंदा को 'तुलसी' बनने का वरदान दिया।

तुलसी शालिग्राम कथावृंदा जलंधरपद्म पुराण
नवरात्रि और उपासना

स्कंद पुराण के अनुसार विभिन्न आयु की कन्याएं किस देवी का स्वरूप हैं?

स्कंद पुराण: 2 वर्ष = कुमारिका (दुख नाश); 3 = त्रिमूर्ति (धर्म-अर्थ-काम); 4 = कल्याणी (सुख-शांति); 5 = रोहिणी (स्वास्थ्य); 6 = कालिका (शत्रु नाश); 7 = चंडिका (ऐश्वर्य); 8 = शाम्भवी (विजय-लोकप्रियता); 9 = दुर्गा (संकट निवारण); 10 = भद्रा/सुभद्रा (मनोकामना पूर्ति)।

कन्या आयु देवीस्कंद पुराण2 से 10 वर्ष
दुर्गा शब्द की व्युत्पत्ति

स्कंद पुराण के अनुसार 'दुर्गा' नाम कैसे पड़ा?

स्कंद पुराण (काशी खंड, 71वाँ अध्याय): दुर्गमासुर ने वेद चुराए → देवताओं की शक्ति क्षीण → आद्याशक्ति का आह्वान → देवी पार्वती ने महाभयंकर रूप धारण कर दुर्गमासुर का वध किया → देवताओं-ऋषियों ने घोषणा: यह रौद्र रूप 'दुर्गा' कहलाएगा।

दुर्गमासुरस्कंद पुराणनामकरण
हरतालिका तीज और उपासना

हरतालिका तीज व्रत क्या है?

हरतालिका तीज = भाद्रपद शुक्ल तृतीया, निर्जला व्रत। कथा: हिमालय ने विष्णु से विवाह तय किया → पार्वती दुखी → सखी ने हरण कर जंगल ले गई → पार्वती ने बालू का शिवलिंग बनाकर रात भर जागरण किया → शिव प्रकट हुए और पत्नी स्वीकार किया।

हरतालिका तीजभाद्रपदनिर्जला व्रत
गुरु तत्व और गुरु कृपा

गुरु गीता में गुरु के बारे में क्या कहा गया है?

गुरु गीता (स्कंद पुराण): 'गुरुर्ब्रह्मागुरुर्विष्णुःगुरुर्देवोमहेश्वरः। गुरुःसाक्षात्परब्रह्म...' — गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश और साक्षात परब्रह्म हैं।

गुरु गीतास्कंद पुराणगुरुर्ब्रह्मा
नमः शिवाय मंत्र परिचय

स्कंद पुराण में नमः शिवाय के बारे में क्या कहा गया है?

स्कंद पुराण कहता है: जिसके हृदय में 'नमः शिवाय' मंत्र निवास करता है, उसे अन्य मंत्रों, तीर्थों, तपस्याओं या यज्ञों की कोई आवश्यकता नहीं।

स्कंद पुराणनमः शिवायतीर्थ तपस्या
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुति

स्कंद पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?

स्कंद पुराण कहता है कि हजार करोड़ शिवलिंगों की पूजा का अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

स्कंद पुराणदर्शन मात्रहजार करोड़
पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य

पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से क्या होता है?

स्कंद पुराण के अनुसार, हजार करोड़ शिवलिंगों के पूजन से जो फल मिलता है, वही अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

दर्शन मात्र फलस्कंद पुराणहजार करोड़ शिवलिंग
विशेष अभिषेक द्रव्य और उनके फल

तीर्थ जल से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है?

स्कंद पुराण के अनुसार, तीर्थ जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति और सभी पापों का क्षय होता है — यह परम आध्यात्मिक लक्ष्य के लिए सर्वश्रेष्ठ द्रव्य है।

तीर्थ जलमोक्ष प्राप्तिपाप क्षय
स्तोत्र पाठ

प्रदोष स्तोत्राष्टकम् क्या है?

यह स्कंद पुराण में लिखा एक खास पाठ है, जिसका अर्थ है कि इस जन्म और मरण के भयंकर संसार में केवल शिव जी के चरणों की सेवा ही एकमात्र सत्य है।

स्कंद पुराणस्तोत्राष्टकम्शिव महिमा
मंत्र और स्तोत्र

सत्यनारायण भगवान का ध्यान मंत्र क्या है?

ध्यान मंत्र है: "ध्यायेत् सत्यं गुणातीतं गुणत्रय-समन्वितम्... नीलवर्णं पीतवस्त्रं..." (अर्थात जो सत्य स्वरूप हैं, तीनों गुणों से परे हैं, नीले रंग और पीले वस्त्रों वाले हैं, उनका मैं ध्यान करता हूँ)।

ध्यान मंत्रस्कंद पुराणभगवान का स्वरूप
शास्त्रीय प्रमाण

सत्यनारायण व्रत का उल्लेख किस पुराण में मिलता है?

इस व्रत का मुख्य उल्लेख 'स्कंद पुराण' के 'रेवा खंड' और 'भविष्य पुराण' के 'प्रतिसर्ग पर्व' में मिलता है, जहाँ भगवान विष्णु स्वयं देवर्षि नारद को इस व्रत की महिमा बताते हैं।

स्कंद पुराणरेवा खंडभविष्य पुराण
शास्त्रीय प्रमाण

क्या शनिवार व्रत का वर्णन पुराणों और शास्त्रों में है?

हाँ, इसका वर्णन स्कंद पुराण, पद्म पुराण, भविष्य पुराण, धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में मिलता है।

शास्त्र प्रमाणस्कंद पुराणदशरथ स्तोत्र
काशी के शिवलिंग

काशी में कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की स्थापना किसने की थी?

इसकी स्थापना भगवान शिव के प्रिय 'कुक्कुट' नामक शिव गण ने की थी। इसका वर्णन स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में मिलता है, जहाँ कुक्कुट गण काशी की दिव्यता से मोहित होकर यहीं बस गए और शिवलिंग स्थापित किया।

कुक्कुटेश्वर शिवलिंगशिव गण कुक्कुटस्कंद पुराण
उपासना का फल

स्कंद पुराण के अनुसार पिंगलेश्वर शिवलिंग की पूजा और दान के क्या फायदे (फल) हैं?

यहाँ दर्शन से जन्म-जन्मांतर के पाप भस्म होते हैं और पितरों को प्रेत-योनि से मुक्ति मिलती है। यह तारक ज्ञान प्रदान कर जीव को आवागमन के चक्र से मुक्त करता है और शिव-सायुज्य (मोक्ष) देता है।

मोक्ष प्राप्तिपाप क्षयपितृ शांति
काशी के शिवलिंग

काशी में पिंगलेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?

इसकी स्थापना साक्षात् शिव के अत्यंत तेजस्वी अनुचर 'पिंगल गण' ने की थी। इसका ऐतिहासिक प्रमाण स्कंद पुराण के काशी खंड में मिलता है।

पिंगलेश्वर शिवलिंगशिव गण पिंगलस्कंद पुराण
पौराणिक कथाएँ

भगवान शिव ने अपने गणों को काशी क्यों भेजा था?

राजा दिवोदास के निष्कंटक शासन में दोष निकालने और उन्हें काशी से विस्थापित करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को काशी भेजा था, ताकि शिव पुनः अपनी प्रिय नगरी लौट सकें।

राजा दिवोदासशिवगणों का काशी आगमनस्कंद पुराण
काशी के शिवलिंग

काशी में नंदीशेनेश्वर शिवलिंग किसने स्थापित किया था?

इस शिवलिंग की स्थापना शिव के पराक्रमी गण 'नंदीषेण' ने की थी, जिसका प्रामाणिक उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53-54) में प्राप्त होता है।

नंदीशेनेश्वर शिवलिंगशिवगण नंदीषेणस्कंद पुराण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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