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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

युग मान

युगों की संध्या और संध्यांश क्या होते हैं?

युगों के आरंभ-अंत से जुड़े सन्ध्या और सन्ध्यांश के वर्ष बताए गए हैं, जैसे सत्ययुग में चार सौ-चार सौ वर्ष।

सन्ध्यासन्ध्यांशसत्ययुग
युग मान

चतुर्युगी कितने वर्षों की होती है?

सन्ध्या-सन्ध्यांश छोड़कर चारों युगों का काल छत्तीस लाख मानुषी वर्ष और सन्ध्यांश तीन लाख साठ हजार वर्ष बताया गया है।

चतुर्युगीचार युगयुग मान
युग मान

कलियुग कितने वर्ष का होता है?

कलियुग का नियत समय एक हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से तीन लाख साठ हजार वर्ष बताया गया है।

कलियुगयुग मानमानुष वर्ष
युग मान

द्वापरयुग कितने वर्ष का होता है?

द्वापरयुग का नियत समय दो हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से सात लाख बीस हजार वर्ष बताया गया है।

द्वापरयुगयुग मानमानुष वर्ष
युग मान

त्रेतायुग कितने वर्ष का होता है?

त्रेतायुग का नियत समय तीन हजार दिव्य वर्ष और मानुषी वर्ष से दस लाख अस्सी हजार वर्ष बताया गया है।

त्रेतायुगयुग मानमानुष वर्ष
युग मान

सत्ययुग कितने वर्ष का होता है?

सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्षों का और मानुषी वर्ष से चौदह लाख चालीस हजार वर्षों का बताया गया है।

सत्ययुगकृतयुगदिव्य वर्ष
कल्प और मन्वन्तर

एक कल्प में कितनी चतुर्युगी होती हैं?

एक हजार चतुर्युगों का काल एक कल्प कहा गया है।

कल्पचतुर्युगीयुग
कल्प और मन्वन्तर

एक कल्प में कितने मनु होते हैं?

एक हजार चतुर्युगी की अवधि में चौदह मनु उत्पन्न होते हैं।

कल्पमनुचतुर्युगी
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का दिन रात मनुष्यों जैसा क्यों नहीं है?

ब्रह्मा का अहोरात्र उत्पत्ति और प्रलय से जुड़ा है, मनुष्यों की तरह सूर्योदय-सूर्यास्त वाला नहीं।

ब्रह्माअहोरात्रसूर्योदय
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा रात में क्या करते हैं?

ब्रह्मा रात में प्रलय करते हैं और दिन की सृष्टि विलीन हो जाती है।

ब्रह्मारातप्रलय
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा दिन में क्या करते हैं?

ब्रह्मा दिन में सृष्टि करते हैं और वैकारिक सृष्टि सहित देवता, प्रजापति और महर्षि विद्यमान रहते हैं।

ब्रह्मादिनसृष्टि
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा का दिन क्या होता है?

ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।

ब्रह्माब्रह्मा का दिनकल्प
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनाने वाले को क्या फल मिलता है?

जो नियमपूर्वक भक्ति से सुनता है और जो शुद्ध वैष्णवों के सामने सुनाता है, दोनों यथार्थ फल पाते हैं; उनके लिये कुछ असाध्य नहीं।

कथा सुनानावक्ता फलवैकुंठ
श्रीमद्भागवत

आधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?

असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।

आधा क्षणभागवत कथामुक्ति
श्रीमद्भागवत

यमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?

यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।

यमराजवैष्णवभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा भवरोग की औषधि क्यों है?

कलियुग में भागवत कथा भवरोग की रामबाण औषधि, कृष्णप्रिय, पाप-नाशक, मुक्ति का कारण और भक्ति बढ़ाने वाली कही गई है।

भवरोगऔषधिमुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा दारिद्र्य और दुख में कैसे सहारा देती है?

दारिद्र्य-दुख से जलते, माया से दबे और संसार-सागर में डूबते लोगों के कल्याण के लिये भागवत गरजती है।

दारिद्र्यदुखमाया
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से मोह कैसे मिटता है?

कथामृत पीने से सबका मोह नष्ट हुआ; शुकदेवजी ने भक्ति को पुत्रों सहित अपने शास्त्र में स्थापित किया।

मोहभागवत श्रवणभक्ति
श्रीमद्भागवत

जहाँ भागवत सप्ताह हो वहाँ भगवान आते हैं?

भक्तों ने वर माँगा कि जहाँ भी भविष्य में सप्ताह कथा हो, भगवान पार्षदों सहित पधारें; भगवान ने तथास्तु कहा।

भागवत सप्ताहभगवान आगमनवर
श्रीमद्भागवत

कथा और कीर्तन से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा-कीर्तन देखकर भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि तुम्हारी भक्ति ने मुझे वश में कर लिया, वर माँगो।

कथाकीर्तनभगवान प्रसन्न
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में भगवान कैसे प्रकट होते हैं?

शुकदेवजी के वचन के बीच सभा में प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदों सहित श्रीहरि प्रकट हुए।

भगवान प्रकटभागवत कथाकीर्तन
श्रीमद्भागवत

भागवत रस स्वर्ग से भी श्रेष्ठ क्यों है?

शुकदेवजी कहते हैं कि यह भागवत रस स्वर्ग, सत्यलोक, कैलास और वैकुंठ में भी नहीं है, इसलिए इसे कभी न छोड़ें।

भागवत रसस्वर्गकैलास
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने पढ़ने और मनन से मुक्ति कैसे मिलती है?

शुकदेवजी कहते हैं कि जो भक्ति से भागवत के श्रवण, पठन और मनन में तत्पर रहता है, वह मुक्त हो जाता है।

श्रवणपठनमनन
श्रीमद्भागवत

भागवत वैष्णवों का धन क्यों है?

शुकदेवजी भागवत को पुराणों का तिलक और वैष्णवों का धन कहते हैं, क्योंकि इसमें परमहंसों का निर्मल ज्ञान और भक्ति-ज्ञान-वैराग्य सहित मुक्ति मार्ग है।

वैष्णवभागवतधन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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