ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

काल और ब्रह्मा

ब्रह्मा के दिन रात और आयु की गणना कहाँ बताई गई है?

ब्रह्मा के दिन-रात और आयु की गणना लिङ्गपुराण में वर्णित विषयों में बताई गई है।

ब्रह्मादिन रातआयु
सृष्टि तत्त्व

प्रजापतियों की सृष्टि और पृथ्वी उद्धार की कथा कहाँ है?

प्रजापतियों की सृष्टि और पृथ्वी के उद्धार की कथा लिङ्गपुराण में वर्णित विषयों में बताई गई है।

प्रजापतिपृथ्वी उद्धारब्रह्मा
शिव तत्त्व

प्रलयकाल में नारायण रूप में कौन शयन करते हैं?

प्रलयकालीन जलराशि में सदाशिव का ही नारायण रूप में शयन बताया गया है।

प्रलयकालनारायणसदाशिव
शिव तत्त्व

सदाशिव से ब्रह्मा विष्णु और कालरुद्र कैसे प्रकट होते हैं?

सदाशिव से रजोगुण के आश्रय से ब्रह्मा, सत्त्व के आश्रय से विष्णु और तमोगुण के आश्रय से कालरुद्र का प्रादुर्भाव बताया गया है।

सदाशिवब्रह्माविष्णु
सृष्टि तत्त्व

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और आठ आवरणों का वर्णन कहाँ है?

अण्ड की उत्पत्ति और उसके आठ आवरणों का वर्णन लिङ्गपुराण के विषयों में बताया गया है।

ब्रह्माण्डअण्डआठ आवरण
सृष्टि तत्त्व

प्राधानिक सृष्टि प्राकृत सृष्टि और वैकृत सृष्टि कहाँ वर्णित हैं?

प्राधानिक, प्राकृत और वैकृत सृष्टि का वर्णन लिङ्गपुराण के विषयों में बताया गया है।

प्राधानिक सृष्टिप्राकृत सृष्टिवैकृत सृष्टि
पुराण परिचय

व्यासजी ने वैवस्वत मन्वन्तर में कितने श्लोकों में वर्णन किया?

वैवस्वत मन्वन्तर में श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजी ने लिङ्गपुराण का वर्णन ग्यारह हजार श्लोकों में किया।

वैवस्वत मन्वन्तरव्यासजीग्यारह हजार श्लोक
पुराण परिचय

एक करोड़ श्लोकों वाला कौन सा पुराण बताया गया है?

सौ करोड़ विस्तारवाले पुराणसमुच्चय में एक करोड़ श्लोकोंवाला पुराण लिङ्गपुराण बताया गया है।

एक करोड़ श्लोकलिङ्गपुराणपुराण श्लोक संख्या
पुराण परिचय

सूतजी ने व्यासजी से कौन सा पुराण सुना?

सूतजी ने लिङ्गपुराण को व्यासजी से सुना था।

सूतजीव्यासजीलिङ्गपुराण
पुराण परिचय

ग्यारहवाँ पुराण कौन सा है?

अठारह पुराणों में ग्यारहवाँ पुराण लिङ्गपुराण कहा गया है।

ग्यारहवाँ पुराणअठारह पुराणलिङ्गपुराण
पुराण परिचय

पुराणों को हर द्वापरयुग में कौन विभाजित करता है?

प्रत्येक द्वापरयुग में बृहद् पुराणसंहिता को व्यासजी अठारह पुराणों के रूप में विभक्त करते हैं।

पुराणद्वापरयुगव्यासजी
पुराण परिचय

ईशानकल्प में किस कथा का आधार बताया गया है?

ईशानकल्प में लिङ्ग के प्रादुर्भाव आदि से सम्बद्ध वृत्तान्तों को आधार बताया गया है।

ईशानकल्पलिङ्ग प्रादुर्भावब्रह्मा
पुराण परिचय

ब्रह्मा ने सबसे पहले किस पुराण की उद्भावना की?

महात्मा ब्रह्मा ने ईशानकल्प के लिङ्ग-प्रादुर्भाव आदि वृत्तान्तों के आधार पर श्रेष्ठ लिङ्गपुराण की उद्भावना की।

ब्रह्मालिङ्गपुराणईशानकल्प
श्रीमद्भागवत

दशम स्कंध पाठ से आत्मदेव को क्या मिला?

कथा के अंत में कहा गया है कि आत्मदेव ने दशम स्कंध का नियमपूर्वक पाठ करके भगवान श्रीकृष्ण के चरण प्राप्त किए।

दशम स्कंधआत्मदेवकृष्णचरण
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को कृष्ण की प्राप्ति कैसे हुई?

आत्मदेव ने गोकर्ण के उपदेश से घर छोड़ा, वन में हरि सेवा की और नियमपूर्वक दशम स्कंध का पाठ करके श्रीकृष्ण को प्राप्त किया।

आत्मदेवकृष्ण प्राप्तिदशम स्कंध
श्रीमद्भागवत

वन में आत्मदेव को क्या करना था?

गोकर्ण ने आत्मदेव को वन में शरीर-अभिमान और ममता छोड़कर भजन, साधुसेवा, काम-तृष्णा त्याग और कथा-रस में लगने को कहा।

आत्मदेववनगोकर्ण उपदेश
श्रीमद्भागवत

पुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?

गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।

पुत्र मोहगोकर्णआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने संसार को असार क्यों कहा?

गोकर्ण ने संसार को दुखरूप, मोहक और क्षणभंगुर कहा; पुत्र, धन और शरीर को स्थायी मानना अज्ञान बताया।

संसारगोकर्णवैराग्य
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने आत्मदेव को क्या समझाया?

गोकर्ण ने आत्मदेव को संसार की असारता, पुत्र-धन के मोह का दुख, शरीर की नश्वरता और भजन-साधुसेवा का मार्ग समझाया।

गोकर्णआत्मदेववैराग्य
श्रीमद्भागवत

कुपुत्र से क्या दुख होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण से कथा बताती है कि कुपुत्र धन, घर और माता-पिता की शांति नष्ट कर देता है और मोह को दुख में बदल देता है।

कुपुत्रधुंधुकारीआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव का धन कैसे नष्ट हुआ?

पहले आत्मदेव ने संतान के लिये आधा धन धर्मकर्म और दान में लगाया; बाद में धुंधुकारी ने कुसंग से पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

आत्मदेवधनधुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी ने माता-पिता के साथ क्या किया?

धुंधुकारी ने माता-पिता को मार-पीटकर घर के बर्तन उठा लिए और पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

धुंधुकारीमाता-पिताआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी के पाप क्या थे?

धुंधुकारी चोरी, आग लगाना, बालकों को कुएँ में डालना, दीनों को सताना, कुसंग और माता-पिता को मारना जैसे पाप करता था।

धुंधुकारीपापदुराचार
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी कैसा था?

धुंधुकारी महाखल, आचारहीन, क्रोधी, हिंसक, चोर, द्वेषी और बुरे संग में पड़ा हुआ बताया गया है।

धुंधुकारीदुष्ट पुत्रआचारहीन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।