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विस्तृत उत्तर
ईशानकल्प में लिङ्ग के प्रादुर्भाव आदि से सम्बद्ध वृत्तान्तों को आधार बताया गया है। इन्हीं वृत्तान्तों को आश्रित करके महात्मा ब्रह्मा ने श्रेष्ठ लिङ्गपुराण की उद्भावना की। यहाँ ईशानकल्प की अलग परिभाषा नहीं दी गई, केवल उसका संबंध लिङ्ग-प्रादुर्भाव आदि कथावृत्त से बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 2, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 1
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