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विस्तृत उत्तर
वर्णन में सौ करोड़ विस्तारवाले पुराणसमुच्चय का उल्लेख है। उसी में एक करोड़ श्लोकोंवाला लिङ्गपुराण बताया गया है। आगे कहा गया है कि अलग-अलग मन्वन्तरों में अनेक व्यासों ने इसे चार लाख श्लोकों में संक्षिप्त किया, और वैवस्वत मन्वन्तर में श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजी ने इसे ग्यारह हजार श्लोकों में कहा।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 2, PDF पृष्ठ 15, श्लोक 2-5
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