क्षीरसागर मंथनमाँ लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को ही क्यों चुना?
लक्ष्मी ने देखा: सबमें कोई न कोई दोष — किसी में तप+क्रोध, किसी में शक्ति+काम। फिर योगनिद्रा में परम शांत, निस्वार्थ, धर्म की प्रतिमूर्ति विष्णु को देखकर उन्हें वरमाला पहनाई और श्रीवत्स पर विराजमान हुईं।
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