विस्तृत उत्तर
माता लक्ष्मी सुतल लोक इसलिए गई थीं क्योंकि भगवान विष्णु महाराजा बलि के द्वारपाल बनकर सुतल में रहने लगे थे। जब भगवान वामन ने बलि को सुतल लोक का राज्य दिया और स्वयं हमेशा के लिए उनके द्वारपाल बन गए, तो वैकुंठ में माता लक्ष्मी अत्यंत चिंतित और दुखी हो गईं। भगवान विष्णु के बिना वैकुंठ सूना हो गया था और माता लक्ष्मी अपने स्वामी को वापस लाना चाहती थीं। देवर्षि नारद की सलाह पर माता लक्ष्मी ने सामान्य ब्राह्मणी का वेश धारण किया और श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन सुतल लोक में महाराजा बलि के पास पहुँचीं। वहाँ उन्होंने बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया और भगवान विष्णु को मुक्त करने का वर मांगा।
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