विस्तृत उत्तर
माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी इसलिए बांधी ताकि वे उन्हें अपना भाई बनाकर भगवान विष्णु को वैकुंठ लौटाने का वर मांग सकें। भगवान वामन जब बलि के द्वारपाल बनकर सुतल लोक में रहने लगे, तो माता लक्ष्मी वैकुंठ में चिंतित और दुखी हो गईं। देवर्षि नारद की सलाह पर उन्होंने सामान्य ब्राह्मणी का वेश धारण किया और श्रावण मास की पूर्णिमा को सुतल लोक पहुँचीं। वहाँ उन्होंने बलि को रक्षासूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई बना लिया। भावविभोर बलि ने उनसे कोई भी उपहार मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने कहा कि यदि आप मुझे सचमुच अपनी बहन मानते हैं, तो मेरे पति को मुक्त कर दीजिए, जो आपके महल के द्वारपाल के रूप में पहरा दे रहे हैं।
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