ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

पिण्डदान से जुड़े सभी प्रश्न(79)

पिण्डदान पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 79 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद सबसे जरूरी कर्म कौन से हैं?

मृत्यु के बाद पवित्रता-विधान, षट्पिण्ड, दशगात्र पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, सपिण्डीकरण और महादान जरूरी हैं।

#गरुड़ पुराण#मृत्यु कर्म#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

13-दिनीय यात्रा में परिजनों की भूमिका क्या है?

परिजन विलाप से बचकर पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, श्राद्ध, दान और सपिण्डीकरण से आत्मा की यात्रा में सहायता करते हैं।

#13 दिन#परिजन#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डदान आत्मा की सद्गति में कैसे सहायक है?

पिण्डदान पिण्डज शरीर बनाता है, प्रेत को तृप्त करता है और आत्मा को यममार्ग की यात्रा के योग्य बनाता है।

#पिण्डदान#सद्गति#पिण्डज शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अन्त्येष्टि आत्मा की यात्रा में कैसे मदद करती है?

अन्त्येष्टि आत्मा की शांति, पिण्डज शरीर निर्माण, प्रेतत्व निवारण और सद्गति में मदद करती है।

#अन्त्येष्टि#आत्मा यात्रा#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद परिजनों के कर्म क्यों महत्वपूर्ण हैं?

परिजनों के अन्त्येष्टि, पिण्डदान, श्राद्ध, महादान और सपिण्डीकरण आत्मा की सद्गति तय करने में महत्वपूर्ण हैं।

#परिजन#मृत्यु के बाद कर्म#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दसवें दिन के पिण्ड से क्या पूर्ण होता है?

दसवें दिन पिण्डज शरीर पूर्ण होता है और आत्मा में तीव्र भूख-प्यास जागती है।

#दसवाँ दिन#पिण्डदान#पूर्ण देह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

नौवें दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

नौवें दिन के पिण्ड से पैर बनते हैं।

#नौवाँ दिन#पिण्डदान#पैर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आठवें दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

आठवें दिन के पिण्ड से घुटने बनते हैं।

#आठवाँ दिन#पिण्डदान#घुटने
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सातवें दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

सातवें दिन के पिण्ड से जांघें बनती हैं।

#सातवाँ दिन#पिण्डदान#जांघें
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

छठे दिन के पिण्ड से कौन से अंग बनते हैं?

छठे दिन के पिण्ड से कमर और जननांग बनते हैं।

#छठा दिन#पिण्डदान#कटि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पाँचवें दिन के पिण्ड से क्या बनता है?

पाँचवें दिन के पिण्ड से नाभि और उदर बनते हैं।

#पाँचवाँ दिन#पिण्डदान#नाभि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

चौथे दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

चौथे दिन के पिण्ड से पीठ बनती है।

#चौथा दिन#पिण्डदान#पीठ
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तीसरे दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

तीसरे दिन के पिण्ड से हृदय और छाती बनते हैं।

#तीसरा दिन#पिण्डदान#हृदय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दूसरे दिन के पिण्ड से कौन से अंग बनते हैं?

दूसरे दिन के पिण्ड से गर्दन और कंधे बनते हैं।

#दूसरा दिन#पिण्डदान#गर्दन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पहले दिन के पिण्ड से कौन सा अंग बनता है?

पहले दिन के पिण्ड से सिर बनता है।

#पहला दिन#पिण्डदान#सिर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को पिण्ड का भाग क्यों दिया जाता है?

यमदूतों को पिण्ड का भाग इसलिए दिया जाता है ताकि वे संतुष्ट रहें और प्रेत को अकारण कष्ट न दें।

#यमदूत#पिण्डदान#तृतीय भाग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्ड का चौथा भाग कौन खाता है?

पिण्ड का चौथा भाग स्वयं प्रेत खाता है।

#पिण्ड का चौथा भाग#प्रेत#क्षुधा शांति
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दशगात्र में दिए गए पिण्ड के कितने भाग होते हैं?

दशगात्र के पिण्ड के चार भाग होते हैं।

#दशगात्र#पिण्ड के भाग#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डदान न होने पर आत्मा आकाश में क्यों भटकती है?

पिण्डदान न होने से पिण्डज शरीर नहीं बनता, इसलिए आत्मा भूखी-प्यासी वायव्य रूप में भटकती है।

#पिण्डदान#आकाश में भटकना#वायव्य रूप
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दशगात्र क्या होता है?

दशगात्र मृत्यु के बाद दस दिनों तक होने वाला पिण्डदान है, जिससे पिण्डज शरीर बनता है।

#दशगात्र#पिण्डदान#दस दिन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के दिन पिण्डदान का क्या महत्व है?

मृत्यु के दिन पिण्डदान आत्मा की शांति, शव की शुद्धि और अग्निदाह की योग्यता के लिए आवश्यक है।

#मृत्यु का दिन#पिण्डदान#शव शुद्धि
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद आत्मा को भूख-प्यास क्यों लगती है?

वायुजा देह में आत्मा अन्न नहीं खा सकती, पर भूख-प्यास रहती है; पिण्डज शरीर पूर्ण होने पर यह और तीव्र होती है।

#मृत्यु के बाद#भूख प्यास#वायुजा देह
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डदान से आत्मा का शरीर कैसे बनता है?

पिण्डदान के भागों से प्रेत के अंग बनते हैं, यमदूत संतुष्ट होते हैं और प्रेत को क्षुधा-शांति मिलती है।

#पिण्डदान#आत्मा का शरीर#दशगात्र
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर कैसे बनता है?

पिण्डज शरीर दस दिनों के पिण्डदान से सिर से पैरों तक क्रमशः बनता है।

#पिण्डज शरीर#दशगात्र#पिण्डदान
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर क्या होता है?

पिण्डज शरीर पिण्डदान से दस दिनों में बनने वाला प्रेत का पारलौकिक शरीर है।

#पिण्डज शरीर#पिण्डदान#दशगात्र
श्राद्ध-पितृ कर्म

पिंडदान में पिंड किस अनाज से बनाएं?

पिण्ड सामग्री: चावल (सर्वश्रेष्ठ) या जौ आटा + काले तिल (अनिवार्य) + शहद + घी + दूध → गोल पिण्ड। अंगूठे/मुट्ठी आकार। कुश पर, दक्षिण दिशा। गया = अक्षय फल। विसर्जन = नदी।

#पिण्डदान#पिण्ड#अनाज
श्राद्ध-पितृ कर्म

पितृ विसर्जनी अमावस्या पर तर्पण कैसे करें?

सर्वपितृ अमावस्या तर्पण: आश्विन अमावस्या (पितृ पक्ष अंतिम)। सभी पितरों हेतु। विधि: कुतप काल → दक्षिण मुख → अपसव्य → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण (प्रति पितर 3 बार) → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → कौवा-गाय-कुत्ते को भोजन → दान। गया सर्वश्रेष्ठ।

#सर्वपितृ अमावस्या#पितृ विसर्जनी#तर्पण
श्राद्ध-पितृ कर्म

महालया पक्ष में पितरों की पूजा कैसे करें?

पितृ पक्ष: भाद्रपद पूर्णिमा से अमावस्या (16 दिन)। मृत्यु तिथि पर श्राद्ध (अज्ञात हो तो अमावस्या)। विधि: दक्षिण मुख → अपसव्य जनेऊ → तिल-जौ-कुश-जल तर्पण → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → कौवे को भोजन → दान। गया पिण्डदान सर्वश्रेष्ठ।

#महालया#पितृ पक्ष#श्राद्ध
मंदिर संस्कार

मंदिर में श्राद्ध कर्म कर सकते हैं या नहीं?

सामान्यतः: मंदिर गर्भगृह में श्राद्ध (पिण्डदान) = अनुशंसित नहीं (भिन्न ऊर्जा)। अपवाद: गया विष्णुपद (श्राद्ध तीर्थ), प्रयाग, काशी — मंदिर में श्राद्ध अनुमत। मंदिर में पितर हेतु: विष्णु सहस्रनाम, गीता, अन्नदान = शुभ। श्राद्ध = घर/नदी/तीर्थ। पुरोहित से परामर्श।

#श्राद्ध#पितर कर्म#मंदिर श्राद्ध
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।