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शिवलिंग से जुड़े सभी प्रश्न(106)

शिवलिंग पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 106 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाने का क्या विधान है?

शिवलिंग पर केवल साबुत (अखंडित) अक्षत ही अर्पित करें — टूटे चावल वर्जित (शिव पुराण)। जलाभिषेक और चंदन तिलक के बाद दाहिने हाथ से चढ़ाएं। बिना कुमकुम/हल्दी के सादे श्वेत अक्षत प्रयोग करें। रुद्राभिषेक में 108 दाने का विधान। अक्षत पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है।

#अक्षत#चावल#शिवलिंग
मंदिर ज्ञान

मंदिर में नंदी शिवलिंग की तरफ मुख करके क्यों बैठता है?

परम भक्त (सदा शिव दर्शन), द्वारपाल (सुरक्षा), धर्म प्रतीक (धर्म→ईश्वर), ध्यानमग्न (आदर्श साधक), श्रवण (तंत्र ग्रहण)। भक्त: नंदी कान में मनोकामना → शिव तक।

#नंदी#शिवलिंग#मुख
शिव पूजा नियम

शिवलिंग का आकार कितना होना चाहिए घर की पूजा के लिए?

घर: अंगुष्ठ प्रमाण (शिव पुराण कोटिरुद्र संहिता) — 2-4 इंच आदर्श, अधिकतम 6 इंच। बड़ा शिवलिंग = अत्यधिक ऊर्जा, घर में अनुपयुक्त। मंदिर: कोई सीमा नहीं। ऊंचाई:चौड़ाई = 2:1 अनुपात उत्तम।

#आकार#ऊंचाई#अंगुष्ठ
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर जनेऊ चढ़ाने का क्या अर्थ होता है?

जनेऊ चढ़ाना = शिव को वैदिक संस्कार से सम्मानित करना। तीन धागे = त्रिगुण (सत्त्व-रज-तम) / त्रिदेव / ब्रह्मसूत्र। बाएं कंधे से दाहिनी ओर चढ़ाएं। सफेद, नया जनेऊ ही अर्पित करें। विद्या प्राप्ति, संस्कार रक्षा, पितृ दोष निवारण।

#जनेऊ#यज्ञोपवीत#शिवलिंग
ध्यान अनुभव

स्वप्न में शिवलिंग दिखने का क्या अर्थ है?

अत्यंत शुभ — शिव कृपा, साधना सही, कुंडलिनी प्रगति, विघ्न नाश। श्वेत=शांति, अभिषेक=कृपा, टूटा=पूजा कमी। करें: पंचाक्षरी, अभिषेक, सोमवार।

#स्वप्न#शिवलिंग#दिखना
तंत्र शास्त्र

तंत्र में पारद शिवलिंग का क्या विशेष महत्व है?

पारद = शिव वीर्य (रस शास्त्र)। पारद संहिता: पारद शिवलिंग = करोड़ शिवलिंग फल। 8 संस्कार शुद्ध = विषमुक्त। ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली। सावधानी: 90%+ नकली। अशुद्ध = विषैला। विश्वसनीय + प्रमाणपत्र।

#पारद#शिवलिंग#पारा
शिव पूजा विधि

शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है, विधि सहित?

नर्मदेश्वर/स्वयंभू = प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक। मनुष्य निर्मित = अनिवार्य। विधि: शुभ मुहूर्त → भूमि शुद्धि → गणेश-नवग्रह पूजन → कलश स्थापना → वैदिक मंत्रों से प्राण आवाहन → षोडशोपचार पूजन → हवन → पूर्णाहुति। योग्य पुरोहित से ही कराएं। घर के लिए नर्मदेश्वर सर्वोत्तम विकल्प।

#प्राण प्रतिष्ठा#शिवलिंग#स्थापना
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर नारियल पानी चढ़ाने का क्या महत्व होता है?

शिवलिंग पर नारियल पानी चढ़ाना वर्जित है। कारण: नारियल 'श्रीफल' = लक्ष्मी का स्वरूप (विष्णु-संबंधित)। शिवलिंग का चढ़ावा ग्रहण नहीं होता — नारियल पानी व्यर्थ होगा। साबुत नारियल शिव के समक्ष रख सकते हैं, पर नारियल पानी से अभिषेक कभी न करें। शिवलिंग पर चढ़ा नारियल प्रसाद में न लें।

#नारियल पानी#शिवलिंग#निषेध
शिव पूजा नियम

शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए या नहीं, शास्त्रों में क्या कहा गया है?

शास्त्रों के अनुसार: शिवलिंग का शीर्ष (रुद्र) भाग सीधे स्पर्श न करें। पुरुष स्नान के बाद स्पर्श कर सकते हैं। महिलाओं के लिए सीधा स्पर्श अनेक परंपराओं में वर्जित — 'नंदी मुद्रा' का विकल्प है। अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष मनाही। मासिक धर्म में स्पर्श सर्वथा वर्जित। विषय पर मतभेद विद्यमान हैं।

#स्पर्श#शिवलिंग#नियम
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती, इसका कारण बताएं?

शिवलिंग पर हल्दी वर्जित। कारण: हल्दी = स्त्री सौभाग्य/सौंदर्य प्रतीक, शिव = वैरागी। हल्दी = विष्णु/बृहस्पति से संबंधित (पीतांबर)। रसोई सामग्री, शिव श्मशानवासी। शिवलिंग पर चंदन, भस्म या केसर लगाएं। पार्वती प्रतिमा पर हल्दी स्वीकार्य।

#हल्दी#शिवलिंग#निषेध
स्त्री धर्म

महिलाएं शिवलिंग पर जल चढ़ा सकती हैं या नहीं?

मत भिन्नता। शास्त्र: निषेध नहीं, शिव=अर्धनारीश्वर। परंपरा: स्पर्श वर्जित(कुछ क्षेत्र)=सामाजिक, शास्त्रीय नहीं। जल=मान्य, स्पर्श=परंपरा अनुसार। भगवान भाव देखते।

#महिला#शिवलिंग#जल
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने का क्या प्रभाव होता है?

तिल = पापनाशक (शिव पुराण)। काले तिल विवादित: कुछ परंपरा में वर्जित (विष्णु संबंध), कुछ में शुभ (शनि दोष निवारण, कालसर्प दोष)। सफेद तिल सर्वमान्य शुभ। काले तिल चढ़ाने हेतु कुलपुरोहित से परामर्श लें।

#काले तिल#शिवलिंग#शनि
शिव पर्व

श्रावण मास में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?

प्रातःकाल सर्वोत्तम। गंगाजल श्रेष्ठ, शुद्ध जल भी स्वीकार्य। तांबे/कांसे/मिट्टी के लोटे से (शंख वर्जित)। 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए। जलाधारी उत्तर दिशा। शिव पुराण: 'जलेन वृष्टिमाप्नोति' = धन प्राप्ति। केवल सोमवार नहीं, प्रतिदिन चढ़ाएं। निर्माल्य जल ग्रहण न करें।

#श्रावण#जलाभिषेक#प्रतिदिन
शिव पूजा नियम

शालिग्राम और शिवलिंग की एक साथ पूजा कर सकते हैं या नहीं?

हां — स्मार्त/समन्वयवादी परंपरा में दोनों की एक साथ पूजा वैध। सामग्री भेद रखें: तुलसी = शालिग्राम, बेलपत्र = शिवलिंग। शंख = शालिग्राम, शिवलिंग पर वर्जित। शिवलिंग का निर्माल्य ग्रहण न करें, शालिग्राम का कर सकते हैं। कुछ सम्प्रदायों में भिन्न मत है।

#शालिग्राम#शिवलिंग#विष्णु
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय प्रमुख मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' (सर्वसुलभ, शिव पुराण)। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' (महामृत्युंजय, यजुर्वेद)। 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे...' (रुद्र गायत्री)। तांबे के लोटे से, उत्तर दिशा में मुख करके, छोटी धारा में जल अर्पित करें।

#जलाभिषेक#शिवलिंग#मंत्र
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर रात को पूजा करना शुभ है या अशुभ?

रात्रि पूजा अत्यंत शुभ। महाशिवरात्रि: चार प्रहर रात्रि पूजा सर्वश्रेष्ठ (शिव पुराण)। प्रदोष काल (संध्या): शिव पूजा का श्रेष्ठ समय (स्कन्द पुराण)। शिव = महाकाल, समय से परे। प्रातःकाल नियमित पूजा, रात्रि विशेष अवसरों पर — दोनों शुभ।

#रात्रि पूजा#प्रदोष#शिवरात्रि
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर घी का दीपक जलाना आवश्यक है या तेल का भी चलता है?

घी का दीपक सर्वश्रेष्ठ (शिव पुराण) — सात्विक, वंश वृद्धि, सुख-शांति। सरसों/तिल तेल का दीपक भी स्वीकार्य — शत्रु नाश, शनि दोष शांति। रिफाइंड/वनस्पति घी कभी न जलाएं। दीपक शिवलिंग की दाहिनी ओर रखें। रूई की बत्ती ही प्रयोग करें। विशेष पूजा में घी अनिवार्य।

#दीपक#घी#तेल
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर चावल चढ़ाने की परंपरा किस पुराण में वर्णित है?

शिव पुराण में अक्षत (साबुत चावल) शिवलिंग पर चढ़ाने का विधान है। टूटे चावल सर्वथा वर्जित (शिव पुराण)। रुद्राभिषेक में 108 दाने का विधान। चावल पूर्णता, अन्न समृद्धि और सात्विकता का प्रतीक। श्वेत, साबुत, बिना कुमकुम/हल्दी के सादे अक्षत ही चढ़ाएं।

#चावल#अक्षत#शिवलिंग
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर चमेली का तेल चढ़ाने की विधि क्या है?

चमेली का तेल शिव-प्रिय सुगंधित द्रव्य है — श्रृंगार में केवल इत्र/सुगंधित तेल शिवलिंग पर स्वीकार्य। विधि: जलाभिषेक → चंदन तिलक → चमेली तेल की कुछ बूंदें → बेलपत्र। लाभ: भूमि-वाहन सुख, सकारात्मकता, वैवाहिक मधुरता। शुद्ध प्राकृतिक तेल ही प्रयोग करें।

#चमेली#तेल#इत्र
शिवलिंग प्रकार

स्फटिक शिवलिंग की पूजा का क्या विशेष विधान बताया गया है?

शैव आगम: स्फटिक शिवलिंग सर्वोच्च शुद्ध पदार्थ। तेज ज्योतिर्लिंग समान। 'स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि' (शिव पुराण)। शुभ मुहूर्त पर प्राण प्रतिष्ठा करें। गंगाजल/दूध/पंचामृत अभिषेक। ध्यान साधना/त्राटक में अत्यंत प्रभावशाली। मानसिक शांति, वास्तु दोष निवारण, ग्रह शांति।

#स्फटिक#क्रिस्टल#शिवलिंग
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है?

आध्यात्मिक: शिव ने हालाहल विष ग्रहण किया — दूध शीतल, ताप शांत करने का प्रतीक। पंचामृत अभिषेक का प्रमुख अंग। सत्त्वगुण, शुद्धता और अहंकार त्याग का प्रतीक। वैज्ञानिक: शिवलिंग की ऊर्जा का शीतल संतुलन। कच्चा गाय का दूध ही अर्पित करें।

#दूध#शिवलिंग#अभिषेक
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर केसर चढ़ाने से क्या विशेष लाभ मिलता है?

केसर को चंदन में मिलाकर 'गंधोदक' बनाकर शिवलिंग पर लगाएं (रुद्राभिषेक विधि)। लाभ: आर्थिक समृद्धि, दरिद्रता नाश, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, गुरु ग्रह बल, मानसिक शांति। शुद्ध केसर + चंदन ही प्रयोग करें। हल्दी वर्जित है लेकिन केसर शिव-प्रिय है।

#केसर#शिवलिंग#चंदन
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर भांग चढ़ाने का तांत्रिक महत्व क्या है?

पौराणिक: समुद्र मंथन के बाद विष ताप शांत करने हेतु शिव को भांग अर्पित (शिव पुराण)। तांत्रिक: भांग = 'विजया' — मन के विकारों पर विजय का प्रतीक। चेतना का रूपांतरण — नकारात्मकता शिव को समर्पित। त्याज्य वस्तुओं का समर्पण = शिव की सर्वव्यापकता। सावन/शिवरात्रि पर विशेष फलदायी। भांग सेवन नहीं, समर्पण का अर्थ है।

#भांग#विजया#शिवलिंग
शिव भक्ति

स्वप्न में शिवलिंग दिखने का क्या अर्थ होता है?

अत्यंत शुभ: शिव कृपा, मनोकामना पूर्ति निकट, आध्यात्मिक उन्नति, मंत्र सिद्धि, संकट निवारण। प्रकाशमान शिवलिंग = सर्वोत्तम। सर्प सहित = कुंडलिनी शक्ति। स्वप्न व्याख्या विषयगत — अत्यधिक विश्लेषण से बचें।

#स्वप्न#शिवलिंग#अर्थ
पूजा घर नियम

पूजा घर में शालिग्राम और शिवलिंग साथ रख सकते हैं क्या?

हाँ, शालिग्राम और शिवलिंग साथ रख सकते हैं — शास्त्रों में कोई निषेध नहीं है। स्कंद पुराण में शिवजी ने शालिग्राम की स्तुति की है। दोनों की नियमित पूजा अनिवार्य है। शिवलिंग पर तुलसी और शालिग्राम पर बेलपत्र वर्जित — अर्पण सामग्री अलग रखें।

#शालिग्राम#शिवलिंग#विष्णु शिव
शिव पूजा सामग्री

सावन में शिवलिंग पर कितनी बार बेलपत्र चढ़ाएं?

1 भी पर्याप्त — 'एकबिल्वं शिवार्पणम्' = 3 जन्म पाप नाश। शुभ: 3/5/8/11/21/108। सावन प्रतिदिन। त्रिदल, अखंडित, उल्टा चढ़ाएं। सोमवार/चतुर्दशी/अमावस्या को न तोड़ें।

#सावन#बेलपत्र#संख्या
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर केतकी का फूल चढ़ाना क्यों वर्जित माना गया है?

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): ब्रह्मा-विष्णु के श्रेष्ठता विवाद में शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने ऊपरी छोर देखने का झूठ बोला — केतकी ने झूठी गवाही दी। शिव ने क्रुद्ध होकर केतकी को श्राप दिया — शिव पूजा में सदा के लिए वर्जित। यह सर्वमान्य निषेध है, निर्णयसिंधु में भी पुष्टि मिलती है।

#केतकी#केवड़ा#शिवलिंग
शिव पूजा विधि

शिवलिंग पर शहद चढ़ाने की विधि और उसका फल क्या है?

शहद पंचामृत अभिषेक का प्रमुख अंग। विधि: पहले जल से स्नान → शहद की धारा → 'ॐ नमः शिवाय' जप → पुनः जल अभिषेक। फल: दरिद्रता नाश, रोग निवारण, वाणी में मधुरता, ग्रह दोष शांति, मानसिक शांति। शुद्ध प्राकृतिक शहद ही प्रयोग करें। शिवलिंग का चढ़ावा ग्रहण न करें।

#शहद#मधु#शिवलिंग
लिंग आख्यान

लिंग आख्यान पढ़ने से क्या फल मिलता है?

शिवलिंग के सामने प्रतिदिन लिंग-आख्यान पढ़ने वाला शिवत्व को प्राप्त होता है।

#लिंग आख्यान#शिवत्व#पाठ फल
लिंग आख्यान

शिवलिंग के सामने कौन सा पाठ करना चाहिए?

शिवलिंग के समक्ष लिंग-आख्यान का प्रतिदिन पाठ करना बताया गया है।

#शिवलिंग#लिंग आख्यान#पाठ
लिंग तत्त्व

शिवलिंग को लिंग क्यों कहा जाता है?

क्योंकि यह समग्र जगत को अपने में लय करता है, इसलिए इसे लिंग कहा गया है।

#शिवलिंग#लिंग#जगत का लय
लिंग तत्त्व

शिवलिंग का असली अर्थ क्या है?

समग्र जगत को अपने में लय करने के कारण इसे लिंग कहा गया है।

#शिवलिंग#लिंग अर्थ#लय
शिवलिंग पूजा

लिंगवेदी क्या होती है?

लिंगवेदी महादेवी पार्वती का रूप बताई गई है, जबकि लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित रहते हैं।

#लिंगवेदी#पार्वती#महादेवी
शिवलिंग पूजा

शिवलिंग में शिव और पार्वती कैसे माने जाते हैं?

लिंगवेदी के रूप में महादेवी पार्वती और लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित बताए गए हैं।

#शिवलिंग#पार्वती#महेश्वर
लिंग रूप

लिंग और लिंगी क्या हैं?

विष्णु स्तुति में शिव को ऊर्ध्व लिंग, लिंगी, हेमलिंग, जललिंग और शिवलिंग रूप में नमस्कार किया गया है।

#लिंग#लिंगी#ऊर्ध्व लिंग
लिंग अन्वेषण

ब्रह्मा और विष्णु शिवलिंग का अंत क्यों नहीं पा सके?

वह लिंग आदि-मध्य-अन्त से हीन और अवर्णनीय था, इसलिए ब्रह्मा ऊपर जाकर भी अंत और विष्णु नीचे जाकर भी मूल नहीं पा सके।

#ब्रह्मा#विष्णु#अनादि अनन्त
लिंग तत्त्व

शिवलिंग क्या है?

लिंग को प्रधान कहा गया है और आगे वही लिंगरूप प्रणव सभी लोकों की सृष्टि करने वाला बताया गया है।

#शिवलिंग#लिंग#प्रधान
लिंगोद्भव

शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

ब्रह्मा और विष्णु के विवाद को दूर करने तथा ज्ञान देने के लिए समुद्र में ज्योतिर्मय, आदि-अन्तहीन लिंग प्रकट हुआ।

#शिवलिंग#लिंगोद्भव#ब्रह्मा
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिवलिंग में ध्यान क्यों बताया गया है?

क्योंकि शिव ने स्वयं कहा कि ब्रह्मा और विष्णु द्वारा देखे गए लिंग में ही सबको उनका ध्यान करना चाहिए।

#शिवलिंग#ध्यान#श्रद्धा
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिव दर्शन किस साधन से मिलता है?

शिव दर्शन श्रद्धा से मिलता है; ब्रह्मा ने गायत्री-उपासना से शिव का दर्शन किया था।

#शिव दर्शन#श्रद्धा#भक्ति
तीर्थ माहात्म्य

वाराणसी माहात्म्य किसके साथ वर्णित है?

वाराणसी माहात्म्य क्षेत्रमाहात्म्य, लिङ्ग-उपासना, स्नानविधि और शौचाचार के प्रसंगों के साथ वर्णित है।

#वाराणसी#क्षेत्र माहात्म्य#शिवलिंग
शिव तत्त्व

शिवलिंग का प्राकट्य किस विवाद के बाद बताया गया है?

शिवलिंग का प्राकट्य ब्रह्मा और विष्णु के विवाद के बाद बताया गया है।

#शिवलिंग#प्राकट्य#ब्रह्मा
व्रत के नियम और वर्जित वस्तुएं

शिवलिंग पर नारियल पानी क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?

साबुत नारियल शिव को अर्पित होता है, परंतु नारियल पानी से अभिषेक निषिद्ध है। कारण: शिव को अर्पित जल = 'चरणामृत' (ग्रहण योग्य), परंतु देवताओं को अर्पित नारियल का जल शास्त्रों में ग्रहण करने योग्य नहीं माना गया।

#नारियल पानी वर्जित#शिवलिंग#चरणामृत
व्रत के नियम और वर्जित वस्तुएं

शिव को हल्दी और कुमकुम क्यों नहीं चढ़ाते?

शिवलिंग = पुरुषार्थ, वैराग्य और संहारक ऊर्जा का स्वरूप। हल्दी और कुमकुम = शृंगार, भौतिक आकर्षण और सौभाग्य के प्रतीक जो देवियों (पार्वती, लक्ष्मी) को अर्पित होते हैं। वैरागी शिव को इनका अर्पण इसीलिए निषिद्ध है।

#हल्दी कुमकुम वर्जित#शिवलिंग#वैरागी
मंत्र और उपासना

महामृत्युंजय मंत्र और मार्कण्डेय ऋषि की कथा क्या है?

मार्कण्डेय ऋषि ने महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप किया → यमराज को परास्त किया → शिव ने शिवलिंग से प्रकट होकर 'चिरंजीवी' होने का वरदान दिया।

#मार्कण्डेय ऋषि#यमराज#चिरंजीवी
रुद्राभिषेक

महामृत्युंजय अनुष्ठान में रुद्राभिषेक क्यों जरूरी है?

रुद्राभिषेक के बिना महामृत्युंजय अनुष्ठान अपूर्ण है — सवा लाख जप से उत्पन्न तीव्र ऊष्मा को शांत करने के लिए शिवलिंग पर शीतल द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। यह परंपरा समुद्र मंथन से जुड़ी है।

#रुद्राभिषेक#ऊष्मा शांत#शिवलिंग
प्राण प्रतिष्ठा परिचय

शिवलिंग में प्राण प्रतिष्ठा क्या है?

प्राण प्रतिष्ठा आगम और तंत्र शास्त्रों में वर्णित वह गूढ़ प्रक्रिया है जिसके द्वारा मंत्रों से शिवलिंग में देवता की जीवन-शक्ति, चेतना और इंद्रियाँ स्थापित की जाती हैं — जड़ प्रतिमा चैतन्य और कृपा का जीवंत केंद्र बन जाती है।

#प्राण प्रतिष्ठा#शिवलिंग#मंत्र चैतन्य
पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य

पारद शिवलिंग को 'रसलिंग' क्यों कहते हैं?

पारद शिव का 'वीर्य' (जीव-तत्व) माना गया है — इसीलिए पारद से निर्मित शिवलिंग को 'जीवंत धातु' या 'रसलिंग' कहते हैं।

#रसलिंग#जीवंत धातु#पारद
रुद्राभिषेक की पूजा विधि

रुद्राभिषेक में जनेऊ क्यों चढ़ाते हैं?

रुद्राभिषेक के षोडशोपचार क्रम में जनेऊ (यज्ञोपवीत) चढ़ाना अनिवार्य चरण है — जनेऊ पहनाने के बाद दो बार आचमन करने का विधान है।

#जनेऊ#यज्ञोपवीत#षोडशोपचार
पूजा विधि

कालसर्प पूजा में अभिषेक कैसे करते हैं?

कालसर्प पूजा में महामृत्युंजय मंत्र जपते हुए शिवलिंग और नाग-प्रतिमा पर कच्चे दूध की धारा अर्पित करें, फिर जल-धारा से अभिषेक करें — भाव रखें कि शिव के आभूषण (नाग) का अभिषेक हो रहा है।

#अभिषेक#कच्चा दूध#महामृत्युंजय
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