विस्तृत उत्तर
स्वर्ग में शिक्षा पूरी करने के बाद इंद्र ने अर्जुन से गुरुदक्षिणा के रूप में निवातकवचों का वध करने के लिए कहा। अर्जुन ने इंद्र के सारथी मातलि के साथ उन पर आक्रमण किया। राक्षसों ने अपनी मायावी शक्तियों से अर्जुन को घेर लिया। जब अर्जुन पर उनके बाणों की वर्षा अप्रभावी होने लगी, तो मातलि ने उन्हें वज्रास्त्र का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। अर्जुन ने वज्रास्त्र का आह्वान किया जिसने बिजली के प्रचंड प्रहारों से सभी निवातकवचों का क्षण भर में संहार कर दिया। यह किसी नश्वर द्वारा वज्र की शक्ति का सबसे विनाशकारी और सफल प्रयोग था।
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