विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प (उत्तरखंड) में बभ्रुवाहन की कथा एक केंद्रीय और उदाहरणपरक कथा है।
प्रेतकल्प में स्थान — बभ्रुवाहन की कथा गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में है जो प्रेतकल्प का हिस्सा है। प्रेतकल्प में मृत्यु के बाद के कर्मकांड, प्रेत-मुक्ति और दान-श्राद्ध की महिमा का वर्णन है।
प्रेतकल्प के विषयों का उदाहरण — प्रेतकल्प में तीन प्रमुख विषय हैं — प्रेत-अवस्था, दान-विधि और श्राद्ध-क्रम। बभ्रुवाहन की कथा इन तीनों का एक साथ जीवंत उदाहरण है।
उपदेश की पुष्टि — गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु गरुड़ को सिद्धांत रूप में जो बताते हैं — 'दूसरे के श्राद्ध से भी प्रेत मुक्त होता है' — उसे व्यावहारिक उदाहरण से सिद्ध करने के लिए यह कथा सुनाई गई है।
कथा का स्थान — गरुड़ पुराण में — 'नाना प्रकार के नरकों से बचने के उपाय, सद्गति हेतु संतान का महत्व, बभ्रुवाहन नामक घोर वन में भटकते प्रेत की राजा द्वारा अन्त्येष्टि तथा प्रेतत्व से उसकी मुक्ति की कथा' — इसे प्रेतकल्प के सारांश में उल्लेखित किया गया है।
इस प्रकार यह कथा प्रेतकल्प की सैद्धांतिक बातों को व्यावहारिक धरातल पर सिद्ध करती है।





